उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी सिलेंडर उठान,190 रुपये का पाइप जबरन थोपने का आरोप
-सोनू कश्यप-
प्रतापपुर,20 मार्च 2026 (घटती-घटना)। नगर पंचायत प्रतापपुर में रसोई गैस को लेकर हालात अब त्राहि-त्राहि की स्थिति में पहुंच चुके हैं। एक ओर जहां उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा,वहीं दूसरी ओर अब फर्जीवाड़े का ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आम उपभोक्ता अब मजबूरी में महंगे दामों पर गैस खरीदने को विवश हो रहे हैं।
वार्ड क्रमांक 6 निवासी महेंद्र गुप्ता के साथ जो हुआ, वह न केवल चौंकाने वाला है बल्कि यह संकेत भी देता है कि कहीं न कहीं गैस वितरण में बड़ा खेल चल रहा है। जब महेंद्र गुप्ता अपनी गैस भरवाने एजेंसी पहुंचे,तो उन्हें ्यङ्घष्ट अपडेट न होने का हवाला देकर लौटा दिया गया। लेकिन जैसे ही उन्होंने ्यङ्घष्ट प्रक्रिया पूरी कराई, एजेंसी के रिकॉर्ड ने जो खुलासा किया, वह हैरान कर देने वाला था।
रिकॉर्ड में दर्ज था कि उनके नाम पर 24 फरवरी को गैस सिलेंडर पहले ही उठाया जा चुका है। जबकि महेंद्र गुप्ता का साफ कहना है कि उन्होंने आखिरी बार जुलाई 2025 में ही गैस लिया था और उसके बाद से कोई सिलेंडर नहीं उठाया। यहीं नहीं, एजेंसी के रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर भी उनका नहीं था। जब उस नंबर पर संपर्क किया गया,तो वह किसी होटल संचालक का निकला। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी तरीके से गैस सिलेंडर उठाकर कहीं और खपाया जा रहा है।
यह मामला अकेला नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की गड़बड़ी कई उपभोक्ताओं के साथ हो रही है, लेकिन डर या जानकारी के अभाव में लोग खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। इससे यह अंदेशा और मजबूत होता है कि गैस एजेंसी स्तर पर संगठित तरीके से फर्जीवाड़ा कर गैस की कालाबाजारी की जा रही है।
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए एक और बड़ा आरोप सामने आया है। नए गैस उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर लेने के दौरान 190 रुपये का पाइप जबरन थमाया जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि वे पाइप लेने से इनकार करते हैं,तो उन्हें सिलेंडर देने से साफ मना कर दिया जाता है। जब इस संबंध में डीलर से सवाल किया गया, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ऊपर से ही ऐसा आदेश मिला हुआ है।” इस जबरदस्ती से उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है और इसे खुलेआम वसूली का जरिया बताया जा रहा है। इधर, प्रतापपुर क्षेत्र में पहले से ही गैस की भारी किल्लत बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां 45 दिनों के अंतराल पर सिलेंडर मिल रहा है,वहीं शहरी क्षेत्रों में भी 25 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में जब आम उपभोक्ता लाइन में लगकर भी गैस नहीं पा रहे,वहीं दूसरी ओर होटलों को तत्काल गैस सिलेंडर उपलब्ध हो जाना कई सवाल खड़े करता है। इससे यह आशंका और गहराती है कि आम जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर व्यावसायिक उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। गैस की इस किल्लत,फर्जीवाड़े और जबरन वसूली ने मिलकर लोगों का गुस्सा अब उबाल पर पहुंचा दिया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि जल्द ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई,तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गैस एजेंसी के पूरे रिकॉर्ड की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस पूरे मामले पर फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल ने भी गंभीरता दिखाई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी उपभोक्ता के नाम पर कोई अन्य व्यक्ति गैस उठा रहा है, तो यह पूरी तरह से गलत और दंडनीय है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है, क्योंकि फिलहाल प्रतापपुर की जनता गैस की कमी, फर्जीवाड़े और जबरन वसूली के तीनहरे संकट से जूझ रही है—जहां रसोई की आग जलाना भी अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
इस पूरे मामले पर फूड इंस्पेक्टर शशि जायसवाल से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि,यह जानकारी मुझे आपके माध्यम से प्राप्त हो रही है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह पूरी तरह से गलत है और ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। मामले की जांच कराई जाएगी और यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है,तो उचित कार्रवाई के लिए प्रकरण उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।
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