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कोरिया-सूरजपुर-एमसीबी,@जंगलों में आग, दफ्तरों में हिसाब…किसे बचा रहा वन विभाग?

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  • फायर वाचर गायबअधिकारी व्यस्ततीन जिलों में जंगल जलकर राख
  • बिल पास करने में तेजीआग बुझाने में सुस्तीवन विभाग कटघरे में

-न्यूज डेस्क-
कोरिया-सूरजपुर-एमसीबी, 20 मार्च 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के कोरिया,सूरजपुर और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिलों के जंगल इन दिनों भीषण आग की चपेट में हैं,यह सिर्फ एक मौसमी वनाग्नि नहीं,बल्कि एक गहरी प्रशासनिक बीमारी का लक्षण बनकर सामने आई है,इस इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में हमने जमीनी हालात, स्थानीय लोगों के बयान, विभागीय गतिविधियों, पर्यावरणीय नुकसान और सिस्टम की कमजोरियों का विस्तृत विश्लेषण किया है। बता दे की छत्तीसगढ़ के कोरिया और सूरजपुर जिले की सीमा पर स्थित जंगलों में इन दिनों आग का तांडव देखने को मिल रहा है, बीते कुछ दिनों से लगी इस भीषण आग ने न केवल बेशकीमती वन संपदा को राख में तब्दील कर दिया है, बल्कि जैव विविधता के लिए भी बड़ा संकट पैदा कर दिया है।
जंगल धधक रहे और अधिकारी मार्च की बिलिंग में व्यस्त
एक तरफ जहाँ जंगलों में आग लगी है और वन संपदा जलकर खाक हो रही है,वहीं वन विभाग के आला अधिकारी और कर्मचारी फील्ड से नदारद हैं। सूत्रों की मानें तो अधिकारी इस समय मार्च क्लोजिंग और बिलों के भुगतान के काम में व्यस्त हैं, बजट खपाने और कागजी खानापूर्ति की होड़ में किसी का ध्यान धधकते पेड़ों और बेजुबान जानवरों की ओर नहीं है। शायद यही वजह है कि जंगलों में न तो गश्त बढ़ाई गई और न ही आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम किए गए। अधिकारियों की यह ऑफिस वाली व्यस्तता प्रकृति पर भारी पड़ रही है।
सिस्टम फेल,इंद्र देव ने बचाई लाज
जहाँ एक ओर जंगल घंटों धधकते रहे,वहीं वन विभाग की मुस्तैदी के दावों की पोल खुल गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि आग लगने के दौरान फायर वाचर मौके से पूरी तरह नदारद रहे। घंटों तक जंगल जलता रहा, लेकिन विभाग का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति सुध लेने नहीं पहुँचा, अंततः जब मानवीय तंत्र विफल हो गया, तब इंद्र देव ने वनों की पुकार सुनी,क्षेत्र में हुई अचानक बारिश ने धधकती लपटों को शांत किया और आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि,बारिश होने से पहले ही एक बड़े हिस्से की वन संपदा जलकर खाक हो चुकी थी। यह विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
बर्बादी का मंजरः राख हुए भविष्य के वृक्ष
क्षेत्र से मिल रही जानकारी के अनुसार,इस आग की सबसे ज्यादा मार नन्हे पौधों (नवांकुरों) पर पड़ी है। हाल के वर्षों में उगे छोटे पौधे पूरी तरह जलकर खाक हो गए हैं,जिससे भविष्य के जंगल का आधार ही खत्म हो गया है। इसके अलावा,बड़े पेड़ों के निचले हिस्सों को भी गंभीर क्षति पहुंची है,जिससे उनके सूखने का खतरा बढ़ गया है।
गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व पर मंडराया संकट
सबसे दुखद और डराने वाली खबर गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व से आ रही है,पार्क परिक्षेत्र सोनहत रिहन्द के जंगलों में भी भीषण आग की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि यह आग कछाड़ी क्षेत्र और छतरँग के आगे के जंगलों तक फैल चुकी है।
वन्यजीवों का पलायन : जान पर बनी
टाइगर रिजर्व वन्यप्राणियों का सुरक्षित आशियाना माना जाता है,यहाँ बाघों के साथ-साथ भालू, तेंदुआ और हिरणों की बड़ी आबादी है,आग के कारण न केवल उनकी बसाहट जल रही है,बल्कि धुआं और गर्मी की वजह से जंगली जानवर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं,इससे मानव-वन्यजीव द्वंद्व की स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।
मनेंद्रगढ़ के बड़गांव कला मार्ग पर भी फैली आग
ताजा जानकारी के अनुसार, मनेंद्रगढ़ जिले के बड़गांव कला मार्ग पर स्थित जंगलों में भी भीषण आग की लपटें देखी जा रही हैं। मार्ग के किनारे स्थित वन क्षेत्रों में लगी इस आग से राहगीरों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धुएं के गुबार और बढ़ती गर्मी के कारण इस पूरे इलाके में वन संपदा को भारी नुकसान पहुँचने की खबर है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी चिंता है कि यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो यह आग रिहायशी बस्तियों तक पहुँच सकती है।

प्रभावित क्षेत्रः आग की चपेट में कई रेंज
आग का दायरा इतना विस्तृत है कि इसने दोनों जिलों के कई प्रमुख वन क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया हैः
सूरजपुर जिला
कोरिया सीमा से लगे सुरजपुर के किरवाही वनगवां और छतरँग के घने जंगलों में आग ने भारी तबाही मचाई है,वन्यजीवों पर संकट और पर्यावरण को क्षति पहुची है।
कोरिया जिला

जोगिया कछाड़ी रेगुलर फॉरेस्ट क्षेत्र के अलावा चंदहा गिधेर क्षेत्र के जंगलों में आग देखी गई है,वही तर्रा बसेर के जंगल भी प्रभावित बताए जा रहे है।
बड़गांव कला,बिहारपुर रेंज के जंगल, मनियारी से कोटाडोल मार्ग पर आग की जानकारी मिली है,स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आग लगने के कारण धुआं इतना घना है कि आसपास के गांवों दूर से ही धुंआ दिखाई देने लगा था,जंगलों में रहने वाले जंगली जानवर भी अपनी जान बचाने के लिए रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर सकते हैं,जिससे मानव-वन्यजीव द्वंद्व की स्थिति पैदा होने की आशंका है, सूखे पत्तों और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है। छोटे पौधे तो नाममात्र भी नहीं बचे हैं।


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