Breaking News

सोनहत (कोरिया)@सोनहत अस्पताल में ‘कायाकल्प’ की क्रांति: सरकारी सिस्टम का ऐसा रूप, जिसे देखकर प्राइवेट अस्पताल भी हो जाएं असहज

Share

  • सोनहत अस्पताल का कायाकल्प…सरकारी सिस्टम बना ‘कॉर्पोरेट’ से भी बेहतर!
  • जहां कभी थी बदहाली, अब हाई-टेक इलाज—सोनहत अस्पताल ने लिखी नई इबारत
  • स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों का असर,सोनहत अस्पताल बना भरोसे का सबसे बड़ा केंद्र
  • प्राइवेट अस्पतालों को टक्कर देता सोनहत ष्ट॥ष्ट, सुविधाओं में दिखा बड़ा बदलाव
  • मोतियाबिंद ऑपरेशन से डिजिटल एक्स-रे तक—सोनहत में इलाज अब ‘वन स्टॉप’


-राजन पाण्डेय-
सोनहत (कोरिया), 17 मार्च 2026 (घटती-घटना)। कभी बदहाली,संसाधनों की कमी और अव्यवस्था के लिए चर्चा में रहने वाला सोनहत का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज एक नई पहचान, नई ऊर्जा और नई कार्यसंस्कृति के साथ उभरकर सामने आया है, यह बदलाव इतना व्यापक है कि अब यहां आने वाले मरीजों को यह विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि यह वही सरकारी अस्पताल है, जहां कभी इलाज से ज्यादा इंतजार और असुविधा मिलती थी। आज सोनहत अस्पताल न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस है,बल्कि यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के उस नए मॉडल का उदाहरण बन गया है,जहां इच्छाशक्ति, प्रशासनिक सख्ती और जमीनी मेहनत मिलकर चमत्कार कर सकती है,इस परिवर्तन के केंद्र में हैं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल,जिनके स्पष्ट निर्देश—सरकारी अस्पतालों को भरोसे का केंद्र बनाना है—ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया। उनके विजन को जमीन पर उतारने में सीएमएचओ डॉ. प्रशांत सिंह और बीएमओ डॉ. बलवंत सिंह की सतत निगरानी और मेहनत ने निर्णायक भूमिका निभाई है।
संवेदनशीलता का स्पर्शः बुजुर्गों के लिए अलग सुविधा
अस्पताल ने सिर्फ तकनीक ही नहीं,बल्कि मानवीय पहलू पर भी ध्यान दिया है, 60 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों के लिए एनसीडी विंडो, लंबी कतारों से राहत,बीपी,शुगर और अन्य जांचों की निःशुल्क सुविधा, साथ ही मितानिन हेल्पडेस्क मरीजों को हर कदम पर मार्गदर्शन देता है—कहां जाना है, किससे मिलना है,किस जांच की जरूरत है—सब कुछ आसान बना दिया गया है।
आंखों के इलाज में आत्मनिर्भरताः गांव में ही मिलेगा ‘नई रोशनी’
सोनहत अस्पताल ने अब आंखों के इलाज में भी बड़ी छलांग लगाई है, अत्याधुनिक जांच उपकरण पूरी तरह सुसज्जित आई ऑपरेशन थियेटर, अब क्षेत्र के बुजुर्गों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। यहां स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण सर्जरी उपलब्ध है—वह भी सरकारी अस्पताल में।
तकनीक का नया युगः डिजिटल एक्स-रे और सोनोग्राफी
अस्पताल में तकनीकी सुविधाओं का विस्तार इस बदलाव की रीढ़ है, डिजिटल एक्स-रे यूनिट की पुनः शुरुआत,रेडिएशन सुरक्षा के मानकों के अनुरूप अलग कक्ष,आधुनिक सोनोग्राफी सुविधा,यह सुविधा विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए राहत लेकर आई है,जिन्हें पहले जांच के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।
नवजात शिशुओं के लिए ‘जीवन की सुरक्षा कवच’
एनबीएसयू (Newborn Stabilization Unit) को अत्याधुनिक बनाया गया है,कम वजन और समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए विशेष देखभाल, जीवनरक्षक उपकरणों से लैस वार्ड,साथ ही प्रसव कक्ष को संक्रमण मुक्त और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है, जिससे सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ जच्चा-बच्चा का लक्ष्य साकार हो रहा है।
जनता की नजर में ‘हीरो’ कौन?
स्थानीय लोग इस बदलाव का श्रेय स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की इच्छाशक्ति,डॉ. प्रशांत सिंह के मार्गदर्शन और डॉ. बलवंत सिंह की जमीनी मेहनत को देते हैं।
सरकारी अस्पताल का बदला हुआ चेहरा
सोनहत का यह कायाकल्प सिर्फ एक अस्पताल की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच का परिणाम है जो कहती है सरकारी सिस्टम भी अगर चाहे,तो सबसे बेहतर बन सकता है,आज यह अस्पताल न केवल इलाज दे रहा है,बल्कि विश्वास,सम्मान और राहत भी दे रहा है,और यही किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी सफलता होती है।
स्वच्छता से सुकून तकः ‘ग्रीन हॉस्पिटल’ की नई पहचान
अब सोनहत अस्पताल सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि एक सकारात्मक वातावरण का प्रतीक बन गया है, चमचमाता परिसर, औषधीय और सजावटी पौधों से विकसित सुंदर गार्डन, स्वच्छ और आकर्षक ड्रेसिंग रूम, यहां अब दवाइयों की गंध से ज्यादा फूलों की खुशबू महसूस होती है—जो मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है।
‘कायाकल्प अभियान’ का असरः नियमों से बदली हकीकत
यह पूरा परिवर्तन शासन के ‘कायाकल्प अभियान’ का परिणाम है, जिसमें संक्रमण नियंत्रण के अंतरराष्ट्रीय मानक,वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन,दीवारों पर पेंटिंग और सूचना बोर्ड,रोजाना मॉनिटरिंग,बीएमओ डॉ. बलवंत सिंह स्वयं हर दिन निरीक्षण कर व्यवस्था को बनाए रखते हैं—यही इस सफलता का सबसे बड़ा राज है।
बदली तस्वीरः अस्पताल में कदम रखते ही दिखता है बदलाव
अब सोनहत अस्पताल में प्रवेश करते ही जो दृश्य सामने आता है, वह किसी निजी या कॉर्पोरेट अस्पताल से कम नहीं।
हाई-टेक ओपीडी काउंटर : मरीजों का कंप्यूटरीकृत पंजीकरण,बिना धक्का-मुक्की के सुव्यवस्थित प्रक्रिया
सुसज्जित इमरजेंसी वार्ड : गंभीर मरीजों को तत्काल प्राथमिक उपचार की पूरी व्यवस्था
डॉक्टरों के आधुनिक कक्ष : बेहतर कार्य वातावरण,जिससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार, पहले जहां मरीजों को भटकना पड़ता था,अब पूरी व्यवस्था सिस्टमेटिक और पेशेंट फ्रेंडली बन चुकी है।


Share

Check Also

प्रतापपुर,@आवास मिला…लेकिन अधूरा सूरजपुर में गरीबों के सपनों पर ‘किस्त’ का ताला

Share प्रतापपुर ब्लॉक सबसे ज्यादा प्रभावित…मजदूरी भी अटकी-आदिवासी परिवारों पर दोहरी मारप्रतापपुर, 23 अप्रैल 2026 …

Leave a Reply