-संवाददाता-
बैकुंठपुर/कोरिया,16 मार्च 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के गदबदी-फाटपानी के घने जंगल में लंबे समय से महुआ शराब बनाने और सप्लाई करने का धंधा चल रहा था,स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं थी,जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर महुआ शराब बनाई जाती थी और फिर जिले भर में इसकी सप्लाई होती थी,लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इस अवैध कारोबार पर कार्रवाई कोरिया जिले की पुलिस या स्थानीय आबकारी अमले ने नहीं,बल्कि सरगुजा संभाग के आबकारी उड़नदस्ता ने की,और वह भी ड्रोन कैमरे की मदद से,अब इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है,क्या जिले की पुलिस और आबकारी विभाग को इस अवैध कारोबार की जानकारी नहीं थी?
ड्रोन से खुला राज,अब हाईटेक बनाम पारंपरिक सिस्टम की चर्चा
इस कार्रवाई की एक खास बात यह भी रही कि ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल कर पहली बार जंगल में अवैध शराब निर्माण का खुलासा किया गया,अब चर्चा यह भी शुरू हो गई है कि क्या संभागीय उड़नदस्ता स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग से ज्यादा हाईटेक हो गया है? क्योंकि जिस जंगल में वर्षों से अवैध शराब बन रही थी, उसका खुलासा आखिर ड्रोन कैमरे ने कर दिया।
कार्रवाई सराहनीय,लेकिन सवाल भी जरूरी
गदबदी जंगल में हुई इस कार्रवाई ने एक तरफ जहां अवैध शराब के कारोबार का खुलासा किया है,वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, अब लोगों के बीच चर्चा यही है कि अगर ड्रोन कैमरा जंगल में छिपी भट्ठियों को ढूंढ सकता है,तो क्या स्थानीय सिस्टम को यह सब दिखाई नहीं देता था? कार्रवाई तो हो गई,लेकिन इस कार्रवाई ने जिले की जिम्मेदार एजेंसियों की सक्रियता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न भी लगा दिया है।
क्या पुलिस को भी अब ड्रोन टीम की जरूरत?
गदबदी जंगल में अवैध महुआ शराब के बड़े नेटवर्क का खुलासा जिस तरह आबकारी उड़नदस्ता ने ड्रोन कैमरे की मदद से किया,उसने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। आज लगभग हर जिले की पुलिस के पास साइबर सेल या साइबर टीम मौजूद है,जो तकनीक के माध्यम से अपराध की जानकारी जुटाने और जांच करने का काम करती है,लेकिन इस कार्रवाई ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या केवल साइबर टीम ही पर्याप्त है,या अब पुलिस को भी ड्रोन तकनीक से लैस विशेष टीम की जरूरत पड़ेगी? जंगल और दुर्गम क्षेत्रों में चल रहे अवैध कारोबार—जैसे शराब निर्माण, लकड़ी तस्करी या अन्य गतिविधियों—की निगरानी जमीन से करना मुश्किल होता है, ऐसे में ड्रोन कैमरा अपराधियों की गतिविधियों को पकड़ने में कारगर साबित हो सकता है, गदबदी जंगल की कार्रवाई ने यह दिखा दिया कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से छिपे हुए अवैध कारोबार का भी आसानी से पता लगाया जा सकता है,अब सवाल यह है कि क्या पुलिस विभाग भी भविष्य में साइबर टीम के साथ ड्रोन तकनीक को अपनाकर अपनी कार्रवाई को और हाईटेक बनाएगा, ताकि दूरदराज और जंगल क्षेत्रों में भी प्रभावी कार्रवाई संभव हो सके।
ड्रोन कैमरे से जंगल में छापेमारी
संभागीय आबकारी उड़नदस्ता सरगुजा की टीम ने 15 मार्च को हाईटेक तरीके से कार्रवाई करते हुए गदबदी जंगल में छापा मारा, सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने पहले ड्रोन कैमरे की मदद से जंगल में गतिविधियों की निगरानी की,सूत्रों के अनुसार यह इलाका इतना घना है कि जब भी कोई टीम एक दिशा से पहुंचती है तो आरोपी दूसरी दिशा से जंगल के रास्ते भाग जाते हैं,इसी वजह से इस बार ड्रोन कैमरे से पहले पूरे इलाके की लोकेशन और गतिविधियों की निगरानी की गई, उसके बाद टीम ने चारों तरफ से घेराबंदी कर कार्रवाई की।
दो आरोपी गिरफ्तार,भारी मात्रा में महुआ शराब और लाहन जब्त
कार्रवाई के दौरान आबकारी टीम ने कोरिया जिले के कथित मुख्य सप्लायर नीलकमल सिंह उर्फ नीलू सिंह और उसके साथी संतोष बरगाह को गिरफ्तार किया,दोनों आरोपी फाटपानी गदबदी क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं और अपने घर के नीचे जंगल के नाले के पास बड़े पैमाने पर महुआ शराब बनाकर सप्लाई करते थे,छापेमारी में 55 लीटर महुआ शराब, 3500 किलोग्राम महुआ लाहन,तथा 25 लीटर तैयार महुआ शराब जब्त की गई, दोनों आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1),34(2) और 59(क) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय बैकुंठपुर में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
स्थानीय लोगों की सूचना,बाहर की टीम की कार्रवाई
सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने बताया कि लंबे समय से कोरिया जिले के लोगों द्वारा उन्हें फोन पर सूचना दी जा रही थी कि गदबदी जंगल में बड़े पैमाने पर महुआ शराब बनाकर पूरे जिले में सप्लाई की जा रही है, उन्होंने बताया कि जंगल क्षेत्र में कार्रवाई करना काफी मुश्किल होता है क्योंकि आरोपी पहले ही भाग जाते हैं,इसलिए इस बार पूरी योजना बनाकर ड्रोन कैमरे की मदद से कार्रवाई की गई।
सबसे बड़ा सवालः जिले की जिम्मेदार एजेंसियां कहां थीं?
कार्रवाई भले ही सराहनीय हो,लेकिन इसके साथ ही कई सवाल भी खड़े हो गए हैं,क्योंकि जिस अवैध शराब कारोबार की जानकारी संभागीय उड़नदस्ता को मिल सकती है,उसकी जानकारी जिले के पुलिस और आबकारी अमले को क्यों नहीं मिली? स्थानीय लोगों का कहना है कि गदबदी जंगल में यह धंधा लंबे समय से चल रहा था,ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी? या जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई?
कार्यवाही में इनकी रही भूमिका
इस कार्रवाई में सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता,आबकारी उपनिरीक्षक टी.आर. केहरी,मुख्य आरक्षक कुमारू राम,रमेश दुबे,अशोक सोनी,नगर सैनिक गणेश पांडेय,रणविजय सिंह,ओमप्रकाश गुप्ता,महिला सैनिक राजकुमारी सिंह और चंद्रावती की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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