संवादाता
जनकपुर (एमसीबी),16 मार्च 2026 (घटती-घटना)। एमसीबी जिले के जनकपुर वन परिक्षेत्र स्थित काष्ठागार (डिपो) में लकड़ी परिवहन के दौरान एक बड़ी अनियमितता सामने आई है,ट्रांजिट पास में दर्ज लकड़ी की संख्या और ट्रक में वास्तविक रूप से लोड लकड़ी के बीच भारी अंतर मिलने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार डिपो से लकड़ी लेकर निकल रहे एक ट्रक को लेकर स्थानीय स्तर पर संदेह व्यक्त किया गया था, दस्तावेजों के अनुसार ट्रक में 150 नग लकड़ी दर्ज थी, लेकिन जब विरोध के बाद ट्रक को रोककर भौतिक सत्यापन किया गया तो उसमें से 208 नग लकड़ी बरामद हुई। यानी निर्धारित संख्या से 58 नग लकड़ी अतिरिक्त पाई गई,यह अंतर सामने आने के बाद मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
सजग कर्मचारियों ने रोका ट्रक- बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले का खुलासा डिपो के कुछ कर्मचारियों की सजगता से संभव हो सका। ट्रक में लोड लकड़ी की संख्या को लेकर संदेह होने पर कर्मचारियों ने ट्रक को बाहर जाने से रोक दिया, स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों ने काष्ठागार के गेट पर ताला लगाकर ट्रक को रोक दिया और इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इसके बाद ट्रक को खाली कराकर लकडि़यों की गिनती कराई गई,जब लकडि़यों की गिनती की गई तो दस्तावेजों और वास्तविक संख्या में भारी अंतर सामने आया।
दस्तावेजों में छेड़छाड़ की चर्चा- मामला उजागर होने के बाद यह भी चर्चा सामने आई कि विसंगति सामने आने के बाद सरकारी ट्रांजिट पास में सुधार या छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई,ताकि अंतर को छिपाया जा सके। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस पहलू की भी जांच की जानी चाहिए,यदि दस्तावेजों में छेड़छाड़ की बात सही साबित होती है तो यह मामला केवल लकड़ी की हेराफेरी का नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में हस्तक्षेप का भी गंभीर मामला बन सकता है।
अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल- शुरुआती स्तर पर कुछ अधिकारियों द्वारा यह दावा किया गया था कि लकड़ी परिवहन में सब कुछ नियमों के अनुसार है, लेकिन जब मीडिया और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में लकडि़यों की गिनती हुई तो वास्तविकता सामने आ गई,सूत्रों के अनुसार संबंधित ठेकेदार ने भी ट्रक में अधिक लकड़ी होने की बात स्वीकार की है। इससे यह आशंका और गहरा गई है कि मामला केवल एक साधारण त्रुटि का नहीं बल्कि किसी बड़े खेल का हिस्सा हो सकता है।
प्रशासनिक चुप्पी से बढ़े संदेह- इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बावजूद अब तक संबंधित लोगों पर किसी बड़ी कार्रवाई की सूचना सामने नहीं आई है, इससे स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी टीपी में दर्ज संख्या और वास्तविक लकड़ी की संख्या में इतना बड़ा अंतर कैसे हो गया।
उठ रहे कई सवाल- इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, ट्रांजिट पास में दर्ज लकड़ी की संख्या और वास्तविक लोड में इतना अंतर कैसे आया? क्या यह केवल मानवीय भूल है या इसके पीछे कोई संगठित तंत्र काम कर रहा है? दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ की कोशिश किसके निर्देश पर हुई? मामले को उजागर करने वाले कर्मचारियों पर दबाव क्यों बनाए जाने की चर्चा हो रही है?
निष्पक्ष जांच की मांग- जनकपुर काष्ठागार का यह मामला केवल 58 नग लकड़ी की अतिरिक्त बरामदगी का नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके, फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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