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अंबिकापुर/बलरामपुर@गौधाम योजना को लेकर भाजपा सरकार पर कांग्रेस का हमला

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  • वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुनील सिंह बोले…गोठान योजना को नया नाम देकर किया जा रहा प्रचार
  • मंच पर तालियां और जमीन पर समस्या-किसानों और गौवंश की स्थिति पर उठाए सवाल

अंबिकापुर/बलरामपुर,15 मार्च 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शुरू की जा रही तथाकथित ‘गौधाम योजना’ को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, कांग्रेस ने इस योजना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है,वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुनील सिंह ने आरोप लगाया है कि सरकार जिस योजना को बड़े शोर-शराबे के साथ नई पहल बताकर प्रस्तुत कर रही है, वह वास्तव में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की गोठान योजना का ही बदला हुआ स्वरूप है, उन्होंने कहा कि केवल नाम बदलकर, नए बोर्ड लगाकर और बड़े स्तर पर प्रचार कर किसी योजना को नई नहीं बनाया जा सकता, अगर सरकार वास्तव में गौ सेवा के लिए गंभीर है तो उसे जमीनी स्तर पर व्यवस्था सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
वर्चुअल कार्यक्रम से होगा शुभारंभ
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस योजना का वर्चुअल शुभारंभ किया जा रहा है,मुख्यमंत्री विष्णु देव साय,मंत्री राम विचार नेताम तथा छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के प्रांत अध्यक्ष विशेश्वर पटेल की उपस्थिति में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय,कोनी बिलासपुर से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, इसी क्रम में बलरामपुर जिले के ग्राम देवीगंज, विकासखंड रामचंद्रपुर में ‘सुरभि गौधाम’ का भी वर्चुअल उद्घाटन किया जाना प्रस्तावित है, इस कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की उपस्थिति तय की गई है, जिनमें प्रमुख रूप से,जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हीरामुनि निकुंज,गौ सेवा आयोग के जिला अध्यक्ष आशीष केसरी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव,भाजपा जिला महामंत्री भानु दीक्षित सहित कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल होंगे।
कांग्रेस का आरोप
नई योजना नहीं, पुरानी का नया नाम वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुनील सिंह ने कहा कि जिस गोठान योजना को भाजपा ने पूर्व में लगातार राजनीतिक रूप से निशाना बनाया था, आज उसी योजना के ढांचे को नया नाम देकर फिर से प्रस्तुत किया जा रहा है,उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि जिस योजना को वर्षों तक ‘असफल’ बताकर आलोचना की गई,उसी के मॉडल को अब ‘महत्वाकांक्षी योजना’ बताकर प्रचारित किया जा रहा है, उन्होंने सवाल उठाया अगर गोठान योजना इतनी खराब थी तो उसी मॉडल को फिर क्यों अपनाया जा रहा है? और अगर वह योजना अच्छी थी तो उसे पहले राजनीतिक रूप से बदनाम क्यों किया गया?
गौ सेवा या राजनीतिक प्रचार?
सुनील सिंह ने कहा कि गायों के नाम पर राजनीति करना आसान है, लेकिन गौवंश के संरक्षण और किसानों को राहत देने के लिए ठोस व्यवस्था बनाना ज्यादा जरूरी है, उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में कई जगह गौ सेवा से ज्यादा गौ प्रचार दिखाई दे रहा है, उनका कहना था कि केवल कार्यक्रमों और उद्घाटनों से गौ सेवा संभव नहीं है। इसके लिए स्थायी व्यवस्था,पर्याप्त संसाधन और प्रभावी निगरानी जरूरी है।
सरकार से की पारदर्शिता और सुधार की मांग
सुनील सिंह ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गौ सेवा के लिए गंभीर है तो उसे योजनाओं का नाम बदलने के बजाय उनकी कार्यप्रणाली को सुधारने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए, उन्होंने कहा कि गौवंश की सुरक्षा, किसानों की समस्याओं का समाधान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना ही किसी भी ऐसी योजना की वास्तविक सफलता होगी।
जनता पूछ रही है बड़ा सवाल
उन्होंने कहा कि आज जनता यह सवाल पूछ रही है, क्या गौ सेवा केवल नए नाम, नए बोर्ड और नए कार्यक्रमों से हो जाएगी? या फिर वास्तव में ऐसी व्यवस्था बनेगी जिससे गौवंश सुरक्षित रहे, किसानों को राहत मिले और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो?
जमीनी स्थिति पर उठाए गंभीर सवाल
सुनील सिंह ने कहा कि राज्य के कई गांवों में गोठानों की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है,उन्होंने आरोप लगाया कि जहां पहले गोठानों में पशु,चारा और गतिविधियां दिखाई देती थीं, वहां अब कई स्थानों पर केवल टूटे शेड,बंद दरवाजे और औपचारिक व्यवस्थाएं ही बची हैं, उन्होंने कहा कि कई जगह गोठान केवल फोटो खिंचवाने और सरकारी कागजों में दर्ज रहने तक सीमित हो गए हैं।
आवारा पशुओं से किसान परेशान
उन्होंने कहा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या गंभीर बनी हुई है,कई किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए रात-रात भर खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं। फसल नुकसान की समस्या बढ़ती जा रही है,लेकिन इस दिशा में कोई ठोस समाधान दिखाई नहीं देता, उनका कहना था कि गौ सेवा के नाम पर बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं,लेकिन वास्तविक समस्या का समाधान अभी भी अधूरा है।
मंच पर तालियां,जमीन पर समस्या
कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति ऐसी बन गई है कि मंच पर तालियां ज्यादा सुनाई देती हैं और जमीन पर समस्याएं ज्यादा दिखाई देती हैं, उन्होंने कहा कि योजनाओं के नाम बदलने और बड़े स्तर पर प्रचार करने से समस्या का समाधान नहीं होता, जब तक जमीनी स्तर पर मजबूत व्यवस्था नहीं बनाई जाएगी, तब तक ऐसी योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा।
अंत में…
कांग्रेस नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में गौवंश और किसान दोनों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है,सरकार को चाहिए कि वह योजनाओं के प्रचार के बजाय उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान दे,ताकि गांवों में वास्तविक परिवर्तन दिखाई दे, अन्यथा जनता के बीच यह धारणा मजबूत होती जाएगी कि यह पूरा प्रयास गौ सेवा से ज्यादा राजनीतिक पुनःपैकेजिंग है।


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