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सूरजपुर@सूरजपुर में शाम ढलते ही सजता जुए का दरबार? जंगल और सीमावर्ती इलाकों में बड़े जुआ खेल की चर्चा

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  • सूरजपुर में जुए का बड़ा नेटवर्क? साइबर शाखा और थाना पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
  • जंगल में ‘कैसीनो’, सिस्टम मौन ! सूरजपुर में शाम 4 से 8 बजे तक जुए का महाखेल
  • जुआ चलता रहा, कानून सोता रहा ! कुमेली जंगल बना सूरजपुर का नया ‘कसीनो’
  • सूरजपुर का ‘जंगल कैसीनो’: शाम 4 से रात 8 तक जुए का मेला, सिस्टम की आंखों पर पट्टी?
  • कुमेली के जंगल और माजा गांव के आसपास सजती है कथित ‘बुक’,लाखों के दांव–हार-जीत की चर्चा, साइबर और थाना पुलिस की भूमिका पर उठ रहे तीखे सवाल
  • शमशेर और एस कुमार के नाम चर्चा में, जंगल और सीमावर्ती इलाकों में चलने की बात — संरक्षण के आरोपों से पुलिसिंग पर घिरा सवाल
  • चार घंटे का जुआ शिफ्ट सिस्टम! शाम ढले लगती बुक,लाखों के दांव
  • जंगल में जुआ, शहर में खामोशी! संरक्षण की चर्चा से पुलिसिंग पर सवाल
  • कुमेली जंगल में ‘जुआ दरबार’! हार-जीत लाखों में,कार्रवाई शून्य
  • जुए का नेटवर्क या सिस्टम की सेटिंग? सूरजपुर में रोज सजता ‘शाम का खेल’
  • जंगल में बिछती ताश, शहर में बिछती चुप्पी! सूरजपुर का जुआ मॉडल चर्चा में
  • बुक खुलते ही लाखों का खेल! सूरजपुर में जुए के नेटवर्क पर उठे बड़े सवाल

-शमरोज खान-
सूरजपुर,13 मार्च 2026 (घटती-घटना)। सूरजपुर जिले में अवैध जुए के कथित बड़े नेटवर्क को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है, स्थानीय लोगों और मुखविरों के मुताबिक जिले में जुए का खेल कोई नई कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी पुरानी परंपरा बनती जा रही है जिसे रोकने की कोशिशें हर बार कागजों में ही दम तोड़ देती हैं, फर्क बस इतना है कि अब यह खेल शहर की गलियों से निकलकर जंगलों और सीमावर्ती इलाकों की प्राकृतिक गोपनीयता में पहुंच गया है।
चर्चा है कि कुमेली के जंगल और सूरजपुर–कोरिया सीमा के पास बसे माजा गांव के आसपास इन दिनों शाम होते ही कथित तौर पर जुए का मिनी महाकुंभ लगने लगता है,यहां चार घंटे तक ऐसा खेल चलता है,जिसमें लाखों रुपये के दांव लगने की बातें कही जा रही हैं, सबसे दिलचस्प बात यह बताई जा रही है कि यह खेल कथित तौर पर शाम 4 बजे से शुरू होकर रात लगभग 8 बजे तक चलता है,यानी सूरज ढलने से पहले ही जुए का बाजार सज जाता है और रात होने से पहले समेट भी लिया जाता है, मानो सब कुछ सिस्टम की सुविधा के हिसाब से तय किया गया हो।
अब देखना होगा….
सूरजपुर जिले में कथित जुए के इस नेटवर्क को लेकर उठे सवालों ने पुलिस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है, अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं,क्या जंगल में लगने वाला यह जुआ दरबार बंद होगा, या फिर शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक यह खेल यूं ही चलता रहेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
कथित बंटवारे में कुछ पुलिसकर्मियों के नाम भी चर्चा में
सूत्रों के अनुसार इस कथित जुए के खेल में रोजाना लगभग 70 हजार रुपये अलग से निकाले जाने की चर्चा है,बताया जा रहा है कि इस रकम का एक हिस्सा अलग-अलग स्तरों पर बांटा जाता है, चर्चा यह भी है कि इसमें से करीब 30 हजार रुपये विभिन्न स्तरों पर खर्च होने की बातें कही जा रही हैं,मुखविरों के अनुसार कथित तौर पर कुछ नामों को पांच-पांच हजार रुपये और कुछ हिस्सा थाना स्तर तक पहुंचने की बातें भी सामने आ रही हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है,मुखविरों के अनुसार इस पूरे कथित जुए के खेल में प्रतिदिन लगभग 70 हजार रुपये अलग से निकाले जाने की चर्चा है, बताया जा रहा है कि इस रकम का एक हिस्सा विभिन्न स्तरों पर खर्च होने की बात कही जा रही है, सूत्रों का दावा है कि इस कथित बंटवारे में कुछ पुलिसकर्मियों के नाम भी चर्चा में आ रहे हैं,बताया जाता है कि कथित रूप से विकास और महेंद्र नाम के दो पुलिसकर्मियों को लगभग 2500-2500 सौ रुपये मिलने की बात कही जा रही है,जबकि करीब 25 हजार रुपये रामानुजनगर थाना स्तर तक पहुंचने की चर्चा है,बाकि उदय और प्रभारी राजेश यादव के हिस्से में जाता है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है,लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है,स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन दावों में सच्चाई है तो यह केवल जुए का मामला नहीं बल्कि पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल बन सकता है।
जंगल में जुआ, शहर में सन्नाटा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जुए के कई ठिकाने शहर के आसपास सक्रिय रहते थे,समय-समय पर पुलिस कार्रवाई भी होती थी और खबरें भी सुर्खियां बनती थीं,लेकिन जैसे-जैसे निगरानी बढ़ी,वैसे-वैसे जुए के संचालकों ने भी अपनी रणनीति बदल ली, अब कथित तौर पर खेल शहर से दूर जंगलों और सीमावर्ती गांवों में पहुंच गया है,जंगल का फायदा यह कि वहां न तो ज्यादा आवाजाही होती है और न ही कोई आसानी से पहुंच पाता है,कुछ लोग व्यंग्य में कहते हैं कि शायद जुए के संचालकों ने वन्य पर्यटन की तर्ज पर नया मॉडल बना लिया है, जहां खिलाड़ी शहर से निकलकर जंगल पहुंचते हैं,खेल खेलते हैं और वापस लौट आते हैं,यह भी चर्चा है कि इन ठिकानों को चुनने के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि जंगल और सीमावर्ती इलाकों में पुलिस की नियमित गश्त कम रहती है।
शाम 4 से रात 8…चार घंटे का ‘जुआ महोत्सव’
मुखविरों के अनुसार इस कथित जुए का समय भी बेहद अनुशासित है, खेल रोजाना लगभग एक ही समय पर शुरू होता है और तय समय पर खत्म भी हो जाता है, बताया जा रहा है कि शाम 4 बजे के आसपास खिलाड़ी जुटने लगते हैं,उसके बाद बुक खुलती है और खेल शुरू होता है, धीरे-धीरे दांव बढ़ते जाते हैं और कई बार लाखों रुपये की हार-जीत सामने आती है, रात करीब 8 बजे तक पूरा खेल समेट लिया जाता है, कुछ लोग इसे मजाक में चार घंटे का जुआ शिफ्ट सिस्टम भी कह रहे हैं।
‘बुक’ में दर्ज होता है लाखों का हिसाब
सूत्रों का कहना है कि यहां केवल मौके पर बैठकर ताश खेलने तक ही मामला सीमित नहीं है,इसके साथ-साथ बुक भी लगती है, जिसमें हार-जीत का पूरा हिसाब दर्ज किया जाता है, बताया जा रहा है कि कई लोग सीधे मौके पर मौजूद रहते हैं,जबकि कुछ लोग बुक के माध्यम से दांव लगाते हैं, यही वजह है कि यहां कभी-कभी लाखों रुपये की हार-जीत की चर्चा सामने आती है,जुए के इस कथित नेटवर्क में आर्थिक लेन-देन का तरीका भी बेहद व्यवस्थित बताया जा रहा है,मानो कोई छोटा-मोटा कारोबार चल रहा हो।
कुछ नाम बार-बार चर्चा में…
स्थानीय चर्चाओं में इस पूरे कथित नेटवर्क से जुड़े कुछ नाम लगातार सामने आ रहे हैं, मुखविरों के अनुसार जुए के इस संचालन में शमशेर, एस कुमार,बबलू,विवेक,राजकुमार और संजू जैसे नामों की चर्चा होती रहती है, बताया जाता है कि इन लोगों के बीच जिम्मेदारियां भी बंटी हुई हैं,कोई खिलाडि़यों को जोड़ने का काम करता है, कोई बुक संभालता है और कोई पूरे संचालन की निगरानी करता है,हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है,लेकिन लगातार सामने आ रही चर्चाओं ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
रामानुजनगर थाना और साइबर शाखा पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल रामानुजनगर थाना क्षेत्र और जिले की साइबर शाखा को लेकर उठ रहे हैं, लोगों का कहना है कि यदि रोजाना चार घंटे तक इतने बड़े स्तर पर जुए का खेल चलता है तो इसकी जानकारी पुलिस को क्यों नहीं है,वहीं साइबर शाखा को लेकर भी व्यंग्य भरी चर्चाएं हो रही हैं,लोगों का कहना है कि साइबर सेल को तो अपराधों पर नजर रखने के लिए बनाया गया है,लेकिन यहां तो स्थिति उलटी दिखाई दे रही है,कुछ लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि साइबर अपराध पकड़ने की जगह शायद साइबर अब जुए के नेटवर्क की निगरानी कर रहा है।
एस कुमार की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं
सूत्रों के अनुसार इस नेटवर्क में एस कुमार की भूमिका को लेकर भी कई तरह की बातें कही जा रही हैं, कुछ लोग कहते हैं कि यदि उन्हें अलग कर दिया जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं, यही कारण है कि नेटवर्क के भीतर उन्हें साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाई जाती है, हालांकि यह सब चर्चाओं का हिस्सा है, लेकिन इन चर्चाओं ने पूरे मामले को और ज्यादा रहस्यमय बना दिया है।
बड़े अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल
लगातार उठ रहे इन सवालों के बीच जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बन गई है, स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इतने बड़े स्तर पर जुए के नेटवर्क की चर्चा हो रही है और खबरें भी सामने आ रही हैं, तो प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, कुछ लोग व्यंग्य में कहते हैं कि शायद जुए का यह नेटवर्क इतना अनुशासित है कि वह किसी को परेशान नहीं करता — इसलिए कार्रवाई की जरूरत ही नहीं समझी जा रही।
सिस्टम पर उठता बड़ा सवाल
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जंगलों और सीमावर्ती इलाकों में रोजाना जुए का इतना बड़ा खेल चल रहा है,तो आखिर इसे रोकने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है? या जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही? या फिर यह सब सिर्फ अफवाहें हैं? इन सवालों के जवाब अभी तक साफ नहीं हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है, उनका कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो इसमें शामिल लोगों के साथ-साथ संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए, लोगों का कहना है कि अवैध जुआ केवल कानून का उल्लंघन नहीं है,बल्कि इससे अपराध और सामाजिक समस्याएं भी बढ़ती हैं।


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