- जमीन,धान और बैंकिंग का जालः शिवप्रसादनगर समिति से जुड़ा बड़ा खुलासा
- जेल में पिता,फरार बेटा…और 4728 क्विंटल धान बिक्री का रहस्य
- शिवप्रसादनगर में फर्जी पंजीयन कांडः 23 किसानों के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी?
- ठगी से जमीन तक और धान खरीदी तकः सूरजपुर में सिस्टम पर गंभीर सवाल
- 7.7 एकड़ जमीन बदली,88 हेक्टेयर पंजीयन दिखा-धान खरीदी में बड़ा खेल?
- सूरजपुर धान खरीदी घोटालाः फर्जी रकबा,बैंक ऋण और संदिग्ध रजिस्ट्री का संगम
- महाठगी का महाजालः जमीन ट्रांसफर और धान खरीदी में कथित मिलीभगत उजागर
- शिवप्रसादनगर धान खरीदी और जमीन हस्तांतरण प्रकरणः नामजद आरोपों से घिरा बहुस्तरीय मामला
- जरीफुल्ला-अशफाक उल्ला प्रकरण, 7.7 एकड़ जमीन ट्रांसफर और 23 किसानों के नाम पर फर्जी रकबा जोड़कर 4728.80 क्विंटल धान बिक्री का आरोप
- महाठगी का महाजालः फाइलें चल रही हैं या सच दब रहा है?
- जमीन गई,धान बिका,बैंक चुप…पर जांच अब तक क्यों नहीं?
-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,25 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। यह कहानी केवल ठगी की नहीं है,यह कहानी उस ‘सिस्टम’ की है जो कागज़ पर बेहद सतर्क, नियमों में बेहद सख्त और आम आदमी के मामले में बेहद सक्रिय दिखता है—लेकिन जब मामला करोड़ों की जमीन,बैंक ऋण और धान खरीदी से जुड़ जाए,तो वही सिस्टम रहस्यमय तरीके से मौन हो जाता है,करोड़ों की ठगी के आरोपी अशफाक उल्ला,उनके पिता जरीफुल्ला,7.7 एकड़ कृषि भूमि का हस्तांतरण,तीन बैंकों का ऋण,और 23 किसानों के नाम पर 67.33 हेक्टेयर फर्जी रकबा जोड़कर 4728.80 क्विंटल धान बिक्री—इतने सारे तथ्य सामने आने के बाद भी सवाल वही है, जांच अब तक क्यों नहीं? जरीफुल्ला-अशफाक उल्ला प्रकरण और शिवप्रसादनगर धान खरीदी विवाद अब एक व्यापक जांच का विषय बन चुका है, यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह मामला केवल समिति स्तर की गड़बड़ी नहीं, बल्कि राजस्व, बैंकिंग और कृषि विपणन प्रणाली से जुड़े गंभीर अनियमितताओं का संकेत हो सकता है, अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है—क्या प्रशासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएगा, या मामला दस्तावेजों तक सीमित रह जाएगा?
जमीन गायब, पर प्रशासन को खबर नहीं?
ग्राम सोनपुर,तहसील भैयाथान की 3.13 हेक्टेयर (करीब 7.7 एकड़) जमीन जरीफुल्ला के नाम से हटकर हदीस मोहम्मद, रिजवान अंसारी और साधना कुशवाहा के नाम दर्ज हो गई, समय भी कम दिलचस्प नहीं—जमानत के बाद जमीन का हस्तांतरण, आज स्थिति यह है—पिता जेल में,बेटा फरार,जमीन नए नाम पर, सवालः क्या यह महज संयोग है? या संपत्ति ‘सुरक्षित’ करने की रणनीति? अगर सब कुछ नियम अनुसार हुआ, तो प्रशासन सामने आकर स्पष्ट क्यों नहीं करता?
व्यंग्य की कड़वी सच्चाई
सूरजपुर में लगता है खेती से ज्यादा कागज उपज रहे हैं,यहां जमीन बदलती है,रकबा बढ़ता है,धान बिकता है—और सिस्टम शांत रहता है,आम आदमी की फाइल महीनों घूमती है,लेकिन करोड़ों की जमीन और हजारों क्विंटल धान के मामले में सन्नाटा,यह सन्नाटा ही सबसे बड़ा सवाल है।
पीडि़त कहां जाए?
सबसे दुःखद पहलू यह है कि जिन लोगों के पैसे ठगे गए,वे अब भी इंतजार में हैं,जमीन बिक गई,आरोपी फरार है,पिता जेल में है, धान बिक गया,पैसा किसे मिला—स्पष्ट नहीं और प्रशासन? शायद फाइल का इंतजार कर रहा है।
जांच होगी या इंतजार?
यह मामला जांच योग्य है या नहीं—
यह तय करना प्रशासन का काम है,लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह कहना कठिन है कि यह ‘साधारण’ प्रकरण है,जब तक जमीन की बिक्री प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती,बैंक ऋण स्थिति सार्वजनिक नहीं होती,धान खरीदी का सत्यापन नहीं होता,तब तक यह मामला महाठगी के साथ-साथ प्रशासनिक निष्कि्रयता की कहानी भी बना रहेगा,और सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—क्या जांच होगी,या फाइलें ही न्याय का इंतजार करती रहेंगी?
प्रशासनिक जांच क्यों जरूरी?
यह मामला केवल ठगी का नहीं,बल्कि राजस्व विभाग,उप-पंजीयक कार्यालय,बैंकिंग प्रणाली,धान खरीदी केंद्र,सहकारी समिति सभी से जुड़ा है, इतने स्तरों पर विसंगति की आशंका हो और जांच न हो—यह सामान्य स्थिति नहीं मानी जा सकती।
फसल बीमा और ऋण वितरण में भी आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि कथित रूप से फर्जी तरीके से निकाली गई, दो करोड़ रुपये से अधिक का पशुपालन ऋण किसानों के नाम पर वितरित किया गया,20 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है, पूर्व में थाना झिलमिली (भैयाथान) में धारा 420, 409, 34 भादवि के तहत मामला दर्ज हुआ था,आरोपी को जेल भेजा गया। जमानत पाने के लिए 62,61,930 जमा किए गए।
धान खरीदी का चमत्कार
अगस्त में फसल बोई गई, नवंबर में जमीन बिकी,और धान नए मालिकों के नाम पर खरीदा गया, Farmer Porta में ‘हाँ (DCS द्वारा प्राप्त)’ दर्ज है,205 क्विंटल धान शिवप्रसादनगर केंद्र में स्वीकृत, नियम कहता है—जिसने बोया वही बेचेगा, लेकिन यहां नियम शायद ‘अपडेट’ हो गया,आम किसान की फसल एक अक्षर की त्रुटि पर रिजेक्ट हो जाती है,यहां जमीन बदली, मालिक बदला,लेकिन धान खरीदी में कोई अड़चन नहीं,क्या यह दक्षता है या चयनात्मक सक्रियता?
क्या शिकायत नहीं हुई?
सूत्र बताते हैं कि शिकायतें की गईं। दस्तावेज सामने आए,तो क्याः शिकायत अधूरी थी? दस्तावेज अपूर्ण थे? या फाइल किसी अलमारी में आराम कर रही है? प्रशासन अक्सर कहता है— ‘जांच जारी है।’ लेकिन यहां सवाल है—क्या जांच शुरू भी हुई?
क्या यह ‘जांच से परे’ मामला है?
अगर सब कुछ नियम के तहत हुआ है, तो प्रशासन को डर किस बात का? जांच बैठाइए,रिपोर्ट सार्वजनिक कीजिए, सच्चाई सामने लाइए, लेकिन जब जांच ही नहीं होती,तो संदेह गहराता है,क्या प्रभावशाली नाम शामिल हैं? क्या दबाव है? क्या सिस्टम अपने ही सिस्टम की जांच से हिचक रहा है?
भाग 1ः जरीफुल्ला-अशफाक उल्ला प्रकरण और 7.7 एकड़ जमीन का हस्तांतरण
ग्राम सोनपुर,तहसील भैयाथान,जिला सूरजपुर में दर्ज लगभग 3.13 हेक्टेयर (करीब 7.7 एकड़) कृषि भूमि,जो पूर्व में जरीफुल्ला (पिता – ठगी आरोपी अशफाक उल्ला) के नाम दर्ज थी,अब राजस्व रिकॉर्ड में निम्न नामों पर दर्ज बताई जा रही हैः हदीस मोहम्मद,रिजवान अंसारी, साधना कुशवाहा, अशफाक उल्ला पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले दर्ज बताए गए हैं, जरीफुल्ला सह-आरोपी रहे हैं,जमानत मिलने के बाद नवंबर 2025 में पूरी जमीन का हस्तांतरण हुआ, वर्तमान में पिता जेल में, बेटा फरार बताया जा रहा है।
दोनों मामलों के बीच संभावित कड़ी?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि जमीन हस्तांतरण, बैंक ऋण, धान खरीदी में फर्जी रकबा, फसल बीमा आहरण ये सभी घटनाएं अलग-अलग नहीं बल्कि आपस में जुड़ी हो सकती हैं, यदि यह सिद्ध होता है कि फर्जी रकबा जोड़कर सरकारी राशि निकाली गई और संपत्ति हस्तांतरण संभावित कुर्की से बचने के लिए किया गया, तो मामला बहुस्तरीय आर्थिक अपराध का रूप ले सकता है।
बैंक ऋण का मुद्दा
सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि पर,HDFC बैंक,जिला सहकारी केंद्रीय बैंक,छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक का ऋण दर्ज था,प्रश्न यह उठता है कि यदि ऋण लंबित था तो बिना एनओसी और बंधक हटाए रजिस्ट्री किस आधार पर हुई?
शिवप्रसादनगर समिति में फर्जी पंजीयन कर धान बिक्री का आरोप
ओड़गी ब्लॉक अंतर्गत शिवप्रसादनगर समिति में वर्ष 2024-25 के दौरान 23 किसानों के नाम पर वास्तविक रकबे से अधिक भूमि जोड़कर धान विक्रय दिखाए जाने की शिकायत सामने आई है।

तालिका के अनुसार कुल स्थिति
कुल वास्तविक रकबाः 20.94 हेक्टेयर
दर्ज फर्जी रकबाः 67.33 हेक्टेयर
कुल पंजीयन रकबाः 88.27 हेक्टेयर
कुल धान बिक्रीः 4728.80 क्विंटल
आरोप है कि समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी प्रभारी ने कथित रूप से बैंक से जुड़े व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर अतिरिक्त रकबा जोड़कर धान बिक्री दर्शाई।
जांच की मांग,स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं की मांग है कि…जरीफुल्ला की जमीन हस्तांतरण प्रक्रिया की जांच हो।
बैंक एनओसी की स्थिति स्पष्ट की जाए।
23 किसानों के रकबे का भौतिक सत्यापन हो।
धान खरीदी केंद्र के अधिकारियों की भूमिका जांची जाए।
आर्थिक अपराध शाखा से स्वतंत्र जांच कराई जाए।
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