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सूरजपुर@ रेबीज मुक्त सूरजपुर की ओर बड़ा कदम, श्वानों के स्टरलाइजेशन व टीकाकरण का विशेष अभियान प्रारंभ

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-संवाददाता-
सूरजपुर,23 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। जिले में जनस्वास्थ्य और पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए पशुधन विकास विभाग सूरजपुर द्वारा पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत श्वानों के स्टरलाइजेशन (नसबंदी) एवं रेबीज टीकाकरण का व्यापक अभियान प्रारंभ किया गया है, यह कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया द्वारा वर्ष 2025 में सू-मोटो रिट-पिटीशन में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में संचालित किया जा रहा है, विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह अभियान चरणबद्ध तरीके से पूरे जिले में चलाया जाएगा, जिसमें शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों को भी शामिल किया गया है।
नागरिकों से अपील
पशुधन विकास विभाग ने आम नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है, अपने पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण कराएं, नसबंदी अभियान में सहयोग दें, अभियान टीम को कार्य करने में बाधा न पहुंचाएं, बच्चों को आवारा श्वानों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के प्रति जागरूक करें, विभाग का कहना है कि प्रशासनिक प्रयास तभी सफल होंगे जब समाज भी सक्रिय भागीदारी निभाएगा।
जनस्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान नियमित और प्रभावी रूप से संचालित होता रहा, तो आने वाले वर्षों में सूरजपुर जिले को रेबीज मुक्त क्षेत्र बनाया जा सकता है, यह पहल न केवल मानव जीवन की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पशु कल्याण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में भी एक सराहनीय कदम है।
अभियान की आवश्यकता क्यों?
पिछले कुछ वर्षों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा श्वानों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, इससे श्वान काटने की घटनाओं में वृद्धि, रेबीज संक्रमण का खतरा, सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षा की भावना जैसी समस्याएँ सामने आ रही थीं। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रशासन ने वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से समस्या के समाधान का निर्णय लिया है, स्टरलाइजेशन (नसबंदी) के माध्यम से श्वानों की संख्या नियंत्रित होगी, वहीं रेबीज टीकाकरण से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
रेबीजः एक जानलेवा बीमारी
विशेषज्ञों के अनुसार रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो मनुष्य और पशुओं के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है, एक बार इसके लक्षण प्रकट हो जाने पर उपचार लगभग असंभव हो जाता है, इसलिए रोकथाम ही इसका एकमात्र प्रभावी उपाय है।
यदि किसी को पशु काट ले तो क्या करें?
पशुधन विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निम्न सावधानियां बताई हैं, घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 10-15 मिनट तक धोएं,एंटीसेप्टिक लगाएं,तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं, डॉक्टर की सलाह अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन अवश्य लगवाएं, घरेलू उपचार या झाड़-फूंक जैसे उपायों से बचने की सलाह दी गई है।
अभियान की कार्यप्रणाली
चिन्हित क्षेत्रों में विशेष टीमों द्वारा आवारा श्वानों को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जाएगा, पशु चिकित्सकों की निगरानी में स्टरलाइजेशन किया जाएगा, रेबीज टीकाकरण कर उन्हें निर्धारित समय बाद उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, पालतू श्वान मालिकों को भी टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान पूरी तरह मानवीय और पशु संरक्षण नियमों के अनुरूप संचालित होगा।


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