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कोरिया,@ कोरिया का ‘जल-क्रांति’ मॉडल अब बनेगा राष्ट्रीय नीति का आधार

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आवा पानी झोंकी अभियान’ से निकला 5 प्रतिशत मॉडल पूरे देश में लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,21 फरवरी 2026(घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र कोरिया जिला से शुरू हुई जल संरक्षण की एक स्थानीय पहल अब राष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुकी है, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि कोरिया जिले का ‘5 प्रतिशत जल संरक्षण मॉडल’ देशभर में लागू करने की दिशा में नीति-स्तर पर पहल की जाएगी, यह निर्णय केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि स्थानीय नवाचार को राष्ट्रीय मंच पर मिली स्वीकृति का प्रतीक है।
मॉडल के प्रमुख बिंदु
प्रत्येक किसान अपनी कुल कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरचना हेतु चिन्हित करता है।
इस हिस्से में सीढ़ीनुमा सोख्ता गड्ढा या संरचना बनाई जाती है।
वर्षा के दौरान खेत में गिरने वाला पानी इन संरचनाओं में एकत्रित होकर धीरे-धीरे जमीन में समा जाता है।
इससे भूजल पुनर्भरण होता है और आसपास के हैंडपंप, कुएं तथा बोरवेल में जलस्तर सुधरता है।
खेत में नमी की अवधि बढ़ती है, जिससे फसल उत्पादन में सुधार होता है, यह मॉडल कम लागत वाला है और स्थानीय संसाधनों से तैयार किया जा सकता है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

राष्ट्रीय स्तर पर क्यों महत्वपूर्ण?
भारत के कई राज्य गिरते भूजल स्तर और अनियमित वर्षा से जूझ रहे हैं, ऐसे में कोरिया का 5 प्रतिशत मॉडल एक व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करता है, यदि इसे राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनाया जाता है, तो छोटे किसानों को कम लागत में जल सुरक्षा मिलेगी, जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सकेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व मिलेगा, जल आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में ठोस कदम बढ़ेगा, केंद्रीय स्तर पर इस मॉडल को अन्य राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलित करने पर विचार किया जा रहा है।
कोरिया बना ‘जल-नायक’
यह उपलब्धि केवल एक प्रशासनिक घोषणा नहीं, बल्कि कोरिया जिले के ग्रामीणों,किसानों और प्रशासन की संयुक्त मेहनत की कहानी है, एक छोटे से जिले का नवाचार अब राष्ट्रीय नीति निर्माण में स्थान पा रहा है,कोरिया ने यह साबित कर दिया है कि विकास केवल बजट और संसाधनों से नहीं,बल्कि दूरदृष्टि,सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय समाधान से भी संभव है, आज ‘आवा पानी झोंकी अभियान’ एक जिले की पहल से आगे बढ़कर देश के लिए जल-सुरक्षा की प्रेरक मिसाल बन चुका है।
‘आवा पानी झोंकी अभियान’ क्या है?
कोरिया जिले में प्रारंभ किया गया ‘आवा पानी झोंकी अभियान’ एक जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण कार्यक्रम है, इसका उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में भूमि के भीतर समाहित कर भूजल स्तर को स्थिर एवं समृद्ध करना है, इस अभियान के अंतर्गत किसानों और ग्रामीणों को यह समझाया गया कि जल संकट का समाधान बड़े बांधों या भारी परियोजनाओं में ही नहीं, बल्कि छोटे और व्यवहारिक उपायों में भी छिपा है।
क्या है ‘5 प्रतिशत मॉडल’?
इस मॉडल की मूल अवधारणा सरल है लेकिन परिणाम प्रभावशाली हैं।
प्रशासनिक नेतृत्व और मैदानी क्रियान्वयन
इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने में जिला कलेक्टर चंदन त्रिपाठी की भूमिका महत्वपूर्ण रही। प्रशासन ने गांव-गांव शिविर लगाकर किसानों को प्रशिक्षित किया, बैकुंठपुर और सोनहत क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाए गए,तकनीकी अमले ने खेतों का निरीक्षण कर संरचना की रूपरेखा तैयार की, किसानों को स्वैच्छिक श्रमदान के लिए प्रेरित किया गया, जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने इसे सामूहिक इच्छाशक्ति का परिणाम बताया, उनके अनुसार यह मॉडल दर्शाता है कि यदि स्थानीय स्तर पर ठोस नेतृत्व और जनसहभागिता हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी उपलब्धि संभव है।
परिणामः धरातल पर दिखा असर
अभियान के प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक बताए जा रहे हैं, वर्षा जल का अधिकतम भू-गर्भ में समावेशन, खेतों में नमी की अवधि में वृद्धि,रबी फसलों के उत्पादन में सुधार, सिंचाई लागत में कमी, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता, कुछ क्षेत्रों में किसानों ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में जलस्तर में सकारात्मक बदलाव देखा गया है।


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