- भैयाथान सहकारी बैंक बना ‘री-एंट्री सेंटर’?
- घोटाला करो…सस्पेंड हो…फिर बहाल होकर लौट आओ! सहकारिता विभाग का नया फॉर्मूला?
- 2.25 करोड़ पशुपालन से 35 लाख बीमा तक-भैयाथान शाखा में आरोपित अफसरों की वापसी पर बवाल
- बैंक या ‘री-एंट्री क्लब’? कार्रवाई झेल चुके मैनेजरों की बहाली पर उठे सवाल
- सूटकेस की ताकत या राजनीतिक एप्रोच? भैयाथान बैंक में अंदरखाने खेल की चर्चा
- जांच रिपोर्ट फाइलों में…बहाली की तैयारी मैदान में… सहकारिता विभाग की चुप्पी क्यों?
- अजीत सिंह की वापसी के बाद जगदीश कुशवाहा की बहाली की चर्चाएं तेज,बैंक बोर्ड की भूमिका पर भी निगाहें
-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,16 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। सहकारिता विभाग में नियम-कायदे किताबों तक सीमित हैं या जमीन पर भी लागू होते हैं — यह सवाल इन दिनों जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की भैयाथान शाखा को लेकर जोर पकड़ रहा है, वजह हैं दो नाम, दो बड़े घोटाले और अब बहाली की चर्चाओं का नया अध्याय,आरोप है कि जिन अधिकारियों पर करोड़ों की अनियमितताओं के साए रहे,वही अब फिर से सिस्टम में लौटने की तैयारी में हैं।
पहला अध्यायः अजीत सिंह और 2.25 करोड़ का पशुपालन ऋण प्रकरण
भैयाथान शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अजीत सिंह का नाम उस समय सुर्खियों में आया था,जब पशुपालन ऋण वितरण में करीब 2 करोड़ 25 लाख रुपये की गड़बड़ी के आरोप लगे,कलेक्टर कार्यालय के आदेश पर गठित जांच टीम की रिपोर्ट में कई हितग्राहियों के नाम पर फर्जी या संदिग्ध ऋण वितरण,दस्तावेजों की कमी और नियमों की अनदेखी जैसे बिंदु सामने आए थे,जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में पशु मौजूद ही नहीं थे,लेकिन कागजों में ऋण पास हो गया, सवाल यह उठा कि क्या बैंक की आंखें बंद थीं या किसी ने जानबूझकर परदे गिरा दिए थे?
दूसरा अध्यायः जगदीश कुशवाहा और 35.38 लाख का फसल बीमा विवाद
इसके बाद चर्चा में आया दूसरा नाम—जगदीश कुशवाहा,जो तत्कालीन शाखा प्रबंधक रहे। आरोप है कि उनके कार्यकाल में करीब 35 लाख 38 हजार रुपये के फसल बीमा प्रकरण में अनियमितताएं सामने आईं,स्थानीय स्तर पर यह मामला लंबे समय तक चर्चाओं में रहा,लेकिन अंतिम कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर आज भी कई सवाल हवा में तैर रहे हैं।
बहाली की ‘इनसाइड स्टोरी’ सिस्टम मजबूत या मेहरबानी?
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि पहले कार्रवाई झेल चुके अजीत सिंह की बहाली हो चुकी है और अब उन्हीं के जरिए जगदीश कुशवाहा की वापसी का रास्ता तैयार होने की बात कही जा रही है,सूत्रों का दावा है कि अंबिकापुर में बैठकों और संपर्कों का दौर जारी है। हालांकि बैंक या सहकारिता विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन अंदरखाने चल रही हलचल ने कर्मचारियों और आम लोगों के बीच सवालों का तूफान खड़ा कर दिया है।
‘मेहरबानी’ किसकी-बोर्ड की, बैंक की या राजनीति की?
बैंक गलियारों में चर्चा है कि घोटाले के आरोप झेल चुके अधिकारियों पर अचानक इतनी नरमी क्यों दिखाई जा रही है,कुछ लोग इसे राजनीतिक एप्रोच का असर बता रहे हैं,तो कुछ इसे ‘सूटकेस वाली संस्कृति’ की उपज कहकर तंज कस रहे हैं, सवाल यह भी है कि अगर आरोप गंभीर थे,तो बहाली इतनी आसान कैसे हो गई? और अगर आरोप गलत थे,तो फिर कार्रवाई क्यों हुई?
सहकारिता विभाग की साख पर बड़ा प्रश्नचिन्ह
भैयाथान शाखा में बार-बार सामने आ रहे विवादों ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, कर्मचारियों का कहना है कि अगर आरोपित अधिकारियों की वापसी बिना स्पष्ट जवाबदेही के होती है,तो इससे यह संदेश जाएगा कि ‘पहले घोटाला करो,फिर सिस्टम में रास्ता निकाल लो। ‘
जनता पूछ रही है… जवाब कौन देगा?
क्या जांच रिपोर्ट सिर्फ फाइलों में बंद रखने के लिए बनती है?
क्या सहकारिता बैंक में नियमों से ज्यादा ‘सिफारिश’ चलती है?
और क्या भैयाथान शाखा सच में ‘घोटाला करो और बहाल हो जाओ’ मॉडल पर चल रही है?
इन सवालों के बीच बैंक प्रबंधन और सहकारिता विभाग की चुप्पी ही सबसे ज्यादा चर्चा में है।
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