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सोनहत (कोरिया)@ शिवमहापुराण कथा में साकार हुई मानवता,रेणुका सिंह ने मां बनकर किया अनाथ बच्चों का कन्यादान

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  • भक्ति के बीच बसा दो घरों का संसार,विधायक रेणुका सिंह की पहल बनी मिसाल
  • जहाँ गूँजी महादेव की महिमा,वहीं ममता का रूप बनकर आगे आईं रेणुका सिंह
  • ए री सखी मंगल गाओ री… शिव विवाह कथा के बीच सजी अनाथ बच्चों की डोली
  • कथा में शिव-पार्वती विवाह,मंडप में साकार हुई सेवा की कहानी
  • भक्ति,सेवा और संवेदना का संगम : सोनहत में मानवता का अद्भुत दृश्य
  • राजनीति से परे ममता की मिसाल — रेणुका सिंह ने थामी अनाथों की कलाई
  • जब कथा बनी करुणा की राह….विधायक ने निभाया मां का फर्ज

सोनहत (कोरिया),12 फरवरी 2026(घटती-घटना)। आस्था,अध्यात्म और मानवता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब सोनहत में चल रही शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन धार्मिक वातावरण के बीच सेवा और संवेदना की एक जीवंत मिसाल रची गई। व्यासपीठ से शिव-पार्वती विवाह का दिव्य प्रसंग गूंज रहा था,पंडाल हर-हर महादेव के जयकारों से थर्रा रहा था,और उसी क्षण क्षेत्र की विधायक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने मां का दायित्व निभाते हुए दो अनाथ बच्चों का कन्यादान कर उनके जीवन की नई शुरुआत कराई।
व्यासपीठ से सेवा का संदेश
कथा के दौरान कथावाचक ने एक विशेष घोषणा कर सभी का दिल जीत लिया,उन्होंने कहा कि उस दिन कथा में चढ़ाई जाने वाली समस्त दान-दक्षिणा नवदंपति को समर्पित की जाएगी,ताकि उनके नए जीवन की नींव मजबूत हो सके। इस घोषणा पर पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
राजनीतिक सीमाओं से परे सेवा
इस अवसर पर बैकुंठपुर विधायक भैया लाल राजवाड़े भी कथा स्थल पहुँचे और व्यासपीठ को नमन कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को पूरा करना ही सच्ची जनसेवा है।
समाज के लिए बनी मिसाल
सोनहत में चल रहा यह धार्मिक आयोजन अब केवल कथा तक सीमित नहीं रहा, यह एक सामाजिक संदेश बन गया है—कि भक्ति केवल श्रवण तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण में भी प्रकट होनी चाहिए,जब शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया जा रहा था और उसी समय दो अनाथ बच्चों का घर बसाया जा रहा था,तब यह दृश्य केवल संयोग नहीं बल्कि एक सशक्त संदेश था—धर्म का असली स्वरूप मानवता है। सोनहत की यह घटना आने वाले समय में भी इस बात के लिए याद की जाएगी कि कैसे एक धार्मिक मंच से सामाजिक परिवर्तन और करुणा की नई कथा लिखी गई।
भक्ति के साथ शक्ति का ममतामयी रूप
कथा स्थल पर हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे। मंच से जब कथावाचक ने माता पार्वती की तपस्या और हिमाचल-मैना द्वारा किए गए कन्यादान का वर्णन किया, उसी समय पास के मंडप में दो अनाथ बच्चों के विवाह की रस्में प्रारंभ हुईं। जिन बच्चों के सिर पर माता-पिता का साया नहीं था, उनके लिए यह क्षण केवल विवाह नहीं,बल्कि जीवन का सहारा था,विधायक रेणुका सिंह ने स्वयं आगे बढ़कर कन्यादान की रस्म पूरी की। उन्होंने नवदंपति को आशीर्वाद दिया और उनके गृहस्थ जीवन की सुख-समृद्धि की कामना की। कन्यादान के समय वे भावुक भी नजर आईं। उन्होंने कहा—राजनीति अपनी जगह है,लेकिन एक जनप्रतिनिधि का पहला कर्तव्य अपने क्षेत्र के असहाय लोगों का सहारा बनना है। आज महादेव की शरण में इन बच्चों का विवाह संपन्न होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
श्रद्धालुओं की आंखें हुईं नम
जैसे ही विवाह की रस्में पूरी हुईं, पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने नवदंपति पर पुष्प वर्षा की, माहौल पूर्णतः उत्सव में बदल गया,कई लोगों की आंखें नम थीं—क्योंकि उन्होंने कथा में सुने कन्यादान के प्रसंग को साक्षात होते देखा,कथा स्थल पर उपस्थित लोगों का कहना था कि धर्म तभी सार्थक है,जब वह समाज के कमजोर और असहाय वर्ग के जीवन में रोशनी लाए।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की उपस्थिति
कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े कथा स्थल पहुँचीं। उन्होंने भगवान शिव की आरती उतारी, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की और आयोजन की सराहना की,उन्होंने कहा—जब जनप्रतिनिधि अध्यात्म को सेवा से जोड़ते हैं,तब वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। रेणुका जी ने जिस तरह अनाथ बच्चों का विवाह कराकर उनका घर बसाया है,वह नेतृत्व और ममता का अनूठा उदाहरण है।


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