मारपीट से अवैध कारोबार तक…पटना में जमे आरक्षक पर उठे बड़े सवाल,थाने के अंदर विवाद,बाहर चर्चाओं का बाजार-आरक्षक पर गंभीर आरोपों से पुलिस की साख दांव पर
शिकायत से गरमाया पटना थाना : लंबे समय से जमे आरक्षक पर कार्रवाई की मांग तेज,एक आरक्षक और कई आरोप…क्या सिस्टम की चुप्पी से बढ़ रहा विवाद?
-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,10 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। जिले के पटना थाना क्षेत्र में पदस्थ आरक्षक अमल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं, हाल ही में पुलिस अधीक्षक कोरिया सौंपे गए एक लिखित शिकायत पत्र में आरक्षक पर मारपीट और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, इस शिकायत के सामने आने के बाद क्षेत्र में पहले से चल रही चर्चाएं और पुराने आरोप भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं, जिससे पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं,हालांकि,इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानांतरण के बावजूद लंबे समय से जमे रहने पर सवाल
पटना थाना क्षेत्र में आरक्षक के लंबे समय से पदस्थ रहने को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है, स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थानांतरण आदेश की बातें सामने आने के बावजूद वह लंबे समय से इसी क्षेत्र में सक्रिय हैं। लोगों का मानना है कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने से विवाद और शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे पुलिस विभाग की छवि प्रभावित होती है,जानकारों का कहना है कि पुलिस विभाग में समय-समय पर स्थानांतरण की प्रक्रिया पारदर्शिता बनाए रखने और निष्पक्षता कायम रखने के लिए जरूरी मानी जाती है, ऐसे में यदि किसी कर्मी को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं, तो विभागीय स्तर पर गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए।
पुलिस की साख पर पड़ रहा असर
क्षेत्र के कुछ सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे आरोपों के कारण पूरे पुलिस महकमे की छवि प्रभावित हो रही है, उनका कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आम लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है,लोगों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी तथ्य सामने आएं,उसके आधार पर सख्त कार्रवाई हो,हालांकि कई लोगों का यह भी कहना है कि किसी भी पुलिसकर्मी पर लगाए गए आरोपों की जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर ही होनी चाहिए,ताकि बिना पुष्टि के किसी की छवि को नुकसान न पहुंचे।
अधिकारियों की चुप्पी, जांच का इंतजार…
इस पूरे मामले में पुलिस विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है,सूत्रों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद विभागीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है, यदि जांच शुरू होती है तो मारपीट की शिकायत के साथ-साथ अन्य लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल हो सकती है।
क्या कहते हैं जानकार
कानूनी जानकारों का कहना है कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की जांच बेहद संवेदनशील होती है,एक ओर जहां आम नागरिकों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर बिना ठोस सबूत किसी पर आरोप तय करना भी उचित नहीं माना जाता,इसलिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही इस पूरे विवाद का सही समाधान मानी जा रही है।
मारपीट की शिकायत से शुरू हुआ नया विवाद
शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए आवेदन में बताया गया है कि 2 फरवरी 2026 को वह किसी मामले में थाना पटना में मौजूद था,इस दौरान आधार कार्ड मंगाने को लेकर हुई बातचीत के बीच कथित रूप से आरक्षक अमल कुमार ने बिना कारण गाली-गलौज शुरू कर दी और फिर मारपीट की,शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना के दौरान थाना परिसर में अन्य लोग भी मौजूद थे,जिन्होंने पूरी घटना देखी और सुनी, पीडि़त ने जबड़े और कंपटी में चोट लगने की बात कहते हुए निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज करने की मांग की है,शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपी आरक्षक उसी थाना में पदस्थ होने के कारण भय के माहौल में वह तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं करा सका। आवेदन पुलिस अधीक्षक को सौंपे जाने के बाद अब पूरे मामले पर विभागीय कार्रवाई को लेकर नजरें टिकी हुई हैं।
पुराने आरोपों की चर्चा फिर तेज
मारपीट की शिकायत सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर कई लोगों ने आरक्षक के खिलाफ पुराने आरोपों को भी दोहराना शुरू कर दिया है, कुछ स्थानीय नागरिकों और सूत्रों का दावा है कि उक्त आरक्षक के खिलाफ पहले भी लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान करने और दबाव बनाने की शिकायतें आती रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि क्षेत्र में चल रहे कुछ कथित अवैध कारोबारों को संरक्षण मिलने की चर्चाएं समय-समय पर उठती रही हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने जुए के मामलों में भी आरक्षक का नाम सामने आने का दावा किया है, लेकिन इन सभी आरोपों पर अभी तक किसी आधिकारिक द्वारा पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए इन्हें जांच के दायरे में आने वाले आरोप ही माना जा रहा है।
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