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कोरिया@ मुद्रा लोन के नाम पर खेल या सिस्टम की चुप्पी? यूको बैंक बैकुंठपुर में मैनेजर आनंद,विशाल और एजेंट पियूष पर उठे सवाल

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  • छुट्टी,ट्रांसफर और कर्ज में फंसे युवालोन बांटे,जिम्मेदारी गायब?
  • यूको बैंक बैकुंठपुर में आनंद, विशाल और एजेंट पियूष पर उठे गंभीर सवाल
  • 15 फरवरी का वादा या नई चाल? मैनेजर छुट्टी पर, युवा बने कर्जदार
  • मुद्रा लोन या जाल? बैकुंठपुर यूको बैंक में नियमों से खिलवाड़ की चर्चा तेज
  • छुट्टी,ट्रांसफर और कर्ज का खेल—बैकुंठपुर यूको बैंक विवाद ने खोली सिस्टम की पोल
  • कम उम्र, बड़ा लोन और बढ़ता विवाद: यूको बैंक बैकुंठपुर में सवालों के घेरे में प्रबंधन


-न्यूज डेस्क-
कोरिया,09 फरवरी 2026(घटती-घटना)।
बैकुंठपुर स्थित यूको बैंक शाखा इन दिनों कथित मुद्रा लोन अनियमितताओं को लेकर जिले की सबसे चर्चित खबर बन गई है, आरोपों के केंद्र में शाखा के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर आनंद, उनके भाई विशाल और एक कथित एजेंट पियूष के नाम लगातार सामने आ रहे हैं, हालांकि इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है,लेकिन युवाओं की शिकायतें,बैंक की चुप्पी और पुलिस की धीमी प्रतिक्रिया ने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। इस खबर में शामिल सभी नाम और आरोप शिकायतकर्ताओं व स्थानीय स्रोतों के आधार पर हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच और बैंक की प्रक्रिया के बाद ही संभव होगी।
15 फरवरी की डेडलाइन या सिर्फ आश्वासन?- सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन युवाओं को कहा गया कि 15 फरवरी तक उनके नाम पर चल रहे लोन “बंद” कर दिए जाएंगे, क्या सच में ऐसा होगा? समय तेजी से गुजर रहा है, लेकिन बैंक की तरफ से कोई स्पष्ट लिखित आश्वासन सामने नहीं आया है, इसी बीच यह खबर भी सामने आई कि ब्रांच मैनेजर आनंद तीन महीने की छुट्टी पर चले गए हैं और खुद को अस्वस्थ बता रहे हैं, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि कहीं यह छुट्टी संभावित ट्रांसफर या जांच से बचने की रणनीति तो नहीं, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन युवाओं के मन में संशय लगातार बढ़ता जा रहा है।
कम आय वाले युवाओं को लाखों का लोन – नियमों पर सवाल- शिकायतकर्ताओं का दावा है कि 18 से 21 वर्ष के ऐसे युवाओं को 8 से 10 लाख रुपये तक के मुद्रा लोन दिए गए, जिनकी नियमित आय तक नहीं थी, कुछ युवाओं का कहना है कि वे दिन में 500 रुपये तक नहीं कमाते, फिर भी उनके नाम पर भारी रकम स्वीकृत हो गई, यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर किस बैंकिंग नियम के तहत इतनी बड़ी राशि बिना मजबूत आय प्रमाण के स्वीकृत हुई, बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रा लोन में भी KYC, आय का आकलन और व्यवसाय की जांच जरूरी होती है, यदि आरोप सही हैं तो यह सिर्फ व्यक्तिगत गलती नहीं बल्कि सिस्टम की विफलता भी मानी जाएगी।
मोबाइल नंबर, मेल आईडी और खातों पर नियंत्रण के आरोप– कुछ युवाओं का कहना है कि उनके खातों में मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी बाद में अपडेट किए गए, जबकि पासबुक और चेकबुक तक उनके पास नहीं थी, आरोप यह भी हैं कि बैंक से जुड़ी जानकारी सीधे उनके पास नहीं पहुंचती थी, यदि यह सच साबित होता है तो यह बैंकिंग प्रक्रिया की गंभीर अनियमितता मानी जाएगी, हालांकि बैंक की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
लोन की रकम किसने इस्तेमाल की?– मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि कई युवाओं का दावा है कि उन्होंने अपने नाम पर निकली रकम का इस्तेमाल नहीं किया, आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ भुगतान कथित वेंडरों के माध्यम से दिखाए गए और बाद में पैसा वापस ले लिया गया, स्थानीय चर्चाओं में आनंद, विशाल और एजेंट पियूष के नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।
रिकवरी टीम आई, जांच नहीं हुई?- सूत्रों के अनुसार बैंक मुख्यालय तक शिकायतें पहुंचने के बाद एक अधिकारी शाखा में आया, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वह जांच के बजाय रिकवरी की बात ज्यादा कर रहा था, युवाओं का सवाल है कि जब वे खुद को पीडç¸त बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि पैसा उन्होंने इस्तेमाल ही नहीं किया, तो उनसे वसूली क्यों की जा रही है, यह स्थिति बैंकिंग प्रक्रिया और शिकायत निवारण प्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
पुलिस और प्रशासन की चुप्पी – सबसे बड़ा सवाल- स्थानीय लोगों का आरोप है कि खबरें सामने आने और शिकायतें होने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है, लोगों का डर यह भी है कि यदि संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण हो गया तो बाद में जांच और भी मुश्किल हो जाएगी, पुलिस की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे लोगों की नाराजगी और बढ़ रही है।
कथित एजेंट नेटवर्क और रिश्वत की चर्चा- कुछ शिकायतों में यह भी कहा गया है कि लोन स्वीकृति के दौरान कथित एजेंटों की भूमिका थी और बिना कमीशन के फाइल आगे नहीं बढ़ती थी, यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में पैसे को घुमाने के लिए वेंडरों का इस्तेमाल किया गया, हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी तक किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट में नहीं हुई है, इसलिए इन्हें फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।
छुट्टी, ट्रांसफर और बचाव की रणनीति?- मैनेजर आनंद के अचानक लंबी छुट्टी पर जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं यह ट्रांसफर लेकर मामले से दूरी बनाने की कोशिश तो नहीं, बैंक के भीतर भी इस विषय पर अलग-अलग तरह की बातें कही जा रही हैं, लेकिन बैंक प्रबंधन की तरफ से कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
बैंक की साख बनाम युवाओं का भविष्य- इस पूरे विवाद ने यूको बैंक की स्थानीय साख को प्रभावित किया है, सबसे ज्यादा चिंता उन युवाओं की है जिनके नाम पर लोन चल रहे हैं, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके क्रेडिट रिकॉर्ड पर गंभीर असर पड़ सकता है, जबकि यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो बैंक को अपनी छवि सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
ऊपर तक पहुंच या सिस्टम की चुप्पी? महिला अधिकारी को लेकर भी उठे सवाल- मामले में एक और चर्चा यह भी है कि तत्कालीन ब्रांच मैनेजर आनंद ने बैंक के उच्च स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत कर रखी थी, विशेष सूत्रों का दावा है कि यूको बैंक की एक वरिष्ठ महिला अधिकारी के साथ उनकी नजदीकियों को लेकर भी बैंक के अंदर चर्चाएं चल रही हैं, आरोप लगाने वालों का कहना है कि इसी कारण कथित अनियमितताओं के बावजूद कार्रवाई धीमी रही और मामले को दबाने की कोशिश हुई, हालांकि इन दावों की किसी आधिकारिक जांच या दस्तावेज से पुष्टि नहीं हुई है, बैंक की ओर से भी इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जानकारों का कहना है कि व्यक्तिगत संबंधों को लेकर उठ रहे सवाल तभी स्पष्ट हो पाएंगे जब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी, फिलहाल यह चर्चा बैंक के गलियारों और स्थानीय स्तर तक सीमित है, जिसकी सत्यता जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
क्या सच में होगा न्याय?- फिलहाल पूरा मामला सवालों के घेरे में है —
क्या 15 फरवरी तक लोन बंद होंगे?
क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या पुलिस और बैंक प्रबंधन समय रहते कार्रवाई करेंगे?
जिले में चर्चा यह भी है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह मामला सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप बनकर रह जाएगा और युवा ही कर्ज के बोझ में दबे रहेंगे।


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