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कोरिया/सोनहत@ भव्य कलश यात्रा से शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ

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हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंजा सोनहत
सोनहत की गलियों में उतरी शिवलोक की आभा,आचार्य विनयकांत त्रिपाठी के श्रीमुख से शिवमहापुराण का मंगल गान शुरू
कोरिया/सोनहत,09 फरवरी 2026 (घटती-घटना)।
धर्म, आस्था और भक्ति के अद्भुत संगम के बीच सोनहत की पावन धरती पर शिवमहापुराण कथा का भव्य और ऐतिहासिक शुभारंभ हुआ, नगर में निकली विशाल कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को शिवमय कर दिया, ‘हर-हर महादेव’ और ‘ऊॅंनमः शिवाय’ के जयघोषों से आसमान गूंज उठा और श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा,भक्ति और उत्साह से भरी इस यात्रा ने न केवल धार्मिक माहौल को जीवंत किया, बल्कि समाज में एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश भी दिया।
केसरिया रंग में रंगा सोनहत, भक्ति में डूबा जनसैलाब
सुबह से ही नगर में उत्साह का माहौल देखने को मिला। कलश यात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं पीली और केसरिया साडि़यों में सुसज्जित होकर शामिल हुईं,सिर पर मंगल कलश धारण कर लंबी कतारों में चलती माताएं-बहनें मानो भक्ति की सजीव प्रतिमा प्रतीत हो रही थीं, नगर के प्रमुख चौक-चौराहों और मार्गों पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया,जगह-जगह भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की धुन ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया, श्रद्धालुओं का कहना था कि इतने बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन लंबे समय बाद देखने को मिला है, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों के लोग उत्साहपूर्वक शामिल हुए और नगर का हर कोना शिवमय नजर आया।
विधायक रेणुका सिंह ने बढ़ाया आयोजन का गौरव
आस्था के इस महोत्सव में क्षेत्रीय विधायक रेणुका सिंह ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई,उन्होंने कलश यात्रा का स्वागत करते हुए श्रद्धालुओं के साथ कुछ दूरी तक पदयात्रा भी की, विधायक ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को सकारात्मक ऊर्जा देते हैं और लोगों के बीच आपसी भाईचारा बढ़ाते हैं, उन्होंने आचार्य विनयकांत त्रिपाठी की विद्वत्ता की सराहना करते हुए कहा कि उनके श्रीमुख से शिवमहापुराण कथा का श्रवण करना सोनहत के लिए गौरव और सौभाग्य की बात है।
बसंत झरिया शिव मंदिर बना आस्था का केंद्र
कलश यात्रा का प्रमुख पड़ाव बसंत झरिया शिव मंदिर रहा, जहां भक्तिभाव का अनूठा दृश्य देखने को मिला। कथा प्रारंभ से पूर्व मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार और अभिषेक किया गया, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग पर गंगाजल और विभिन्न पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया गया विधायक रेणुका सिंह, आयोजन समिति के सदस्य और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बसंत झरिया महादेव के चरणों में मत्था टेककर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
आचार्य विनयकांत त्रिपाठी की ओजस्वी वाणी से कथा का शुभारंभ
कलश यात्रा के पश्चात कथा पंडाल में विधिवत व्यास पीठ पूजन किया गया,प्रख्यात कथा वाचक आचार्य विनयकांत त्रिपाठी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को शिवभक्ति के गूढ़ रहस्यों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव केवल संहारक नहीं,बल्कि सृष्टि के रक्षक और करुणा के सागर हैं,पहले दिन के प्रवचन में आचार्य ने शिव तत्व की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि ‘शिव ही सत्य हैं और सत्य ही सुंदर है। जो भी जीव भगवान भोलेनाथ की शरण में आता है, उसके जीवन की बाधाएं और कष्ट स्वतः ही दूर हो जाते हैं।’ कथा के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर प्रवचन सुनते रहे और कई बार जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा।
आगामी दिनों में होंगे विशेष प्रसंग और आध्यात्मिक आयोजन
आयोजन समिति के अनुसार शिवमहापुराण कथा आगामी 16 फरवरी तक चलेगी। समापन दिवस पर विशाल भंडारा और पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं को कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का श्रवण कराया जाएगा, जिनमें प्रमुख रूप से-
शिव-सती चरित्रः त्याग, प्रेम और समर्पण की अद्भुत कथा
अर्धनारीश्वर स्वरूपः सृष्टि में पुरुष और प्रकृति के संतुलन का संदेश
शिव-पार्वती विवाह महोत्सवः भव्य उत्सव और सांस्कृतिक झांकी के साथ
द्वादश ज्योतिर्लिंग महिमाः घर बैठे बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य
रुद्राक्ष और भस्म का महत्वः आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश

शिवमहापुराण कथा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बनकर सामने आई है, विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोग मिलकर आयोजन की व्यवस्था में जुटे हैं, स्थानीय युवाओं ने यातायात व्यवस्था संभाली तो महिलाओं ने भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भक्ति की गूंज से बदल रहा सोनहत का माहौल
नगरवासियों का कहना है कि कथा के दौरान सोनहत में आध्यात्मिक वातावरण का नया संचार हुआ है, शाम होते ही कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो जाता है, आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमियों से सपरिवार कथा में शामिल होकर भक्ति रस की इस गंगा में डुबकी लगाने की अपील की है।


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