- पत्र आया रायपुर से,फैसला हुआ कोरिया में… संगठन या ‘मैं ही अध्यक्ष’ मॉडल?
- नियम बनाम मनमर्जी : कोरिया में साहू समाज की राजनीति का नया अध्याय…
- जब आदेश हार गया और घोषणा जीत गई… कोरिया का अनोखा अध्यक्षीय ड्रामा…
- प्रदेश की स्याही हल्की या माला भारी? साहू समाज में उठे तीखे सवाल…
- कोरिया मॉडल : पहले अध्यक्ष घोषित करो,बाद में नियम पढ़ो!
- संगठन का आदेश बनाम स्थानीय ऐलान… साहू समाज में बढ़ता टकराव…



-रवि सिंह-
कोरिया,04 फरवरी 2026(घटती-घटना)। कोरिया जिले में साहू समाज की सियासत इन दिनों ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है,जहां संगठनात्मक अनुशासन और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा आमने-सामने नजर आ रही है,प्रदेश स्तर से स्पष्ट आदेश जारी होने के बाद भी यदि कोई नेता खुद को अध्यक्ष घोषित करता है,तो यह सिर्फ एक पद की लड़ाई नहीं,बल्कि पूरे संगठनात्मक ढांचे को खुली चुनौती माना जाएगा, प्रदेश साहू संघ द्वारा 31 जनवरी 2026 को जारी पत्र कोई साधारण कागज नहीं था,बल्कि वह संगठन की आधिकारिक लाइन थी-जिसमें चुनाव प्रक्रिया को निरस्त कर नई व्यवस्था लागू करने की बात कही गई थी,सवाल यह उठता है कि जब शीर्ष नेतृत्व ने दिशा तय कर दी थी,तो फिर कोरिया में अलग राह क्यों चुनी गई? क्या यहां प्रदेश के नियम नहीं चलते या फिर कुछ लोगों ने खुद को नियमों से ऊपर मान लिया है?
बता दे की छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी कोरिया जिले में जिस तरह से अलग बैठक कर खुद को जिला अध्यक्ष घोषित करने की खबर सामने आई है,उसने पूरे साहू समाज की राजनीति को गरमा दिया है, 31 जनवरी 2026 को प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र साहू द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में निर्वाचन प्रक्रिया निरस्त कर नई व्यवस्था लागू करने की बात कही गई थी, लेकिन आरोप है कि इन आदेशों को दरकिनार कर जगदीश साहू ने माला पहनकर खुद को यथावत अध्यक्ष घोषित कर दिया।
प्रदेश से ऊपर कौन? समाज में उठे तीखे सवाल
प्रदेश स्तर के पत्र में साफ लिखा गया था कि किसी भी विवाद की स्थिति में प्रदेश साहू संघ का निर्णय अंतिम और मान्य होगा,इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अलग रास्ता अपनाए जाने से समाज के भीतर तीखी चर्चा शुरू हो गई है,कई सदस्य सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कोरिया जिले में प्रदेश संगठन का आदेश चलेगा या कुछ चुनिंदा लोगों की मनमर्जी?
सीमित बैठक…बड़ा फैसला…वैधता पर घिरा ऐलान…
सूत्रों का कहना है कि जिस बैठक में अध्यक्ष होने की घोषणा की गई, उसमें सीमित लोग मौजूद थे,विरोध करने वाले सदस्यों का आरोप है कि यह कदम संगठनात्मक अनुशासन को चुनौती देने जैसा है और इससे समाज दो खेमों में बंटता नजर आ रहा है। हालांकि समर्थक पक्ष इसे स्थानीय निर्णय बताते हुए वैध ठहराने की कोशिश कर रहा है।
पत्र नहीं मानते…चर्चाओं ने बढ़ाई सियासी गर्मी…
अंदरखाने यह भी चर्चा है कि जगदीश साहू ने प्रदेश अध्यक्ष के पत्र को मानने से इंकार किया है, यदि यह दावा सही है तो इसे संगठन के इतिहास में बड़ी चुनौती माना जा रहा है। हालांकि इस कथित बयान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन समाज में इसे लेकर जबरदस्त बहस छिड़ गई है।
अब क्या करेगा प्रदेश नेतृत्व?
पूरा मामला अब प्रदेश साहू संघ के अगले कदम पर टिक गया है, समाज के वरिष्ठ लोग मानते हैं कि अगर इस विवाद पर सख्त और स्पष्ट फैसला नहीं आया तो संगठनात्मक अनुशासन पर सवाल और गहरे हो सकते हैं। कई लोग इसे संगठन बनाम व्यक्ति की लड़ाई तक बता रहे हैं।
समाज में बढ़ता असंतोष
कोरिया जिले में हालात ऐसे बन गए हैं कि आम सदस्य भी असमंजस में हैं…आखिर असली नेतृत्व किसके पास है? प्रदेश अध्यक्ष का लिखित आदेश या स्थानीय स्तर पर की गई घोषणा? आने वाले दिनों में प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह विवाद शांत होगा या साहू समाज की राजनीति में और बड़ा तूफान खड़ा करेगा।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur