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उदयपुर@जुआ एक्ट के तहत 17 आरोपी गिरफ्तार, 1.40 लाख नकद जब्त

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  • सांसद प्रतिनिधि से लेकर शासकीय कर्मचारी तक जुए में लिप्त…
  • जंगल में संचालित जुआ फड़ पर उदयपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई,17 जुआरी गिरफ्तार

-मनोज कुमार-
उदयपुर,12 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा जिले में जुए के खिलाफ की गई एक बड़ी और चौंकाने वाली पुलिस कार्रवाई ने राजनीतिक,सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, उदयपुर पुलिस ने जंगल में संचालित हो रहे एक बड़े जुआ फड़ पर छापा मारते हुए 17 जुआरियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है,इस कार्रवाई में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि पकड़े गए जुआरियों में सांसद प्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और शासकीय कर्मचारी तक शामिल हैं,बता दे की सरगुजा पुलिस ने अवैध जुआ-सट्टा के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है, उदयपुर थाना पुलिस एवं साइबर सेल की संयुक्त टीम ने ग्राम कोटेरबुड़ा जंगल पुलिया के पास संचालित जुआ फड़ पर दबिश देकर कुल 17 जुआरियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से 1 लाख 40 हजार 310 रुपये नकद एवं 52 पत्ती ताश जब्त किए हैं।
मुखबिर की सूचना पर त्वरित रेड
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उदयपुर क्षेत्र अंतर्गत कोटेरबुड़ा पुलिया के पास जंगल में 52 पत्ती तास से रुपए-पैसों की हार-जीत का जुआ लंबे समय से संचालित हो रहा था,मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस की विशेष टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर मौके पर दबिश दी और जुआ खेलते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया,उदयपुर पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई राजेश कुमार अग्रवाल,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा के निर्देशन में की गई,पुलिस को दिनांक 11 जनवरी 2026 को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि कोटेरबुड़ा जंगल पुलिया के पास कुछ लोग 52 पत्ती ताश से रुपये-पैसों की हार-जीत का जुआ खेल रहे हैं, सूचना की पुष्टि होते ही थाना उदयपुर एवं साइबर सेल की संयुक्त टीम ने त्वरित रूप से मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और जुआ खेलते हुए 17 आरोपियों को पकड़ लिया।
जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 1,40,310 नगद एवं 52 पत्ती ताश जब्त की। आरोपियों का कृत्य छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत अपराध पाए जाने पर थाना उदयपुर में अपराध क्रमांक 08/26, धारा 3(2) के तहत मामला दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
इन अधिकारियों की रही अहम भूमिका-
इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक शिशिरकांत सिंह (थाना प्रभारी, उदयपुर), सहायक उप निरीक्षक अजीत मिश्रा (प्रभारी, साइबर सेल), प्रधान आरक्षक भोजराज पासवान, संजय कुमार, विकास सिन्हा, आरक्षक अमन पुरी, अशोक यादव, रमेश राजवाड़े, अजय शर्मा, रविंद्र साहू, कृष्णा सिंह की सक्रिय भूमिका रही।
अभियान जारी रहने का दावा-
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सरगुजा जिले में अवैध जुआ एवं सट्टा के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
जंगल में चल रहा था बड़ा जुआ फड़-
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उदयपुर क्षेत्र अंतर्गत कोटेरबुड़ा पुलिया के पास जंगल में 52 पत्ती तास से रुपए-पैसों की हार-जीत का जुआ लंबे समय से संचालित हो रहा था। मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस की विशेष टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर मौके पर दबिश दी और जुआ खेलते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया।
1.40 लाख नकद और ताश बरामद-
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जुआरियों के कब्जे से करीब 1 लाख 40 हजार रुपए नकद और 52 पत्ती ताश बरामद की है। सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें थाना लाया गया, जहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद चालान तैयार किया गया।
कोरिया जिले के रसूखदार लोग शामिल
इस कार्रवाई ने तब और सनसनी मचा दी जब यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तार किए गए सभी 17 जुआरी कोरिया जिले के निवासी हैं और अधिकांश नगर पंचायत पटना से ताल्लुक रखते हैं, पकड़े गए आरोपियों में नगर पंचायत पटना में कोरबा सांसद का मनोनीत प्रतिनिधि,विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता,शिक्षक,राजस्व विभाग में पदस्थ लिपिक, और नगर पंचायत पटना के प्रतिष्ठित परिवारों के सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं,यह स्थिति समाज और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
कानून का न डर, न सम्मान
जिन लोगों पर समाज को दिशा देने और कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी होती है,उनका स्वयं जुए जैसे अपराध में पकड़ा जाना कानून-व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करता है,स्थानीय लोगों का कहना है कि रसूख और पद का असर ही है,जिसके कारण ऐसे लोग खुलेआम कानून तोड़ने का साहस करते हैं।
शासकीय सेवकों पर
विभागीय कार्रवाई का सवाल

इस प्रकरण में एक शिक्षक और राजस्व विभाग के लिपिक का नाम सामने आने के बाद यह प्रश्न उठने लगा है कि क्या शासकीय सेवकों के लिए खुलेआम जुआ खेलना शोभनीय है? क्या यह सेवा शर्तों का उल्लंघन नहीं है? सूत्रों का कहना है कि जुआ एक्ट के मामलों में अक्सर विभागीय स्तर पर कठोर कार्रवाई नहीं होती,जिससे ऐसे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और वे दोबारा ऐसे कृत्यों में शामिल होते रहते हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक विभागीय कार्रवाई नहीं होगी,तब तक ऐसे मामलों पर अंकुश लगना मुश्किल है।
छापे के दौरान कुछ जुआरी भागे
सूत्रों के अनुसार,जुआ फड़ पर मौजूद लोगों की संख्या 17 से कहीं अधिक थी, पुलिस दबिश के दौरान कुछ जुआरी मौके से भागने में सफल रहे। भागते समय एक जुआरी का हाथ टूटने और एक अन्य के गिरकर घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
न्यायालय में पेशी,जुर्माना
जमा कर अपराध स्वीकार

सूत्रों के मुताबिक,पकड़े गए सभी 17 जुआरियों को न्यायालय में पेश किया गया,जहां उन्होंने जुर्माना राशि जमा कर अपराध स्वीकार कर लिया, आमतौर पर ऐसे मामलों में सभी आरोपियों द्वारा एक साथ अपराध स्वीकार करना दुर्लभ माना जाता है, खासकर जब उनमें शासकीय कर्मचारी भी शामिल हों।
कानूनी प्रक्रिया पूरी, लेकिन दाग कायम
भले ही कानूनी प्रक्रिया के तहत जुर्माना जमा कर मामला समाप्त हो गया हो, लेकिन यह सच भी है कि अब एक आपराधिक प्रकरण इन सभी के नाम से जुड़ चुका है, सामाजिक और नैतिक दृष्टि से यह घटना सरगुजा अंचल के लिए एक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है।
सवाल अब भी कायम
– क्या जुआ फड़ों के पीछे सक्रिय संगठित नेटवर्क तक पुलिस पहुंचेगी?
– क्या रसूखदारों पर आगे भी सख्त कार्रवाई होगी?
– और क्या शासकीय कर्मचारियों पर विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे? जब तक इन सवालों के ठोस जवाब नहीं मिलते, तब तक जुए के खिलाफ यह कार्रवाई अधूरी लड़ाई ही मानी जाएगी।
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने अपने नाम इस प्रकार बताए—

  1. राजेश सोनी (50)
  2. संदीप कुमार (32)
  3. राजेंद्र प्रसाद (52)
  4. राजेश गुप्ता (40)
  5. अल्ताफ खान (45)
  6. सुभाष कुमार (38)
  7. दीपक छत्री (47)
  8. विजय सिंह (45)
  9. अमित कोरी (31)
  10. संदीप गुप्ता (27)
  11. शैलेन्द्र गुप्ता (27)
  12. कार्तिक सिंह (30)
  13. संतोष कुमार सोनी (36)
  14. अशोक वर्मा (57)
  15. सुदर्शन सिंह (39)
  16. संदीप ध्रुव (37)
  17. अभिषेक कुमार (34)

सभी आरोपी पटना नगर पंचायत, थाना पटना, जिला कोरिया के निवासी बताए गए हैं।


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