सूरजपुर,02 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। जिले के अधिकांश गांवों में गेहूं की बुवाई का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। इसी बीच कई क्षेत्रों से गेहूं की फसल में कीट, रोग एवं खरपतवार की समस्या सामने आ रही है, जिससे किसानों की मेहनत और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इस स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए समसामयिक तकनीकी सलाह जारी की है, ताकि समय रहते फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
देरी से बोई फसल में दीमक का अधिक खतरा- कृषि विभाग के अनुसार देर से बोई गई फसलों में दीमक का प्रकोप अधिक देखा जाता है, जो जड़ों को नुकसान पहुंचाकर उत्पादन घटा सकती है। गेहूं की फसल में कीट नियंत्रण के लिए बीज उपचार को अत्यंत प्रभावी उपाय बताया गया है।
बीज उपचार के लिए अनुशंसित दवाइयाँ
क्लोरोपाइरीफॉसः 0.9 ग्राम प्रति किलो बीज
थायोमेथोक्साम 70 1 ग्राम प्रति किलो बीज
फिप्रोनिल (रीजेंट 5 स्नस्)ः 0.3 ग्राम प्रति किलो बीज बीज उपचार से दीमक सहित अन्य प्रारंभिक कीटों का प्रभाव कम होता है और फसल की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित होती है।
कीट नियंत्रण के उपाय
समय पर बोई गई फसल में यदि दीमक का आक्रमण दिखाई दे, तो सिंचाई करना लाभदायक होता है।
गुलाबी तना छेदक कीट कम जुताई वाले खेतों में अधिक पाया जाता है। कीट दिखाई देते ही किनालफॉस (ईकालक्स) 800 मिली प्रति एकड़ का पत्तियों पर छिड़काव करें।
खरपतवार नियंत्रण की सलाह
संकरी पत्ती वाले खरपतवार के लिए
क्लोडिनाफॉप 15 160 ग्राम प्रति एकड़
पिनोक्साडेन 5 400 मिली प्रति एकड़
चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के लिए
2,4-डी ईः 500 मिली प्रति एकड़
मेटसल्फ्यूरॉन 20 8 ग्राम प्रति एकड़
संकरी व चौड़ी दोनों प्रकार की खरपतवार के लिए
सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 ङ्खत्रः 13.5 ग्राम प्रति एकड़
सल्फोसल्फ्यूरॉन + मेटसल्फ्यूरॉन )ः 16 ग्राम प्रति एकड़
छिड़काव पहली सिंचाई से पहले या 10-15 दिन बाद करें।
वैकल्पिक विकल्प
मेसोसल्फ्यूरॉन + आयोडोसल्फ्यूरॉन 3.6′ 160 ग्राम प्रति एकड़
फैलेरिस माइनर (गुल्ली डंडा) नियंत्रण
बुवाई के 0-3 दिन बाद
पाइरॉक्सासल्फोन 85 60 ग्राम प्रति एकड़,
या पेंडिमेथालिन 30 2 लीटर प्रति एकड़
वैकल्पिक मिश्रण के रूप में
एक्लोनिफेन 450 + डाइफ्लुफेनिकन 75 + पाइरॉक्सासल्फीनः 500-800 मिली प्रति एकड़
पहली सिंचाई के 10-15 दिन बाद
क्लोडिनाफॉप + मेट्रिब्यूजिन (12+42′ )ः 200 ग्राम प्रति एकड़
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