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लेख@ अपने को पहचानना और समय से चलना जरुरी

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अपने को पहचानना जरुरी है क्योंकि भगवान कण कण में राम हर मन में राम है फिर भी लोग कथा वाचक की ओर अग्रसर होते हैं जिसके अंदर ही कई अलग अलग विचार हैँ सबसे शक्ति शाली ब्रह्म स्वामी राम जहाँ भी है वो भगवान राम की कृपा से ही है कर्म ना कर कथा वाचक के कथा का आपस में ही विवाद ऐ नहीं आपके अंदर है अतः जो खुद ही आपस में एकजुट नहीं हैं अलग-अलग मत है उससे ऐ सीखना चाहिए। भगवान राम आपके कर्मों से फल देते हैं नारी को उन्होंने एक शक्ति दी और सीता माता की लाज बचाई,भगवान श्री राम का साक्षात् रुप देखना चाहते हैं तों सबसे अलग होकर उनका स्मरण कीजिये। एक बार नहीं जितना हो सके करें उसमें आपको मन के अंदर इधर उधर की बातें दौड़ेगी। गाय को रोटी दें बार-बार ध्यान करने से कुछ साहस मिकेगा। ऐसा अगर हर दिन 3-4 घंटा करें औऱ फिर भगवान श्री राम से प्रेम की भावना जगेगी औऱ मन पर नियंत्रण होगा । 3-4 साल के बाद लगातार करने से भगवान राम से इतना विश्वास होगा की उनके प्रेम में मस्त हो जायेंगे और लगेगा की यहाँ से मुक्ति मिले। बाद में आपको उनका साक्षात् रूप दिखाई देगा इसका प्रमाण इतिहास में मिलेगा। जब गुरुनानक जी मक्का मदीना में प्रभु राम के ध्यान में डूबे थे और पैर मक्का के सामने था और जब किसी ने देखा तो उसी से पैर हटाने को कहा और हर तरफ मक्का ही दिखने लगा बाद में माफी मांगी गुरुनानक देव में राम की भक्ती इतनी प्रबल थी कि उनके तेज से मक्का आज भी झुका हुआ है और जितने गुरू वों ने इस्लाम के खिलाफ सहादत दी है। सबने भगवान राम का साक्षात् दर्शन किए हैं इसलिए मौत उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकी। वों तो अमर हो गए लेकिन मारने वाला ही मर गया । भगवान श्री राम ही जगत के मालिक हैं क्योंकि उनके जैसा शक्ति किसी में नहीं थी जो रावण का वध कर सके। ध्यान कीजिये अंदर ही छुपा है आधुनिक युग में जब से नारीवादी चेतना,नारी अस्मिता, महिला सशक्तिकरण का सूत्रपात हुआ है तब से नारी के प्रति सामाजिक चेतना में परिवर्तन होने के साथ ही कवियों की लेखनी को भी नई दृष्टि व नई चेतना मिली है। यही कारण है कि आधुनिक काल में वैदिक, पौराणिक तथा महाभारतीय नारियों के चरित्रों को आधृत कर नाटक एवं महाकाव्य प्रणीत किए गए हैं। भगवान रावण को हरा इसलिए पाये की वो समय से चले जब बाली को मोक्ष देकर सुग्रीव को किस्किंधा का राज सौंप देते है तो राजा
की मस्ती में भगवान श्री राम का वचन भूल जाता है तब बहुत इंतज़ार के बाद उसे अपना वचन याद दिलाते हैं और क्रोध आता है क्योंकि इसका कारण यह था की सीता माता का पता बतानेवाला जटायु का भाई सम्पाती था जो जर्ज़र अवस्था में था और समय से रावण के विरुद्ध सुग्रीव भी अपने वादे को पूरा करता है और अंततः सम्पाती ही सीता माता का पता बताता है इसलिए समय बहुत महत्वपूर्ण है समय निकला तो बाद में कुछ नहीं होगा. अतः समय से चलें।

संजय गोस्वामी
मुंबई,महाराष्ट्र


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