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लेख@ क्या लेखिका तन्वी कुछ गलत कह रही है? बताओ

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सच बोल रही हूॅं…हॉं-हॉं बिलकुल सच ! आज भी हम यातायात के दुर्व्यवहार के चलते बहुत परेशान हैं । क्यों कि आज के समय में बढ़ते यातायात साधनों व नये-नये तरह के साधनों के चलते जहॉं एक ओर पर्यावरण पर बहुत ही गहरा व बुरा असर हुआ है । वहीं दूसरी ओर आज के समय मे लोग ट्रेफिक नियमों को ताक में रखकर गाड़ी चलाने लगे हैं। सिग्नल पर आए दिन लोग नियमों का उल्लघंन करते दिख जाते हैं । आज के युवावर्ग भी गाड़ी चलाते समय कितनी हवाबाजी करने लगे हैं । जिसके चलते स्वयं के साथ-साथ दूसरों की जिंदगी भी दॉंव पर लगा देते है। बड़ी-बड़ी कारों को चाहे हाई-वे हो या शहर के भीतर तेज से चलाते हुए ना जाने कितने संगीन जुर्म कर बैठते। यदि कभी किसी कारणवश भूले-भटके सिग्नल बंद है तकनीकी खराबी के चलते तो अपनी जिम्मेदारी को भूल सभी यहॉं तक की मैं भी एक आध बार में शामिल हूॅं जिसको जहॉं से मिलता रास्ता या जैसा मन किया अपनी गाड़ी निकाल लेते। इसलिए आज के समय में जहॉं एक ओर यातायात परिवहन सुखद है , तो उसी के विपरीत ये आम लोगों कि गलती, दुर्व्यवहार के चलते बहुत ही हानिकारक भी है।
कहते हैं,
देश की सीमा पर
देश के रक्षक बन,
सीना ताने खड़े हैं फौजी….
और हम आम जनता
देश के भीतर बन रहे
दुर्व्यवहार कर मनमौजी।।
स्वयं के ही मन से जरा आप सवाल करें ? क्या आप सही हैं ?
आपका ही भीतर मन आपका सत्य दिखाने वाले आईने में आपका
असली चेहरा दिखा देगा । जिस तरह एक फौजी अपना कर्तव्य बखूबी,निडर और ईमानदारी से आप सभी की रक्षा करने के लिये अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए डटा रहता हर मौसम में सीमा पर तो क्या आप सिर्फ और सिर्फ देश के भीतर रहकर अपने देश की आम जनता के साथ-साथ स्वयं की रक्षा नहीं कर सकते ? अरे ! बल्कि आप अपने कर्तव्य पथ से भटक कर स्वयं के साथ-साथ दूसरों की जान से भी खिलवाड़ करते हो। क्या फौजी इंसान नहीं हैं? क्या उन्हें सर्दी , गर्मी,बरसात जैसे मौसम का कोई असर नहीं होता है ? अरे! वो भी इंसान है समझो वो जब सब ऋतुओं को नजर अंदाज कर आपके और आपके परिवार अपनों की रक्षा के लिये जब सदैव हाजिर हैं तो आप क्यों नहीं? आपसे ज्यादा कुछ नहीं मांग रहा सेवा में ये देश वो तो सिर्फ आपसे और ओरों से भी अपनी और दूसरों की जान से खिलवाड़ ना करने की गुजारिश कर रहा है ।
अरे! पूछो उन फौजियों से जो छः-छः माह या एक साल कभी-कभी तो दो साल तक अपने परिवार से भी नहीं मिल पाते हैं की उनके दिल पर क्या बितती है ? तड़पते हैं कभी-कभी वो भी अपने परिवार वालों से मिलने के लिये पर विवश हैं । पता है क्यों ? क्यों की उनके आगे उनका फर्ज आड़े आता है वो अपने फर्ज को पहले महत्व देते हैं और वो फर्ज है देश और देश के वासियों की रक्षा ।
आप कितने भाग्यशाली हैं की आप अपने परिवार संग रहते । शायद यही कारण हैं की आपको परिवार वालों की कद्र या परवाह नहीं है । गलत नहीं कह रही मैं तभी तो आप घर से गाड़ी पर निकलते समय ये भूल जाते हैं कि कोई है जो आपके लौटने के इंतजार मे घर में पलकें बिछाए बैठा है । कोई है जो आप पर आश्रित है – पता है कौन आपके मासूम से बच्चे जो अपने नन्हे-नन्हे हाथों से आपके गले में झूला बना आपसे लिपटना चाहता । अब आप सोचिये की क्या एक छोटी सी लेखिका साधारण शब्दों में लिख कलम चला जो कह रही क्या वो ग़लत कह रही है ?


वीना आडवानी तन्वी
नागपुर,महाराष्ट्र


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