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कहानी@ अफ़साना,हाथ से छूटा रिश्ता

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यूनिवर्सिटी के दिनों में वे दोनों साथ पढ़ते थे। दोस्ती धीरे-धीरे मोहब्बत में बदल गई और दोनों ने शादी कर ली। पति ने पत्नी की पढ़ाई पर अपनी जमा-पूंजी सब खर्च कर दी। किस्मत ने दोनों के लिए अलग रास्ते चुने,पत्नी एक ऊँची अफ़सर बन गई, और पति मामूली क्लर्क की नौकरी में लग गया।शुरुआत में प्यार था, अपनापन था, लेकिन फिर दूरियाँ बढ़ने लगीं। पत्नी रोज़ ऑफिस के लिए निकलती और पति चुपचाप उसके साथ पीछे वाली सीट पर बैठ जाता,धीरे-धीरे, पति-पत्नी के बीच एक अनकही दीवार खड़ी हो गई। पति बस अपने काम में खुद को डुबोए रहता। ऑफिस में अफसर के साथ पत्नी की बढ़ती नजदीकियों की चर्चा आम हो गई। अब वह अक्सर देर से घर आती, कभी ओवरटाइम का बहाना, तो कभी ऑफिस में ही रुक जाने की बात करती।
एक दिन पति अचानक ऑफिस पहुँच गया और पत्नी को अफसर के साथ बेहद करीब पाया। पल भर के लिए माहौल थम सा गया; दोनों ने उसे देखा,लेकिन कोई कुछ नहीं बोला। वह चुपचाप लौट आया। घर पर पत्नी ने समझाने की कोशिश की, कुछ नहीं है, बस साहब बहुत फ्रेंडली हैं। मगर पति ने कुछ नहीं कहा — कमरे में रह गई एक अनदेखी दरार।अगली सुबह वह बिना बताए घर से निकल गया। इसके बाद वह ऑफिस कभी नहीं लौटा, उसका इस्तीफ़ा पहुँच चुका था। दफ़्तर में किसी ने उसकी कमी महसूस नहीं की, सब कुछ पहले जैसा चलता रहा। अब वह अफ़सर अक्सर पत्नी के घर आने-जाने लगा। इस बीच पत्नी को शायद अहसास भी नहीं हुआ कि उसका असली हमसफ़र हमेशा के लिए खामोश होकर जा चुका है। समय बीतता गया। अफ़सर की मोहब्बत भी बस एक वक¸्ती अहसास निकला,वह भी उस को छोड़ गया। अब वो पूरी तरह अकेली और लाचार रह गई। अब उसे जीवन के असली सबक समझ आने लगे,मोहब्बत की असलियत,पति की कुर्बानी, और वक¸्त की अहमियत।
दूसरी तरफ,क्लर्क ने एक नए शहर में जाकर अपनी जिन्दगी दोबारा शुरू की। उसने फिर से पढ़ाई की, मेहनत की और कुछ सालों बाद एक बड़ी कंपनी में मैनेजर बनकर उसी शहर लौटा। ऑफिस में उसने अपनी सच्चाई, गुज़री हुई कड़वाहटें और तमाम सच एक समझदार, ख़ूबसूरत लड़की के सामने रखे,जिसे उसने दिल से चाहा। लड़की ने उसकी ईमानदारी को सराहा और शादी के लिए हामी भर दी।
शादी के फंक्शन में उसने अपनी एक्स-वाइफ को भी बुलाया। वहाँ महफç¸ल सजी हुई थी, सब लोग अपनी-अपनी पत्नियों के साथ खुशियाँ बाँट रहे थे। एक्स वाइफ की आँखों में पछतावे के आँसू थे। उसने रीना (नई दुल्हन) की तरफ देखकर कहा,तुम बहुत खुशकिस्मत हो…मुबारक हो! लेकिन उसकी आवाज़ में गहरे दुख और गुज़रे हुए पलों की टीस छुपी थी। एक्स पति उसके पास आया और मुस्कुराकर बोला, आइए, मैं आपको अपनी पत्नी से मिलवाता हूँ।वो चौंककर बोली, अरे ये तो रीना है! ये भी अपनी तो मेरी क्लासमेट ही थी… अभी-अभी मैं इससे मिली हूँ।महफç¸ल में हँसी-खुशी की आवाज़ें गूँज रही थीं,लेकिन एक्स वाइफ की आँखों में केवल एक पुरानी दुनिया का खालीपन और पछतावे की चुप्पी थी। अब उसके हाथ से रिश्ता वैसे ही छूट चुका था जैसे रेत मुठ्ठी से धीरे-धीरे फिसल जाती है। सच यही है—वक्त और फैसले कभी लौटकर नहीं आते। जो हाथ छूट जाते हैं,उनकी पकड़ सिर्फ यादों और पछतावे में ही बाकी रह जाती है। मोहब्बत, मेहनत और खुद्दारी जिसने अपनाई, उसे नई खुशी मिल गई; और जिसने एक झूठे रिश्ते पर सब कुछ लुटा दिया, उसके हिस्से में सिर्फ अधूरी तन्हाई और आँसू रह गए।यह अफ़साना अपने अंदर मोहब्बत,पछतावा,जीवन के सबक और फिर से उठ खड़े होने की सच्ची तस्वीर समेटे हुए है। जब तक विश्वास और वफ़ादारी न हो, चाहे रिश्ता कोई भी हो, टिकता नहीं। असली महानता उसी की है,जो गिरने के बाद फिर सिर उठाकर जि़ंदगी का सामना करना सीख जाए।


डॉ. मुश्ताक अहमद शाह
हरदा मध्य प्रदेश


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