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कविता@ तंग आ चुके हम…

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यह हमारे सभ्य स्वभाव
का मजाक नहीं तो क्या है।
कान पक गए हैं,चिडचिडापन
बढ़ रहा है, बलात्कार की
खबरें अखबार में पढ़ते-पढ़ते।
टीवी में बुलडोजरों के द्वारा
मकान गिराए जाने तथा
हिंदू मुसलमान के बढ़ते तनाव
की खबरें देखते देखते हम लोग
तंग आ चुके हैं इस माहौल से।
राजनेताओं द्वारा एक दूसरे
पर आप तथा प्रत्यारोप लगाने
से देश में माहौल खराब हो रहा है।
राजनेता लोग लोग लुभाने वायदे
करके मतदाताओं को बेवकूफ बना रहे हैं।
यह सब सुनते-सुनते और देखते
देखते सर चक्कराने लगा है आजकल।
क्या हो रहा है यह सब अपने देश में।
अपने आप को सभ्य तथा विकसित
कहने वाले देश जैसे अमेरिका, इंग्लैंड,
रूस,यूक्रेन,चीन,इजरायल,ईरान आदि
एक दूसरे पर ड्रोन हमले कर रहे हैं
एक दूसरे पर मिसाइल गिराकर तबाही
मचा रहे हैं और हजारों जिंदगियां खत्म
कर रहे हैं, कोई इनसे पूछने वाला नहीं है।
यह एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए
इस दुनिया को विनाशकारी तीसरे महायुद्ध
की तरफ ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।
बेचारा संयुक्त राष्ट्र माथा पकड़े हुए हैं।
विनाशकारी युद्ध लड़ने वाले यह सभी देश
शांति स्थापित करने के लिए झगड़ रहे हैं।
तंग आ चुके हैं हम ऐसी सब बातों से।
ऐ दुनिया के आज के हमारे खुदाओं
हमें हमारे हाल पर ऐसे ही छोड़ दो आप
हम जैसे कैसे आपके बिना ही जी लेंगे।


प्रो.शामलाल कौशल
रोहतक
हरियाणा


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