समुद्र के भीतर बारूद छिपाकर भारत-चीन तेल मार्ग को उड़ाने की साजिश
ईरान 02 जुलाई 2025 (ए)। 13 जून को इजरायली हमले और 22 जून को अमेरिकी जवाबी कार्रवाई के बीच ईरान में व्यापक तैयारियां चल रही थीं। यह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की तैयारी थी।अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि ईरान ने पिछले महीने अपने नौसैनिक जहाजों पर पानी के नीचे की नौसैनिक बारूदी सुरंगें लोड की थीं। यह वही मार्ग है जिसके माध्यम से विश्व के तेल और गैस का पांचवां हिस्सा व्यापार किया जाता है।
होर्मुज: बारूद के साये में विश्व शक्ति की जीवन रेखा
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और केवल 34 किलोमीटर चौड़ा है। लेकिन इसका सामरिक और आर्थिक महत्व कहीं अधिक है। सऊदी अरब, इराक, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देशों से कच्चा तेल और गैस इसी मार्ग से आते हैं। यहां तक कि ईरान भी इस मार्ग पर निर्भर है। यही कारण है कि यदि यह मार्ग बंद हो जाए तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ध्वस्त हंो सकती है और तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। हालाँकि, अमेरिकी हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव और सैन्य सतर्कता ने कम से कम फिलहाल संकट को टाल दिया है।
उद्देश्य या मनोवैज्ञानिक युद्ध?
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने बारूदी सुरंगें बिछाकर दो चीजें हासिल कीं। या तो वह वास्तव में शटडाउन की तैयारी कर रहे थे, या फिर वह अमेरिका और उसके सहयोगियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने की कोशिश कर रहे थे। ये आशंकाएं तब और प्रबल हो गईं जब ईरानी संसद ने 22 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का प्रस्ताव पारित किया।
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