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कविता @जागौ गा जवान …

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लालची मन के माथ ला तुम ला झुकाना हे।
मेहनत के ही रोटी संगी हम सब ला खाना हे।।
दहेज के करई खिलाफ एकदम हावै आसान।
पढ़ें लिखे के दे पहचान एकर ले का हे आसान।।
मां बाप बेटा के देख योग्यता होगे हावै स्वार्थी।
शुरूआत तंही कर अउ बन जा पहली परमार्थी।।
अपन संग प्रकृति के बारे मा तो तंय सोंच।
एकात ठन पेड़ ला धरती मा तो तंय खोंच।।
गिरत हे पानी गजब लगाओ तुम रूखराई।
इही मा हावै संगी तोर हमर सबके भलाई।।
झिल्ली प्लास्टिक अब आज ले तंय बिसार।
पर्यावरण संग नहीं ते माटी हो जही बेकार।।
नशा खोरी ला तुम कर दो सब अपन भंग।
पुरखा के बनाए संस्कृति के तुम चलौ संग।।

लक्ष्मीनारायण सेन
खुटेरी गरियाबंद
छत्तीसगढ़


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