Breaking News

@कविता@ढूँढ सको तो ढूँढ लो…

Share


हर रात के पीछे सवेरा छुपा होता है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो!
हर बेगाने के पीछे अपना छिपा होता है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो!
हर गम के पीछे ख़ुशी छुपी होती है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो!
हर असफलता के पीछे सफलता छुपी होती है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो!
हर पतझड़ के पीछे बसंत छुपा होता है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो!
हर कमजोरी के पीछे ताकत छुपी हुई होती है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो!
हर गरीबी के पीछे अमीरी छुपी होती है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो
हर खान के नीचे कोई खनिज पदार्थ होता है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो!
हर निराशा के पीछे आशा छुपी हुई होती है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो!
हर भजन के पीछे भगवान छुपा हुआ होता है
ढूंढ सको तो ढूंढ लो!
शामलाल कौशल
रोहतक
हरियाणा


Share

Check Also

संपादकीय@ समान नागरिक संहिता : संवैधानिक संकल्प सामाजिक संवाद और राजनीतिक चुनौती

Share छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) का प्रारूप तैयार करने के …

Leave a Reply