
अमेरिका और इजरायल की इस युती के मानसिक असंतुलनों की सनक ने इजरायल ईरान के युद्ध को जन्म दिया है। इस युद्ध का कोई तात्कालिक कारण नहीं है इस युद्ध के नेपथ्य में इसराइल और ईरान की दशकों की तैयारी रही है। इसराइल और अमेरिका ने ईरान को आतंकवाद का एक बड़ा केंद्र निरूपित किया है और इजरायल ने आरोप लगाया है कि ईरान पिछले दो दशकों से इसराइल के विरुद्ध छद्म युद्ध करता आ रहा है उसने पर्दे के पीछे रहकर हिज्बुल मुजाहिदीन, हमास और हुती आतंकवादियों को लगातार आर्थिक,सामरिक और रणनीतिक मदद करता आ रहा है और हिजबुल हमास और हूती आतंकवादी संगठनों नें लगातार इसराइल पर हमले करके हजारों इसराइलियों की हत्या भी की हैं। इसके साथ ही इसराइल के कई ठिकानों को नष्ट किया है। इसराइल और अमेरिका लगातार ईरान को परमाणु बम ना निर्मित करने और परमाणु संधि करने के लिए समय ब समय चेतावनी देते आ रहे हैं। इन सब में उल्लेखनीय है कि डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार अमेरिका राष्ट्रपति बनने के बाद इसराइल ज्यादा आक्रामक होकर गाजापट्टी तथा फिलिस्तीन पर आक्रामक हमले कर उसे समूल नष्ट करने की प्रक्रिया में जुट गया है। इसराइल और ईरान की लड़ाई की पृष्ठभूमि में ईरान द्वारा अपने पास परमाणु ईंधन संग्रहित करने उसे परमाणु बम बनाने की प्रक्रिया अपनाने, लगातार मिसाइल निर्माण करने और खतरनाक आतंकवादियों को संरक्षण समर्थन एवं आर्थिक मदद देने की रही है। जिसकी भयानक परिणीति यह रही कि तेरा जून 25 से इजरायल ने ईरान के परमाणु केंन्द्रों, लगभग 12 परमाणु वैज्ञानिकों और लगभग 6 ईरान के टॉप सैनिक कमांडरों की हत्या कर दी है। तेहरान में ताबड़तोड़ हमले कर तेहरान को आधा बर्बाद कर दिया है। इजरायल द्वारा उनके समस्त परमाणु वैज्ञानिकों की हमले से हत्या करने के बाद ईरान को अपने परमाणु प्रोग्राम में बहुत बड़ा झटका लगा है। इजरायल ने ईरान के तमाम परमाणु केन्द्रों, न्यूज़ नेटवर्क अस्पतालों पर हमले किए हैं। अब जवाब में ईरान भी अपने नेता अयातुल्लाह खेमनई के नेतृत्व में लगभग 200 मिसाइल से इसराइल के तेलअबिब शहर में आक्रमण कर तेल तथा गैस के भंडारों अस्पतालों एवं स्टॉक एक्सचेंज की बिल्डिंग को तबाह कर दिया है। इधर ताजा जानकारी के अनुसार इसराइल ने ईरान के हेवी वॉटर रिएक्टर पर हमला कर दिया और इसके परिणाम स्वरूप हेवी वॉटर रिएक्टर तबाह हो गया है यह हेवी वॉटर रिएक्टर न्यूक्लियर प्रोग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिसके जवाब में ईरान ने इजरायल के चार शहरों जिसमे तेल अबिब,बिशेबा,रमतगढ़ और होलोंन शहर में लगभग 30 से 35 टारगेटेड मिसाइल से हमला बोल दिया है इजरायल की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 176 लोग घायल हुए हैं जिसमें 6 लोग गंभीर बताई जाते हैं इसराइल के प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया है कि ईरान ने जानबूझकर उसके नागरिक ठिकानों, अस्पतालों और स्टॉक एक्सचेंज पर मिसाइल का निशाना बनाया है इजरायल ईरान युद्ध अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति ने कनाडा में जी 7 सम्मेलन को अचानक छोड़कर अमेरिका वापस लौटने की रणनीति बनाकर इसराइल को युद्ध में समर्थन देने की बात कही है वैसे तो डोनाल्ड ट्रंप अपने राष्ट्रपति पद के दूसरे कार्यकाल में अति अविश्वसनीय रहे हैं। उनकी अविश्वसनीयता का सबसे बड़ा उदाहरण उनके चुनाव में अरबों डॉलर खर्च करने वाले व्यापारी मित्र एलन मस्क को व्यापार में कोई भी लाभ न देकर अपना दुश्मन बना लिया है, दूसरी तरफ भारत के पहलगाम हमले में 27 भारतीयों की निर्मम हत्या करने वाले मास्टरमाइंड तथाकथित फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लंच पर आमंत्रित किया है। यह पहला मौका है जब पाकिस्तान के किसी फौजी प्रमुख को अमेरिका के राष्ट्रपति ने लंच या डिनर पर आमंत्रित किया है इसके पहले अयूब खान,जिया उल हक एवं परवेज मुशर्रफ आमंत्रित किये जा चुके हैं। राष्ट्र प्रमुख को डिनर या लंच पर आमंत्रित करना एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है पर एक फौजी प्रमुख जो राष्ट्र प्रमुख नहीं है और पहलगाम आतंकवाद की पृष्ठभूमि में मास्टरमाइंड को आमंत्रित करना एक तरह से आतंकवाद को समर्थन देना है। इसी दौरान भारत के प्रधानमंत्री को भी डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका आमंत्रित किया था पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी दृढ़ता के साथ अपने निर्धारित कार्यक्रम को छोड़कर अमेरिका जाने से साफ इनकार कर दिया है यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता भी है।
वैसे पाकिस्तान के फौजी प्रमुख असीम मुनीर रोटी और बोटी के चक्कर में ईरान के के साथ अमेरिका से हाथ मिलाकर बहुत बड़ा धोका किया है। समाचार एजेंसी के अनुसार असीम मुनीर ने पाकिस्तान के दो एयर बेस को अमेरिका को इस्तेमाल करने की पेशकश की है जो कि ईरान से बहुत कम दूरी पर स्थित है और अमेरिका के फाइटर प्लेन वहां से उड़कर ईरान पर आक्रमण करेंगे। यह तो बहुत ही स्पष्ट है कि पाकिस्तान आजादी के बाद से आतंकवादियों का केंद्र रहा है और धर्म के नाम पर पाकिस्तान की स्थापना ही की गई है तो उससे वफा की उम्मीद करना बेकार है किंतु अमेरिका जैसे बाहुबली देश के सर्वे सर्वा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार टैरिफ को बढ़ाकर न सिर्फ पूरी दुनिया को धोखा दिया बल्कि भारत के साथ भी असीम मुनीर को लंच पर बुलाकर बड़ी धोखेबाजी की है। अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी सीएनएन के अनुसार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन स्पष्ट रूप से अमेरिका और इसराइल को चेतावनी दे दी है कि यदि ईरान में रह रहे 350 रूसी नागरिकों को किसी भी बम या मिसाइल से नुकसान पहुंचेगा तो इसराइल और अमेरिका को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे रूस अपने नागरिकों को ईरान से वापस नहीं बुला रहा है। दूसरी तरफ चीन ने भी ईरान का खुलकर समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इन परिस्थितियों में डोनाल्ड ट्रंप डर कर पीछे हट गए हैं और उन्होंने इसराइल के साथ ईरान पर हमला करने का निर्णय स्थगित कर दिया है उन्होंने इसराइल को समझाया है कि जरा रुकिए अमेरिका कुछ दिनों बाद ईरान पर हमला करने की योजना बनाएगा। अमेरिका की इस घोषणा के बाद इजरायल बड़ी मुसीबत में फसता नजर आ रहा है। इसराइल हमास युद्ध पिछले 1 वर्षों से ज्यादा समय से चल रहा है और उसे हमास हुती और लेबनान के हमले का सामना करना पड़ रहा है अब ईरान पूरी तरह से युद्ध करने की मानसिकता में आ गया है वह किसी भी तरह समझौते की बात नहीं करना चाहता यह अलग बात है कि ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के मध्य ईरान की विदेश मंत्री ने कहा है कि उनका देश फ्रांस जर्मनी ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ जिनेवा के परमाणु वार्ता में शामिल होगा न्यूज़ एजेंसी रायटर्स के अनुसार जर्मनी फ्रांस और ब्रिटेन की विदेश मंत्री पहले यूरोपीय संघ के सीनियर राज्य नई काजा कालास के साथ जेनेवा मैं जर्मनी के स्थाई मिशन में मुलाकात करेंगे और परमाणु संधि पर ईरान के संदर्भ में गंभीर विमर्श किया जाएगा। पर इसके अलावा ईरान ने इसराइल के प्रति अपने रुख को स्पष्ट करते हुए लगातार ताबड़तोड़ हमले इसराइल पर कर रहा है यह तो तय है कि ईरान इराक युद्ध वैश्विक परमाणु युद्ध का कारण हो सकते हैं पर इस विश्व युद्ध को रोका भी जा सकता है, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के आतंकियों को ठिकानों पर हमला करके पाकिस्तान के निवेदन तथा अनुनय विनय पर ऑपरेशन सिंदूर को स्थापित कर दिया है और उनकी किसी भी आतंकवादी घटना को एक्ट आफ वर्क मानकर पाकिस्तान पर हमला कर सकता है। ठीक इसी तरह भारत के प्रधानमंत्री ने त्र7 सम्मेलन में युद्ध में बातचीत से हल निकालने की पेशकश की है और यह बहुत ही सटीक तथा सामूहिक प्रयास से संभव हो सकता है।
संजीव ठाकुर,
रायपुर छत्तीसगढ़
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