देश में कोविड-19 के 257 मामलों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक ने स्थिति को लेकर बैठक की जिसमें राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र,आपात चिकित्सा राहत प्रभाग, आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ,भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद व केंद्र सरकार के अस्पतालों के विशेषज्ञ भी शामिल थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय स्थिति पर बारीक नजर रखे हुए है तथा सुनिश्चित कर रहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के उचित उपाय किए जाएं। एशिया में सिंगापुर,हांगकांग,चीन व थाईलैंड में इस दफा ओमिक्रोन के नये वेरिएंट जेएन1 व उसके सब-वेरिएंट एलएफ 7 व एनबी1.8 जिम्मेदार बताया जा रहा है। 2023 में इसे पहली बार देखा गया था जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट घोषित किया था जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पाया जा चुका है। सिंगापुर में मरीजों के अस्पताल में भर्ती के मामलों में बीते हफ्ते से 30 प्रतिशत ज्यादा मामले तो हांगकॉंग में इक्यासी गंभीर मामले सामने आए हैं। हालांकि थाईलैंड व चीन ने मरीजों की संख्या का खुलासा नहीं किया है परंतु हाई अलर्ट जारी किया जा चुका है। बूस्टर डोज लेने की सलाह भी दी जा रही है। चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन ने अंदेशा जताया है कि कोविड की लहर तेजी से बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नया वेरिएंट न तो बहुत खतरनाक है, न तेजी से फैल रहा है। मगर गंभीर बीमारियों वाले मरीज व कमजोर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है। इसके लक्षणों में खांसी,सिर दर्द,बुखार,आंखों में जलन, जुकाम,दस्त/उल्टियां,मांस-पेशियों में ऐंठन के साथ ही स्वाद या गंध न आना भी शामिल है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोविड-19 के चपेट में आकर 2020-21 के दौरान पांच लाख से ज्यादा मौत हुई थीं। हालांकि इस आंकड़े को लेकर संदेह रहा है क्योंकि अंदेशा है,संक्रमण ने इससे कहीं ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुलाया था। मगर जिस तेजी से इसके बढऩे की खबरें आ रही हैं, उन्हें देखते हुए सरकार को अधिक सतर्कता बरतनी होगी। विशेषज्ञों को चेतावनी देने से ज्यादा जरूरी है,संक्रमण की चपेट में आ रहे देशों से आने वाले यात्रियों व सामान की सतर्कतापूर्वक जांच हो। उन्हें क्वारेंटाइन किया जाए। अपनी आबादी को देखते हुए हमें संक्रमण को लेकर चौकस रहना होगा। महामारी की बड़ी कीमत चुका चुके देश व देशवासियों को इस खतरे से आगाह करने में कोताही करना उचित नहीं कहा जा सकता।
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