
हमारे देश में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों के द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है। इस गणतंत्र दिवस को मनाए जाने का मुख्य कारण हमारे संविधान दिवस को याद करके इसके निर्माताओं का धन्यवाद करने के लिए ही है। भारतीय संविधान को 26 जनवरी, 1949 को अपनाया गया और इसे 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया। संविधान का मतलब होता है कुछ नियम और कायदे जो देश चलाने के लिए जरूरी होते हैं। भारत का संविधान नागरिकों के अधिकारों तथा कर्तव्यों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। भारत का संविधान संविधान सभा के सदस्यों के द्वारा बनाया गया था जिसके अध्यक्ष डॉ बी आर अंबेडकर थे। भारत का संविधान लोकतंत्र का सबसे बड़ा लिखित संविधान है इसके 251 पृष्ठ हैं। इसे श्री प्रेम बिहारी नारायण राय ज्यादा ने अपने हाथ से लिखा था।
भारतीय संविधान मैं धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद, समानता तथा बंधुत्व की बात कही गई है! भारतीय संविधान के अनुसार देश में लोकतंत्र की पार्लियामेंट्री सिस्टम आफ गवर्नमेंट को अपनाया गया है जिसके मुताबिक हर 5 साल के बाद केंद्र तथा राज्य सरकारों के लिए मतदाताओं द्वारा अपनी पसंद की सरकार चुनी जाएगी। चुनाव का कार्य स्वतंत्र चुनाव आयोग द्वारा करवाया जाएगा। संविधान के अनुसार देश राज्यों का संघ होगा जिसमें प्रदेशों में राज्य सरकारें तथा केंद्र में केंद्रीय सरकार होगी। केंद्र तथा राज्य सरकारों के कार्य तथा अधिकार का बटवारा संविधान में बताया गया है।
भारतीय संविधान के मुताबिक लोगों के कुछ मौलिक अधिकार होंगे जिनको प्राप्त करने के लिए देश के लोग स्वतंत्र न्यायपालिका का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं, संविधान में निर्देशक सिद्धांतों का वर्णन किया गया है, इन सिद्धांतों में कुछ ऐसे कार्य हैं जो कि सरकारों के द्वारा लोकहित तथा देश की सुरक्षा के लिए लोगों से बिना कुछ लिए किए जाएंगे जैसे शिक्षा, चिकित्सा, यातायात, देश की सुरक्षा आदि।
संविधान के अनुसार भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के निम्नलिखित चार अंग होंगे
1 विधायिका
2 कार्यपालिका
3 न्यायपालिका
4 मीडिया
विधायक का का काम देश को चलाने के लिए कानून बनाना, बजट पास करना आदि होगा।
कार्यपालिका का काम केंद्र में प्रधानमंत्री तथा मंत्री परिषद, राज्यों में मुख्यमंत्री तथा मंत्री परिषद के द्वारा शासन व्यवस्था चलाना होगा। राज्यों में संविधान के मुताबिक ठीक काम हो रहा है या नहीं इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए केंद्र सरकार के द्वारा प्रत्येक राज्य में मुख्यमंत्री की सलाह के मुताबिक गवर्नर नियुक्त किया जाएगा जो कि समय समय पर राज्य की स्थिति के बारे में अवगत कराता रहेगा लेकिन सक्रिय राजनीति में हिस्सा नहीं लेगा। न्यायपालिका संविधान की व्याख्या करेगी, केंद्र तथा राज्यों में झगड़ा होने की स्थिति में फैसला करेगी, अगर लोग निचली अदालतों के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट उनके मामलों का भी निपटारा करेगी। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है मीडिया। किसी देश का मीडिया हस्तक्षेप के बिना देश से संबंधित सूचनाओं को निष्पक्षता,निडरता तथा प्रलोभन के व्यक्त करता रहेगा। समय-समय पर सरकार के कार्यों तथा नीतियों की समीक्षा करता रहेगा तथा सरकार से जनहित में सवाल भी पूछता रहेगा।
इस पृष्ठभूमि को लेकर हमारे देश में हर साल 26 जनवरी को केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों के द्वारा गणतंत्र दिवस बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
सवाल पूछा जा सकता है कि हमारे देश में जिन बातों को लेकर संविधान लिखा गया था और उसके मुताबिक देश को चलाने की बात कही गई थी क्या वह सब कुछ उसी के मुताबिक हो रहा है। कोई संदेह नहीं कि भारतीय लोकतंत्र अब तक संविधान के मुताबिक ही चल रहा है। लेकिन पूर्ण तौर पर देश इसके मुताबिक चल रहा है या नहीं यह विवाद का विषय है। समय समय पर विभिन्न दलों की सरकारें जन कल्याण के नाम पर इसमें संशोधन करती रही है, हालांकि संविधान निर्माताओं ने भविष्य में होने वाली सभी संभावित बातों को ध्यान में रखकर इसे लिखा था। इसमें कोई शक नहीं कि जिस दल की भी सरकार आई उसने संविधान की अपने ढंग से व्याख्या की और इसका इस्तेमाल किया। संविधान के अनुसार स्थापित स्वायत्त संस्थाएं जैसे सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट,ईडी आदि का अपने राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए दुरुपयोग किया। कांग्रेस प्रशासन में सुप्रीम कोर्ट ने… सीबीआई को… पिंजरे का तोता… कहकर इसके दुरुपयोग की बात कही थी! वर्तमान सरकार के समय उपर्युक्त स्वायत्त संस्थाओं का अपने विरोधी राजनीतिक दलों के खिलाफ खूब प्रयोग किया जा रहा है। हमारे देश में यूं तो न्यायपालिका स्वतंत्र है लेकिन कभी-कभी इसके निर्णय इसके स्वतंत्र होने पर लोगों के मन में शक पैदा करते हैं। न्यायपालिका में फैसला करने में कई बार 15 से 20 वर्ष लग जाते हैं, कुछ मामलों में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बदबू भी आती है।
जहां तक विधायका की बात है बहुत बार यह ठीक काम नहीं करती। संसद तथा विधानसभाओं में जनप्रतिनिधि शोर शराबा करते हैं, अध्यक्ष की अनुमति के बिना बोलने की कोशिश करते हैं, बहुत सारे कानून बिना बहस के पास हो जाते हैं। बहुत बार शोर शराबे के कारण संसदीय कार्य बिना किसी कार्रवाई के ही स्थगित करना पड़ता है। कई बार ऐसे होता है कि कुछ मामलों में सुप्रीम कोर्ट सरकार के खिलाफ फैसला देता है और सरकार बहुमत के सहारे संसद में उसके खिलाफ नया कानून पास करके सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को ही निष्कि्रय कर देता है। यह तो सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई का मजाक समझा जाएगा। बहुत बार केंद्र के इशारे पर राज्यों के गवर्नर राज्य सरकार के काम को ठीक तरीके से नहीं होने देते। हमारे देश में धर्मनिरपेक्षता के अनुसार देश का प्रशासन चलाया जाता रहा है। लेकिन इन दिनों में यह देखा गया है कि विभिन्न राजनीतिक दल जीतने के लिए धर्म का सहारा लेते हैं, विभिन्न धर्मों में फूट डलवा कर मतदाताओं को भ्रमित करते हैं। देश में चुनाव स्वतंत्र तथा निष्पक्ष होने चाहिए लेकिन आजकल चुनाव आयोग की भूमिका तथा ईवीएम पर ही संदेह प्रकट किये जा रहे हैं। हमारी चुनाव प्रणाली में आजकल विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव जीतने के लिए मतदाताओं को मुफ्त की रेवडç¸या बांटने का जो सिलसिला शुरू हुआ है उसे राजनीतिक भ्रष्टाचार ही कहा जाएगा। हमारे संविधान के अनुसार देश में समानता होनी चाहिए जो कि देखने को नहीं मिलती। हमारे देश में धन तथा संपत्ति का बटवारा बड़े-बड़े कॉरपोरेटियों के पक्ष में है और गरीब लोगों को सरकार 5 किलो अनाज मुफ्त में देकर उनका पेट पाल रही है जबकि चाहिए था यह कि देश में रोजगार ज्यादा मिलता, कीमतों पर नियंत्रण होता, गरीबी दूर होती। संविधान के निर्देशक सिद्धांतों के विपरीत शिक्षा, चिकित्सा, पीने का पानी, यातायात आदि मुफ्त में सरकार के द्वारा लोगों के लिए उपलब्ध करने के बदले में निजी क्षेत्र के द्वारा ऊंचे ऊंचे भावों के ऊपर लोगों को दिए जा रहे हैं।
जहां तक भारतीय लोकतंत्र में मीडिया की बात है इसकी स्वतंत्रता तथा निष्पक्षता कहीं देखने को नहीं मिलती। चाहे प्रिंट मीडिया हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो ये सब सच्चाई बयान नहीं करते। जो कुछ सरकार इनको कहती है वहीं कुछ यह लोगों को बताते हैं। मीडिया सरकार से कोई सवाल नहीं पूछ सकता, सरकारी नीतियों की आलोचना नहीं कर सकता। मीडिया का स्वतंत्र ना होना देश की आर्थिक, राजनीतिक तथा सामाजिक स्थिति का ठीक ठीक ज्ञान प्राप्त करने में कठिनाई पैदा करता है। मीडिया के ऊपर बड़े-बड़े कॉरपोरेटियों ने कब्जा कर रखा है जो कि सरकार की नीतियों का समर्थन करते हैं और उसके बदले में सरकार से किसी न किसी कार्य को प्राप्त करके पुरस्कृत होते हैं। यही कारण है कि समय-समय पर सरकार के ऊपर संविधान की अवहेलना करने का आरोप लगाया जाता है।वह बात अलग है कि सत्ता पक्ष तथा विपक्ष एक दूसरे के ऊपर संविधान की अवहेलना करने का आरोप तथा प्रत्यारोप लगाते रहते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि सत्ता पक्ष सदन में अपने बहुमत का दुरुपयोग तो करता ही है।
बेशक सत्ता पक्ष तथा विपक्ष संविधान के मुताबिक अपना काम ना कर रहे हो लेकिन इसके बावजूद भी कुल मिलाकर देश का प्रशासन संविधान के मुताबिक ही चल रहा है। इसका बड़ा सबूत यह है कि हम अपना गणतंत्र दिवस हर साल बहुत शान और शौकत से मनाते आ रहे हैं। जिस भावना को लेकर हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान को बनाया था अगर उस पर ईमानदारी से अमल किया जाए तो भारत के विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को दुनिया की नजर में और भी ज्यादा इज्जत से देखा जाएगा।
प्रोफेसर शाम लाल कौशल
रोहतक-124001( हरियाणा)
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