
प्रिया श्वेता के कमरे में गयी। देखा, श्वेता खिन्न चेहरे लिये बिस्तर पर लेटी हुई थी। नजरे सिलिंग फैन पर थी। नजरे इतनी एकटक थी, मानो वह फैन की राऊँडिंग मूवमेंट गिन रही हो। मुस्कुराती हुई प्रिया बोली- क्यों…? क्या बात है श्वेता, क्या सोच रही हो ?
प्रिया के सवाल पर श्वेता मुस्कुरा दी। बोली-कुछ नहीं बुआ। बस ऐसे ही।
न..न..! कुछ तो बात जरूर है। आखिर मैं तेरी बुआ हूँ। इसी घर-परिवार की बेटी हूँ। तेरे बाप की बहन हूँ। बता ही डालो न।
प्रिया की बातों को श्वेता अधिक देर तक इधर-उधर न कर सकी।
बुआ। सब ठीक-ठाक है। सब कुछ अच्छा है। लड़के में भी कोई कमी नहीं है,बस काला है। कहते हुए श्वेता एकदम चुप हो गयी।
प्रिया अपनी हँसी रोकते हुए बोली- बस ! तो सुन। आँखों की पुतली काली होती है। होती है न ?
हाँ। होती है। श्वेता अपने बालों पर उंगलियाँ चलाने लगी।
बाल भी काले होते हैं न ? प्रिया की नजरें श्वेता के बालों पर थीं।
हाँ ! बिल्कुल !
कोयल भी न ?
हाँ, बुआ। कोयल तो काली होती ही है।
राम और कृष्ण भी तो….? प्रिया के बातें सुनते ही श्वेता के मुखमंडल पर मुस्कान तैर गयी।
टीकेश्वर सिन्हा गब्दीवाला
घोटिया-बालोद छत्तीसगढ़
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