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कविता @बाकी भोले देखेंगे

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कर्म किए जा बस दुनिया में,
बाकी भोले देखेंगे,
मन से बस तू पावन बन जा,
मुस्कानों के फूल झरेंगे।
कर्म किए जा …..
सुबह-सवेरे जो भोले का,
नाम जुबां से लेता है,
मन का मंदिर खुल जाता है,
वो भोले का होता है।
कर्म किए जा ….
अपना-अपना तो सब करते,
काम नया नहीं होता है,
जो बनता दुखियों का भागी,
काम नया वहीं होता है।
कर्म किए जा …..
चलते-चलते जो थम जाता,
समय नहीं रुक पाता है,
लिखा हुआ जो भाग में तेरे,
वही तुझे मिल पाता है।
कर्म किए जा …..
आओ जीवन की धारा को,
मस्ती में बह जानें दें,
मिल जाएं जब भोले हमको,
भोले-भोले गानें दें।
कर्म किए जा …..
कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी
इंदौर (मध्यप्रदेश)


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