कोतवाल बन जाये तो हो जाये कल्यान,मानव की तो क्या चले डर जाये भगवान?
जिस समय करेगे धारण वर्दी ख़ुद आ जायेगी ऐंठ-अकड़-सख़्ती-बेदर्दी!
लेख रवि सिंह:- पुलिस सर्वव्यापी है:पुलिस आकाश पाताल कही भी जा सकती है, ऐसा सभी लोग कहते है कहा जाता है की पुलिस से बच के कहाँ जायेगा? पुलिस तुम्हे ढूंढ ही लेगी, अगर राम भगवान् के ज़माने में पुलिस होगी तो उसके इंस्पेक्टर पक्का है हनुमान जी रहे होते, अभी कुछ दिन पहले पुलिस ने अहम् सुराग ढूंढ लिया था किसी चैट कांड का, इसका मतलब पुलिस यदि आवश्यकता पड़े तो भविष्य और भूत काल की भी यात्रा कर सकती है, इसका प्रमाण किसी अख़बार में छपी एक खबर से मिल सकता है जिसमें एक व्यक्ति एक साल बाद बताता है की जिस नम्बर से चैट वायरल हुआ था वह एक पुलिस वाले का था, तो फिर एक पत्रकार पर मुकदमा क्यों दर्ज हुआ?
पुराणों में पुलिस को रक्षिन कहा गया है अर्थात जो रक्षा करे, पुलिस एक ऐसा शब्द है जिसके श्रवण मात्र से मन में शंशय उत्पन्न हो जाता है, पुराणों में पुलिस को रक्षिन कहा गया है अर्थात जो रक्षा करे, परन्तु हम भारतीय जो अपनी हर समस्या का निदान पुराणों में ढूँढने के अभ्यस्त बन चुके है, पुराणों से पुलिस शब्द की परिभाषा नहीं ढूंढ पाए और नतीजा हमें आधुनिक पुलिस के रूप में मिला है, वैसे तो पुलिस दिखने में हमारे ही जैसा होती है पर उसकी कुछ अलौकिक शक्तिया उन्हें विशिष्ट बना देती हैं, जो कुछ अभी तक अपने अनुभव किया उसी से मैं जान पाया हूँ की पुलिस के बारे में आपसे बाँट रहा हूँ, पुलिस का शरीर मनुष्य का ही होता है पर वह शक्तिमान की तरह एक विशिष्ट कवच या अगर पुलिस बुरा न माने तो वर्दी पहनती है, इस वर्दी को भारत में खाकी नाम से जाना जाता है, विदेश में भी कोई नाम होगा है पर अभी हम अपने देश की बात करे तो बहतर होगा, इस खाकी के अतिरिक्त पुलिस के हाथ में मनुष्य जाति का सबसे शाश्वत अस्त्र या शश्त्र जो भी आप पसंद करते है जिसे आजकल लोग डंडा कहते हैं, इन दो शक्तियों के बल पर पुलिस सर्वशक्तिमान बन जाती है।
इस सबसे इतर पुलिस की वर्दी की महिमा तो अपरम्पार है बिना वर्दी के यदि एक पुलिस जा रहा है तो आप उससे झगडा भी कर सकते है और गाली भी दे सकते है थोडा और उत्साही हैं तो झापड़ मार भी सकते है पर यदि पुलिस ने अपना दिव्य वस्त्र (मेरा मतलब वर्दी) धारण कर ली तो फिर आप कोई हों आपकी हिम्मत नहीं पड़ेगी की कुछ चुन-चन कर दें, इस वर्दी के प्रताप से पुलिस बिना भाड़े के ही किसी भी बस में यात्रा कर सकती है और किसी भी दुकान से कोइ सामान ले सकती है मेरा मतलब एक बार तो ले ही सकती है मित्रो इसे गुंडई मत कहना, इसे तो दबंगई कहते है जो वर्दी धारण करते ही शरीर में उत्पन्न हो जाती है, ये जो वर्दी है, कई संस्कारों के बाद प्राप्त होती है और उसपे कुछ कूट वाक्य लिखा रहता है जिससे की उसमें शक्ति आ जाती है यह वर्दी कभी मैली नहीं होती है, भले ही दागदार हो जाये, अजी! जब से सर्फ़ एक्सेल आया है तब से तो दाग अच्छे है न? वर्दी में कई जेबें होती है जिनकी तह कहाँ तक जाती है, कोई आज तक जान नहीं पाया है, इसमें कुछ भी डाल दीजिये, सिवाय उस पुलिस के कोई भांप भी नहीं सकता की सामान कहाँ गया, अभी मैंने सुना है की इस गुण से प्रभावित होकर विज्ञानियों की टीम ब्लैक- होल पर नया सिद्धांत देने जा रही है, जिसमे कुछ भी चला जाये तो बाहर नहीं आ सकता है, पुलिस आ सकती है पर वो सिर्फ पुलिस को पता है की ये कैसे होता है विज्ञानी नहीं जानते हैं।
पुलिस की दूसरी दिव्य शक्ति उसका डंडा है उसका डंडा किसी जादूगर के डंडे से कम नहीं है जादूगर के डंडे से तो चीज लगता है की ‘पैदा होती हैं” पर अगर ऐसा होता तो जादूगर या मदारी खेल दिखने के बाद ये क्यों कहता की जो कुछ भी आपकी श्रद्धा हो चढ़ा दीजिये? पर पुलिस का डंडा इन सबसे इतर सचमुच में ही चीजें पैदा कर सकता है जैसे अगर पुलिस सब्जी की दुकान पे डंडा पटक दे तो एक टाइम की सब्जी पोलीथिन में भर के निकल जाती है, अगर पुलिस चाय की दुकान में डंडा पटक दे तो उसके लिए एक गिलास चाय निकल आती है और पान की दुकान में पटक दे तो पान उत्पन्न हो जाता है, जिसे पुलिस शीघ्र ही भक्षण कर लेती है अगर पुलिस यही डंडा किसी गाड़ी पर पटक दे तो उससे नोट निकल आते हैं, मैंने ये करिश्मा सड़क पर कई बार देखा है पुलिस के इस डंडे में अद्भुत शक्तिया समायी है जैसे ये किसी भी चीज को रोक सकता है, कोई भी गाड़ी हो, ट्रक हो, बस हो और या कोई पैदल ही क्यों न हो? डंडा आगे आया की फिर आगे नहीं बढ़ सकते, एक बार एक ट्रक वाला आगे बढ़ गया था तो उसकी ट्रक जो रायपुर से उड़ीसा जा रही थी, अगले थाने से आगे नही बढ़ सकी, अभी पुलिस ने धरती पर चलायमान हर वस्तु पर डंडे से रोक लगाने का सफल परीक्षण कर लिया है, अब ये मत कहना की रेलगाड़ी पर नहीं किया है, अजी! पुलिस चाहे तो रेलगाड़ी भी डंडे से रोक सकती है पर सरकार ने पुलिस से ऐसा न करने की विनती की है।
बुरा ना मनो विचार है

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