मुख्यमत्री प्रमोद सावत ने किया बड़ा दावा
नई दिल्ली, 31 जुलाई 2022। एक ससदीय समिति ने गोवा की समान नागरिक सहिता (यूसीसी) की समीक्षा की है और इसके कुछ सदस्यो को लगता है कि इसमे विवाह से सबधित कुछ पुराने और अजीबोगरीब प्रविधान है। गोवा की नागरिक सहिता इस तटीय राज्य के सभी निवासियो को उनके धर्म और जातीयता के बावजूद नियत्रित करती है। यह समीक्षा ऐसे समय मे की गई है जब देशभर मे एक समान नागरिक सहिता (यूसीसी) के क्रियान्वयन की बात चल रही है।
इस दौरान गोवा की समान नागरिक सहिता की विभिन्न सकारात्मकताओ का हवाला देते हुए मुख्यमत्री प्रमोद सावत ने कहा किपूरे देश मे यूसीसी को लागू करने के लिए यह एक माडल हो सकता है। भाजपा शासित कई राज्यो जैसे उाराखड और हिमाचल प्रदेश ने यूसीसी को लागू करने की मशा जताई है।
समाचार एजेसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा सासद सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता मे कानून और कार्मिक सबधी ससद की स्थायी समिति के सदस्यो ने जून मे गोवा का दौरा किया और इसकीसमान नागरिक सहिता का अध्ययन और समीक्षा की। सूत्रो ने कहा कि समिति की जिज्ञासा थी कि समान नागरिक सहिता को गोवा मे कैसे लागू किया जा रहा है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियो ने इन सवालो के भलीभाति जवाब दिए।
सूत्रो ने कहा कि यह देखा गया कि राज्य के अधिकाश लोग इससे काफी खुश और सतुष्ट है। उन्होने कहा कि हालाकि विवाह और सपçा के बटवारे से सबधित कानून मे कुछ अजीबोगरीब धाराए थी। ये बेहद पुरानी है और समानता के सिद्धात पर आधारित नही है।
बता दे कि समान नागरिक सहिता भाजपा के वैचारिक एजेडे मे प्रमुखता से शामिल है और पार्टी ने 2014 और 2019 के ससदीय चुनावो मे इस पर वादे किए थे। इससे पहले राज्यसभा मे एक प्रश्न के लिखित उार मे केद्रीय कानून मत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने विधि आयोग से इस मामले मे विभिन्न मुद्दो की जाच करने और सिफारिशे करने को कहा है। यूसीसी लागू की स्थिति मे विवाह, तलाक, गोद लेने, उाराधिकार और उाराधिकार जैसे मामलो मे एक कानून हो जाएगा। यह सभी नागरिको पर समान रूप से लागू होगा, भले ही उनके धर्म, जाति कुछ भी हो।
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