एजेंसी, लाहौर 26 जून 2022I पाकिस्तान ने साजिद मजीद मीर की गिरफ्तारी का कदम एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर निकलने की छटपटाहट में उठाया है। कार्यबल के अधिकारी धनशोधन और आतंकी वित्तपोषण के खिलाफ इस्लामाबाद द्वारा उठाए गए कदमों और इस संबंध में किए गए सुधारों की समीक्षा के लिए जल्द ही पाक का दौरा करने वाले हैं। पाकिस्तानी आतंक-रोधी अदालत ने 2008 के मुंबई आतंकी हमले के सजिशकर्ता साजिद मजीद मीर को आतंकवाद के वित्तपोषण के एक मामले में 15 साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई है। यह वहीं आतंकी है जिसे पाकिस्तान ने मृत घोषित किया था। मीर का नाम भारत से सबसे वांछित आतंकियों की सूची में शामिल है और उस पर 50 लाख डॉलर का इनाम भी है।
पाकिस्तान ने मीर की गिरफ्तारी का कदम एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर निकलने की छटपटाहट में उठाया है। कार्यबल के अधिकारी धनशोधन और आतंकी वित्तपोषण के खिलाफ इस्लामाबाद द्वारा उठाए गए कदमों और इस संबंध में किए गए सुधारों की समीक्षा के लिए जल्द ही पाक का दौरा करने वाले हैं। आतंकी वित्तपोषण मामलों से जुड़े वरिष्ठ वकील ने बताया कि साजिद मजीद मीर अप्रैल में अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है। अदालत ने उस पर चार लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया है। बता दें, पश्चिमी देशों को मीर की मौत के पाकिस्तानी दावे पर शुरू से ही शक रहा है।
अमेरिकी सूची में भी शामिल
साजिद मजीद मीर (44) अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) की वांछित आतंकवादियों की सूची में भी शामिल है। अमेरिका ने 26 नवंबर के मुंबई हमले में साजिद की भूमिका के लिए उस पर पांच लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम भी घोषित किया है। 2008 को हुए इस आतंकी हमले में छह अमेरिकी नागरिकों समेत 166 लोगों की मौत हुई थी।
2005 में फर्जी नाम से भारत आया
साजिद मीर को मुंबई हमलों का ‘प्रोजेक्ट मैनेजर’ कहा जाता है। वह 2005 में फर्जी नाम से फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर भारत भी आया था। एफबीआई के मुताबिक, साजिद मीर ने कथित तौर पर 2008 और 2009 के बीच डेनमार्क में एक अखबार और उसके कर्मचारियों के खिलाफ आतंकवादी हमले की साजिश रची थी।
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