डॉ. मुश्ताक अहमद शाह की शायरी और कविताएं लोगों के दिलों को इसलिए छू रही हैं क्योंकि वे गहरी भावनाओं,जीवन के अनुभवों और मानवीय संवेदनाओं को सरल,सच्चे शब्दों में व्यक्त करते हैं। ऐसी शायरी और कविताएं अकेलेपन, दिल के दर्द, प्रेम, दोस्ती और जीवन की जटिलताओं को इस तरह उजागर करती हैं कि पाठक अपनी भावनाओं को उनमें महसूस कर …
Read More »संपादकीय
लेख@कागज-पत्तर ढीले और पहुंच का रुतबा
अपने यहां ऐसे भी दीवाने हैं जो कलाई पर घड़ी नहीं हेलमेट बांधते हैं। भारत में ट्रैफिक नियम उस प्रेमिका की तरह हैं जिनसे सब वादा करते हैं पर निभाता कोई नहीं। ट्रैफिक सिग्नल उस बुजुर्ग की तरह होता है जिसे सब सम्मान से देखते हैं, पर जिसकी मानता कोई नहीं। यहां सड़कों पर सबसे विश्वसनीय सहारा न तो हेलमेट …
Read More »लेख@सच को बरछी की नोक पर टांगने का जमाना
धृतराष्ट बोला-हे संजय,कलिकाल मेँ इक्कीसवी सदी के प्रारम्भ मेँ अपने राज्य हस्तिनापुर सहित इंद्रप्रस्थ अर्थात दिल्ली के बारे मेँ जानने को उत्सुक हूँ तुमने बीसवी सदी तक के हालत के जो डरावने रूह कपाने वाले दृश्य बतलाये उससे मेरी आत्मा लहूलुहान हो गई है। मैं स्वीकारता हूँ की जगदीश्वर श्रीकृष्ण के लाख प्रयास ओर शांति प्रस्ताव को मैंने अपने बेटे …
Read More »कविता@अपना गौरव याद न रखें तो…
अपने ही घर से कब कब भगाए गए हो,बिना कारण कहां कहां लतियाये गए हो,तुम्हारे विरुद्ध हुए अत्याचार की बातक्या तुम्हें कचोटता नहीं,इतिहास की अधूरी जानकारी परतू खुद अपने बाल क्यों नोचता नहीं,दोष तुम्हारा नहीं तुम्हारी शिक्षा का है,चमत्कारियों से मिल जायेइस झूठी प्रतीक्षा का है,क्यों महत्व नहीं दिया अपनी शिक्षा को,और महत्व दिया नहीं सामाजिक दीक्षा को,शिक्षा से दूर …
Read More »लेख@परमाणु वैज्ञानिक डॉ श्रीकुमार बनर्जी की पुण्यतिथि 23 मई 25 पर विशेष
परमाणु ऊर्जा और परमाणु सामग्री के क्षेत्र में अग्रणी डॉ. श्रीकुमार बनर्जी का जन्म 25 अप्रैल 1946 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 1967 में आईआईटी खड़गपुर से धातुकर्म इंजीनियरिंग में प्रौद्योगिकी स्नातक की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद 1968 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के प्रशिक्षण विद्यालय के 11वें बैच से उत्तीर्ण हुए। डॉ. बनर्जी ने भाभा परमाणु …
Read More »लेख@हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का अंतिम संस्कार
जब पूरी क्लास फेल होती है,तो सिस्टम अपराधी होता है… हरियाणा के 18 सरकारी स्कूलों में 12वीं का रिजल्ट शून्य प्रतिशत रहा, जो राज्य प्रायोजित शैक्षिक विफलता का संकेत है। यह केवल छात्रों की असफलता नहीं,बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की नाकामी है—जिसमें शिक्षक नहीं,संसाधन नहीं और जवाबदेही भी नहीं। सरकार को पहले से इन स्कूलों की हालत पता थी, फिर …
Read More »कविता@उसूलों का राही…
उसूलों पे चलने वाला कापाँव में पड़ जाता है छालाकर्ण बहिरा बन। जाता हैलव पे लटक जाता है तालादिल का सच्चा वो होता हैना होता है मन का वो कालाईष्या द्वेष की ना है फितरतसच्चा मन सच्चा दिलवालापाँव में ठोकर खा वो गिरतादिल में उम्मीदों को है पालापथ चाहे कितना मुश्किल होपार कर जाता कठिन सा नालाउसूलों पे चलने की …
Read More »कविता@उपेक्षित नारीःविधवा…
समाज की एक उपेक्षित नारीजनमानस कहते जिनको बेवादुर्भाग्य का प्रतीक समझते जिनकोजिनके साथ जुड़े तरह-तरह की भेवाइनके प्रति होते नकारात्मक भावऔर रूढç¸वादी विचारधारासामाजिक कार्यों से होती अलगावसब खुशहाली,पर्वों से होती किनाराजैसे उनकी परछाई या स्पर्श सेअशुभ लक्षण हममें भी घिर आयेगीज्यों हुए वह खुशियों से वंचितवैसे ही हमारे जीवन को भर जायेगीमुंडन,षष्ठी,विवाह हो चाहे अन्य कारजअमांगलिक सा बर्ताव होतीअछूत सा …
Read More »लेख@विलुप्त होती प्रजातियां:जीवन के अस्तित्व पर संकट की दस्तक
मनुष्यों की ही भांति जीव-जंतु और पेड़-पौधे भी इस धरती के अभिन्न अंग हैं लेकिन विडंबना यह है कि मनुष्य ने अपने स्वार्थों और तथाकथित विकास की दौड़ में इनके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई,शहरीकरण, औद्योगीकरण और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों के चलते वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासउजड़ चुके हैं और वनस्पतियों की कई प्रजातियां …
Read More »लेख@मनुज को मनुज ही क्यों खाये
मनुष्यता सच्चरित्र की कुंजी है जिसमें प्रेम,त्याग और समपर्ण की गाथा है जहाँ यह तीनों नहीं वहां समझो मनुष्यता नही पशुता है। पशुता में शाकाहारी और मांसाहारी पशु होते है,जो अपने अपने स्वभाव अनुसार भोजन ग्रहण करते है,मांसाहारी के समक्ष जो भी जीव जंतु आ जाए तो वह उसका भोजन होता है,जब भूख लगी वह उनका शिकार कर भोजन ग्रहण …
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