दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। आध्यात्मिक रूप से यह अन्धकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। भारत वर्ष में मनाए जाने वाले सभी पर्वों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। दीपोत्सव ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात हे भगवान …
Read More »संपादकीय
लेख@ दीपावली से जोड़ी पौराणिक कथाएं और औचित्य
दीपावली का त्यौहार संपूर्ण देश में बड़े ही हर्ष उल्लास और उत्साह से मनाया जाता है । यूं तो यह हिंदू धर्म से जोड़ा पर्व है। मगर देश भर के सभी धर्म इस त्यौहार को बड़ चढ़ कर मनाते है। दीपावली के त्यौहार से अनेकों पुराणिक कथाएं जोड़ी हुई है। दिवाली का त्यौहार दीपों,रोशनी का त्यौहार है । इस दिन …
Read More »कविता @मैं कैसे मनाऊँ दीवाली
महंगाई ने कर दिया है, मेरा जीना बुरा हाल।जुबां खामोश है, बदल गयी है मेरी चाल।।मैं कैसे दीवाली मनाऊं, कैसे मैं दीप सजाऊं।बढ़ती महंगाई की, तकलीफ़ मैं कैसे छिपाऊं।।रात्रि के अंधकार को, भला मैं कैसे भगाऊं।सूनी पड़ी है रसोई मेरी, मैं आंगन कैसे सजाऊं।।बढ़ती महंगाई से, मेरे लिए दिन भी रात हो गया है।इससे छुटकारा दिलाने वाला, वो राम कहाँ …
Read More »नरक चतुर्दशी पर विशेष @ यमराज के लिए दीपदान करने का पर्व
भारत में कार्तिक कृष्ण पक्ष में पांच पर्वों का जो विराट महोत्सव मनाया जाता है, महापर्व की उस श्रृंखला में सबसे पहले पर्व धनतेरस के बाद दूसरा पर्व आता है ‘नरक चतुर्दशी’। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाए जाने वाले पर्व ‘नरक चतुर्दशी’ नाम में ‘नरक’ शब्द से ही आभास होता है कि इस पर्व का संबंध भी किसी …
Read More »आज धनतेरस पर विशेष@ धनतेरस से प्रारंभ होता है दीपावली पर्व
दीपावली का प्रारम्भ धनतेरस से हो जाता है। धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस के दिन नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस का त्योहार दीपावाली पर्व के पहले दिन को दर्शाता करता है। यह त्योहार लोगों के जीवन में समृद्धि और स्वास्थ्य लाने के लिए माना जाता है और इसलिए इसे बहुत …
Read More »धनतेरस पर विशेष@ देवताओं को अमृतपान कराकर अमर किया था धन्वंतरि ने
@आयुर्वेद के भी जन्मदाता है धन्वंतरि जी…दीवाली से दो दिन पूर्व ‘धनतेरस’ नामक त्यौहार मनाया जाता है, जो इस वर्ष 29 अक्तूबर को को मनाया जा रहा है। धनतेरस के प्रचलन का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है। यह त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है तथा इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वन्तरि एवं …
Read More »कविता @ क्या लिखूँ भोले का नाम
हे भोले मेरे हे भोले मेरे,सब मंगल कर दो काम,छूट जाए ये भागा-दौडी,मिल जाए तेरा ही धाम।हे भोले मेरे …..श्वांसों की धारा में मेरे,मिल जाए तेरा ही नाम,होंठों से बस भोले निकले,और नहीं हो कोई काम।हे भोले मेरे …..सुबह शुरू हो भोले से बस,हो जाए फिर ऐसी शाम,शब्दों के एक-एक मोती से,लिखूं भोले तेरा ही नाम।हे भोले मेरे …जीवन में …
Read More »लेख@ बेरोजगारी का अस्पताल
भले ही आप शरीर से हट्टे-कट्टे, लम्बें – चौड़े, सुन्दर व उर्जावान रहो। पर आप अपने आप को तब तक पूरी तरह से स्वस्थ महसूस नहीं करेंगे जब तक आपके पास रोजगार का कोई जरिया न हो। यदि आपके पास कोई रोजगार नहीं होगा तो आज के इस जमाने में आपको लोग ताने मार – मारकर ही बीमार कर डालेंगे। …
Read More »कविता @ देवारी तिहार आवत हे…
हरियर हरियर लुगरा पहिरकेदाई बहिनी मन नाचत हेआरा पारा खोर गली मोहल्लासुवा गीत ल गावत हेसुग्हर संदेश के नेवता देवतदेवारी तिहार आवत हेघर अंगना कोठा कुरियापेरौवसी माटी म छबावत हेजाला जक्कड़ खोंदरा कुरियानिसैईनी चड़के झटावत हेलाली सफेद पिंवरी छुहीघर अंगना ल लिपावत हेकोल्लर कोल्लर माटी लाकेगईरी माटी ल मतावत हेओदरे खोदरे भाड़ी लचिक्कन चिक्कन चिकनावत हेघर मुहाटी के तुलसी चउंरामारबल …
Read More »लेख@ देशी खिलौनों की खत्म होती चमक
पंजाब के एक छोटे से कस्बे धनौला में पारंपरिक रूप से लकड़ी के खिलौने बनाने वाले सैकड़ों कारीगरों की आर्थिक बदहाली परेशान करने वाली है। दशकों से ये कारीगर बच्चों के लिए लकड़ी के ट्रैक्टर, बस, कम्बाइन, ट्रॉली आदि बनाते आ रहे हैं। पहले हजारों घरों के बच्चे इन खिलौनों से खेलकर खुश होते थे जिससे इन कारीगरों के बच्चों …
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