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संपादकीय

@ लेख@ सार्क की चुनौतियों का समाधान कैसे कर सकता है भारत ?

भारत अलग-अलग सार्क सदस्यों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है जिससे अधिक बहुपक्षीय सफलता मिल सकती है। कनेक्टिविटी और व्यापार पर बांग्लादेश के साथ भारत के हालिया प्रयासों ने सार्क की सीमित प्रगति के बावजूद द्विपक्षीय सहयोग में सुधार किया है। भारत सार्क की निर्णय लेने की …

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@लेख@ इतना भी अच्छा नहीं

बहुत ज्यादा अच्छा होना भी अच्छा नहींइससे लोग शराफत का नाजायज फायदा उठाते हैं।बहुत क्रोध करना भी कोई अच्छी बात नहींइससे बदनामी और ब्लड प्रेशर दोनों बढ़ते हैं।किसी चीज का ज्यादा लालच करना भी अच्छी बात नहींइससे आदमी का नैतिक पतन होने की बहुत संभावना है!हर काम में बहुत ज्यादा जल्दबाजी करना अच्छा नहींधीरे-धीरे रे मना धीरे-धीरे सब कुछ होए, …

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@तुलसी विवाह पर्व विशेष@ नारी की महत्ता व अस्तित्व को दर्शाता एकादशी पर्व

हमारे छत्तीसगढ़ में तीज-त्यौहारों का बहुत महत्व है। यहाँ अनेक प्रकार के तीज-त्यौहार मनाये जाते हैं। कार्तिक मास में दीपावली के बाद देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाता है, जिसे छोटी दीपावली भी कहते हैं। इस दिन माता तुलसी और श्रीहरि विष्णु जी का विवाह शुभ माना जाता है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के एकादश को देवउठनी एकादशी मनायी …

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लेख@ रेलवे के खोखले दावे

भारतीय रेल जैसे पहली सरकार में थी वैसा ही हाल आज भी है पहले ज्यादा पारदर्शिता थी अब ऑनलाइन इ टिकट बुकिंग का खामियाजा जनता को भुगतना पर रहा औऱ उसका अब लागत मूल्य से रेवेन्यू को जोड़कर आई आर आर यानि भाड़ा लागत मूल्य यानि इलेक्टि्रक, डीजल, मेंटेनेंस औऱ मैनपावर को लागत मूल्य में 50कम यानि नुकसान ही दिखाया …

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लेख@ महिलाओं के लिए खतरा बनी साइबर की दुनिया

इंटनेट इस्तेमाल करने वाली स्ति्रयों की बढ़ती तादाद एक सकारात्मक बदलाव है। लेकिन, इसने और अधिक संख्या में महिलाओं को वर्चुअल दुनिया में ख़तरों के जोखिम में डाल दिया है। हाँ, ऐसा लग रहा है कि महिलाओं के प्रति ऑनलाइन अपराध की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इनमें यौन उत्पीड़न, धमकाने, डराने बलात्कार या जान से मार देने की धमकियाँ देने, …

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@कविता @न बिछड़े कभी

पंछी का पंछीन बिछड़े कभीपतझड़ में भी कोई घरन उजड़े कभीहाथों की लकीरों मेंचाहे जो लिखा होधड़कने धड़कनों सेना बिछड़े कभीजिंदगी में दुख तोआते -जाते रहते हैंपर कांत की कांतन छूटे कभीपतझड़ में भीपत्ता शाख सेन टूटे कभीपंछी का पंछीन बिछड़े कभी।गरिमा राकेश गर्विताकोटा ,राजस्थान

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कविता@ ठंडी की धूप

मास है शरद ऋतु, सिहराती ठंडी हैरोम-रोम सिहरन,तन को कँपाती है।धूप है सुनहरी ये,मन को लुभाती हैठंड की है धूप,तन-मन को भाती है।धूप है सलौनी और बड़ी मस्तानी हैबाग में बहार आई लगती सुहानी है।फूल हैं खिलते अब कली मुस्काई हैठंड की धूप में रौनकता भर आई है।शीतल सुगन्ध ठंडी हवा चली आई हैतरु-तृण धरा सभी ओस से नहाई है।मोतियों …

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लेख@ दिशाहीन रूढि़वादिता और अंधविश्वास की डगर हेतु वैज्ञानिक शिक्षा ज्ञान का नवीन स्वरूप

भारतीय समाज एक बहुभाषी, बहु सांस्कृतिक,बहुजातीय,बहु धार्मिक समाज है। एक नजर में इसकी प्रगाढ़ता और इसके विराट स्वरूप को समझना अत्यंत कठिन है। भारतीय समाज की गहरी और विशाल संरचना को, उसके विभिन्न आयामों को समझना हमारे लिए अत्यंत आवश्यक भी है और अनिवार्य भी। हमारा समाज एक विशिष्ट और उत्कृष्ट समाज है, जो अनेक संस्कृतियों,रीति-रिवाजों, धार्मिक विश्वासों और जीवन …

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लेख@ अपराधियों का महिमामंडन एक चिंताजनक प्रवृत्ति

जब अपराध को ग्लैमराइज़ किया जाता है, तो यह एक मिसाल क¸ायम करता है जहाँ युवा अवैध गतिविधियों को सफलता और मान्यता के मार्ग के रूप में देखते हैं, जिससे सामाजिक नैतिकता प्रभावित होती है। ऐसी फç¸ल्में जो अपराधियों को प्रसिद्धि या विलासिता प्राप्त करते हुए दिखाती हैं, युवाओं को अपराध को एक व्यवहार्य जीवन शैली के रूप में देखने …

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@कविता@चल तू लक्ष्य का संधान कर

चल तू लक्ष्य का संधान करइस समय को बर्बाद मत करये समय नहीं आएगा लौटकरअपने सपने को जरा याद करचल तू लक्ष्य का संधान कर।अपने हौसले को बुलंद करसब कुछ तुझे हासिल होगामेहनत पर जरा विश्वास करचल तू लक्ष्य का संधान कर।किस बात का है तुझको ग़ममंजिल की ओर बढ़ा कदमलक्ष्य नहीं है तुमसे ज्यादा दूरचल तू लक्ष्य का संधान …

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