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संपादकीय

लेख@कलम के उत्कृष्ट लेखक लाल बिहारी गुप्ता लाल

10 अक्टूबर,जन्म दिन पर विशेष स्वभाव से मृदुभाषी ,मिलनसार लाल जी को लगभग सभी साहित्य जगत के लोग न सिर्फ जानते हैं बल्कि बखूबी पहचानते भी है। अपनी कड़ी मेहनत और इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने आज अपने लिए ऐसा मुकाम बनाया है, जहाँ तक पहुंच पाना हर लेखक का सपना होता है। 10 अक्टूबर सन 1974 में  बिहार  प्रान्त के …

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कविता@ आप सब कैसे हैं?

हमारे बैच के साथी बताओ आप सब कैसे हैंहम तो बहुत बदले,क्या आप जैसे के तैसे हैंहमारे बैच के साथी बताओ आप सब कैसे हैं किसी को चांदी लग गए हैं काले बालों मेंकिसी की झुर्रि दिख रही नाजुक गालों मेंकुछ साथी तो दिखते हैं जैसे कि तैसे हैंहमारे बैच के साथी बताओ आप सब कैसे हैं कोई बन गया …

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लेख@ आतंकी सरकार को उखाड़ फेंकना चाहिए

किसी पेपर में दो रोटी के बदले जिस्म का सौदा पढ़ा जो गाज़ा में हालत को लेकर था जहाँ खाने पीने की मानवीय संकट पैदा हो गई है अरब में इजराइल को छोड़ कर सारे तो मुस्लिम देश ही हैं उन्हें मदद करनी चाहिए बगल में मिस्र देश का राफा बॉर्डर है वहाँ उसे इतने गहरे मानवीय संकट में अपना …

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लेख@ टीवी डिबेट से उपजती अराजकता

देश में यदि कहीं अराजकता फैलती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है,यह गंभीर चिंतन का विषय है। आपसी सद्भाव के बीच विघटन के बीज बोने में किसकी अधिक भूमिका है-किसी व्यक्ति विशेष की, किसी विशेष राजनीतिक दल की, सोशल मीडिया की या ज्वलंत मुद्दों पर टीवी पर नित्य होने वाली डिबेट की,जिसमें संकीर्ण मानसिकता लिए कुछ लोग बैठते हैं और …

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लेख@भूखे बच्चों का पेट भरने के लिए मर्दों की भूख मिटा रही हैं गाजापट्टी की महिलाएं

गाजा पट्टी में जारी इजराइल-हमास युद्ध ने न सिर्फ घरों को उजाड़ा है, बल्कि महिलाओं की जिंदगी को एक अंधेरी गली में धकेल दिया है। युद्ध की आग में जलते हुए उस मां का दिल कितना टूटता होगा, जब अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए उसे अपने शरीर को किसी के सामने परोसना पड़े? भूखे बच्चों का पेट भरने …

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लेख@महिलाओं पर डबल बोझःशिक्षा विभाग में कपल केस अंक हटाना

नौकरीपेशा महिलाओं के घर और ऑफिस के दबाव में बढ़ता संघर्ष और सरकारी नीतियों का असंतुलित प्रभावहरियाणा में शिक्षा विभाग की ट्रांसफर पॉलिसी में कपल केस अंक हटाने का निर्णय नौकरीपेशा महिलाओं के लिए गंभीर चुनौती है। समाज में महिलाओं से अपेक्षित आदर्श पत्नी और आदर्श बहू की भूमिका उन्हें घर और ऑफिस दोनों में बराबरी का बोझ उठाने पर …

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लेख@ अपने को पहचानना और समय से चलना जरुरी

अपने को पहचानना जरुरी है क्योंकि भगवान कण कण में राम हर मन में राम है फिर भी लोग कथा वाचक की ओर अग्रसर होते हैं जिसके अंदर ही कई अलग अलग विचार हैँ सबसे शक्ति शाली ब्रह्म स्वामी राम जहाँ भी है वो भगवान राम की कृपा से ही है कर्म ना कर कथा वाचक के कथा का आपस …

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लेख@ केन्द्रीय विधानसभा के प्रथम निर्वाचित भारतीय अध्यक्ष थे विट्टलभाई पटेल

24 अगस्त, भारतीय राजनीतिक इतिहास की गौरवशाली गरिमामय परम्परा का स्मरणीय दिवस,जब कोई भारतीय निर्वाचित होकर अंग्रेजी सत्ता की नीति निर्धारक संस्था सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली की अध्यक्षीय पीठ पर विराजमान हुआ था। मैं स्मरण कर रहा हूं, 24 अगस्त 1925 की उस महत्वपूर्ण घटना को जब बैरिस्टर, प्रखर वक्ता, विचारक और स्वराज्य पार्टी के सह-संस्थापक तथा वल्लभभाई पटेल के अग्रज …

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लेख@ अकेलापन,जीवन और जीवन का अंतिम पड़ाव

यह एक बहुत ही दर्दनाक और वास्तविकता भरा सच हैकि एक इंसान पूरी जिंदगी मेहनत करता है, अपने परिवार और बच्चों के लिए त्याग करता है, लेकिन आखिर में जब वह अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर पहुंचता है, तो उसके अपने ही उसके कामों को नजरअंदाज कर देते हैं या उनकी कद्र नहीं करते। इससे इंसान को न केवल …

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लेख@ झूठे मुकदमों का कारोबार और वकीलों की जवाबदेही

जब न्याय के प्रहरी ही अपराधी बन जाएँ,तो कानून की आस्था कैसे बचे? झूठे मुकदमे केवल निर्दोषों को पीड़ा नहीं देते,बल्कि न्याय तंत्र की नींव को भी हिला देते हैं। जब वकील ही इस व्यापार में शामिल होते हैं तो वकालत की गरिमा और न्यायपालिका की विश्वसनीयता दोनों पर गहरा आघात होता है। ऐसे वकीलों पर आपराधिक मुकदमे चलना अनिवार्य …

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