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संपादकीय

संपादकीय@क्या चैतन्य बघेल की राजनीति में एंट्री तय?

जमानत के बाद बढ़ी लोकप्रियता, सोशल मीडिया से सड़कों तक गूंजते नारेछत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया सवाल तेज़ी से उभर रहा है…क्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल अब सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं? लेख: चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद जिस तरह से वे सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने हैं, उसने …

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लेख@ छत्तीसगढ़ में धान खरीदी: इच्छा सरकार की, ब्रेकर प्रशासन के?

धान खरीदी नहीं, किसानों की परीक्षा ले रही है सरकारखरीदना चाहते हैं या खरीदने का नाटक?नीति कहती है हाँ, सिस्टम कहता है नहींप्रशासन ब्रेकर क्यों बना और किसके इशारे पर?30 जनवरी 2026 के बाद जवाब मिलेगा या पर्दा गिरा दिया जाएगा?लेख dy रवि सिंह: छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों एक अजीब विरोधाभास से जूझ रही है, सरकार कहती है हम …

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लेख @ सरकार दायरा बनाती है भ्रष्टाचार उसे तोड़ देता है…

नियम जनता केलिए,दण्डहीनता सत्ता के लिए…यही है व्यवस्था का नया मॉडल‘मुक्ति’ कीयोजनाएं अबजनता के लिए सिरदर्द,दलालोंके लिए रोजगार!कमाने पर दायरा,लूटने पर आज़ादीसरकार की नियत पर जनता का सवालवीआईपी राजनीति फूल-माला के नीचेछिपी जनता की चीखेंजनता से कहा दायरे में रहो परसत्ता खुद हर दायरे के बाहर! मौजूदा हालात यही बयान कर रहे हैं कि कमाने का दायरा है पर भ्रष्टाचार …

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SIR का विरोध: चिंता लोकतंत्र की या वोट बैंक की

ललित गर्ग ‘‘ भारत का लोकतंत्र आज जिस निर्णायक मोड़ पर खड़ा है,वहां उसकी विश्वसनीयता और मजबूती का सवाल पहलेसे कहीं अधिक गंभीर हो गया है। चुनावों की पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुचिता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से मतदाता पहचानकी सत्यता को बनाए रखना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं,बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को सुरक्षित रखने का मूल तत्व है।’’विशेष गहन …

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बेलगाम होती भाषाई अराजकता, सियासी नाकामी से उपजी कुंठा

उमेश चतुर्वेदीइसे विडंबना ही कहेंगे कि जब भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है और विकसित भारत की बातें हो रही हैं, तब देश के कुछ हिस्सों में भाषाई अराजकता बेलगाम हो रही है। मान्यता है कि शिक्षा और समृद्धि के साथ असमानता और संकीर्णता का भाव तिरोहित हो जाता है, लेकिन अपेक्षाकृत …

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क्या बीजेपी आगे बढ़ाएगी नीतीश की विरासत?आलाकमान के इन फैसलों से मिल रहे संकेत

पूनम पाण्डेबिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के साथ ही यह भी अहम है कि इस बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है। दूसरे नंबर पर एनडीए है। जिस तरह मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हुआ, उससे इस पर चर्चा होने लगी है कि क्या बिहार में सत्ता के समीकरण बदलेंगे और क्या बीजेपी ही नीतीश कुमार …

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बदलती विश्व-व्यवस्था और जी-20 की चुनौतीःबहुध्रुवीयता के बीच भारत की उभरती वैश्विक भूमिका

प्रियंका सौरभ जी-20 वैश्विक आर्थिक समन्वय का सबसे प्रभावी मंच है, परन्तु आज यह गहरे भू-राजनीतिक विभाजनों, महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा,आर्थिक असमानताओं और नेतृत्व संकट जैसी कई चुनौतियों से घिरा है। इससे समूह की प्रासंगिकता एवं क्षमता दोनों पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। ऐसे जटिलसमय में भारत ने स्वयं को वैश्विक दक्षिण की सशक्त आवाज़ के रूप में स्थापित किया है—अफ्रीकी संघ …

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लेख@ मैदानी सच्चाई,विकास का दावा और आक्रोश की धुआँ

आदिवासी घर तोड़ने के आरोप से उपजा आक्रोश…पत्रकार की अकेली यात्रा… और ग्राउंड पर दिखी एक ऐसी तस्वीर…जिसे दोनों चश्मों से देखने की जरूरत है…मंत्री के दौरे में छिपी वह कहानी जो बाहर से नहीं दिखतीमंत्री का दौरा विकास की चमक या सवालों की धुन?पत्रकार की नज़र से उठती सच्चाई की पूरी कहानीगृह क्षेत्र में विकास,विभाग में सवाल,मंत्री के दौरे …

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संपादकीय@तीन राज्यों में चेहरा बदला…पर बिहार में भाजपा की राजनीति नीतीश पर आकर क्यों रुक गई?

लेख BY रवि सिंह: बिहार ने एक बार फिर वह कर दिखाया, जिसे भारतीय राजनीति में समझने की सबसे कम कोशिश की जाती है पर नीतीश कुमार को नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं है, वह आदमी, जिसे विपक्ष ने “यू-टर्न मशीन” कहा, और जिसे भाजपा ने कई बार “वैकल्पिक” बताया, आज फिर उसी भाजपा की सरकार का केंद्रीय स्तंभ बन गया, …

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संपादकीय@“बिहार का जनादेश 2025 : राजनीति बदल गई है, अब वादे नहीं—निष्पादन चाहिए”

लेख: बिहार चुनाव 2025 के परिणाम केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं हैं यह बिहार के मतदाता मनोविज्ञान में आए गहरे बदलाव की मजबूत गवाही है, यह चुनाव उस राजनीतिक जमीन को हिला देने वाला साबित हुआ है, जिस पर बिहार की राजनीति दशकों से खड़ी थी। जातीय गठजोड़, पारंपरिक नारों और पुराने वोट-बैंक की राजनीति को जनता ने इस …

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