रायपुर , 29 अगस्त 2022। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने सोमवर को छत्तीसगढ़ मत्री (वेतन तथा भत्ता) (सशोधन) विधेयक, छत्तीसगढ़ विधान मण्डल नेता प्रतिपक्ष (वेतन तथा भत्ता) (सशोधन) विधेयक, छत्तीसगढ़ अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष (वेतन तथा भत्ता) (सशोधन) विधेयक, छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेशन (सशोधन) विधेयक, छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियो का सरक्षण (वृक्षो मे हित) (सशोधन) विधेयक तथा छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद् मे सदस्यो के मनोनयन सबधी प्रस्ताव का अनुमोदन किया।
राज्यपाल उइके ने छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद् के सदस्यो को मनोनीत करने सबधी प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। अनुमोदन उपरात छत्तीसगढ़ जनजाति सलाहकार परिषद् मे सासद बस्तर दीपक बैज, पूर्व विधायक बोधराम कवर, सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती किरण उसेण्डी तथा सेवा निवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी के.आर पिस्दा को सदस्य के रूप मे शामिल किया गया है।
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियो का सरक्षण (वृक्षो मे हित) अधिनियम 1999 मे सशोधन के लिए प्रस्तुत विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए है। सशोधन उपरात यह अधिनियम छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियो का सरक्षण (वृक्षो मे हित) (सशोधन) अधिनियम 2022 कहलाएगा। मूल अधिनियम की 05 धाराओ मे सशोधन किया गया है तथा 01 धारा को विलोपित कर दिया गया है।
सशोधन के अनुसार धारा 04 के तहत् आदिम जनजाति के भूमि स्वामी को अपने खाते पर खड़े हुए विनिर्दिष्ट वृक्ष को काटने की अनुमति के लिए ‘‘कलेक्टर’’ के स्थान पर ‘‘अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)’’ को अनुज्ञा के लिए आवेदन देना होगा। धारा 04 की उप-धारा (2) मे भी सशोधन किया गया है, जिसके अनुसार ‘‘अनुविभागीय अधिकारी’’ आवेदन की जाच कराएगा तथा राजस्व विभाग एव वन विभाग के सयुक्त जाच प्रतिवेदन पर विचार कर अनुज्ञा देने के सबध मे निर्णय करेगा। मूल अधिनियम की धारा 5 का विलोपन किया गया है। धारा 06 मे सशोधन किया गया है कि भूमिस्वामी को देय प्रतिफल की राशि का भुगतान, अधिनियम के अधीन बनाये गये नियमो एव प्रक्रियाओ के अनुसार किया जायेगा। धारा 8 मे अपील, पुनरीक्षण और पुनर्विलोकन के उपबध जैसे कि वे सहिता मे विहित किए गए है, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा इस अधिनियम के अधीन पारित किए गए किसी आदेश पर भी लागू होगे।
धारा 09 के तहत् सशोधन के अनुसार कोई व्यक्ति जो आदिम जनजातियो के खातो मे खड़े हुए विनिर्दिष्ट वृक्षो को काटता है, उनको नुकसान पहुचाता है, काट-छाट करता है या किसी भाग को हटाता है तो दोष सिद्ध होने पर तीन वर्ष के कारावास और एक लाख रूपए जुर्माना देना होगा। पूर्व मे जुर्माने की राशि दस हजार रूपए निर्धारित थी। धारा 09 की उप-धारा 02 के तहत् कार्यवाही करने का आधार गठित करने वाले किन्ही विनिर्दिष्ट वृक्षो के लकड़ी का अधिग्रहण कर लिया जाएगा और वह राज्य सरकार को राजसात हो जाएगी, किन्तु यदि भूमि स्वामी के प्रति कोई षड़यत्र, कपट या छल किया जाता है तो इस प्रकार राजसात लकड़ी के विक्रय के बाद और उस आपराधिक मामले के निपटारे के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के आदेश के अधीन पाच लाख रूपए तक की अधिकतम सीमा के तहत् पचास प्रतिशत तक की सीमा की राशि भूमि स्वामी को दिया जाएगा। धारा 9 की उप-धारा (3) तथा (4) का लोप किया गया है।
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ मत्री (वेतन तथा भत्ता) अधिनियम, 1972 (क्रमाक 25 सन् 1972) को और सशोधित करने हेतु प्रस्तुत विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए है। सशोधन पश्चात् यह अधिनियम छत्तीसगढ़ मत्री (वेतन तथा भत्ता) (सशोधन) अधिनियम, 2022 कहलायेगा।
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ विधान मण्डल नेता प्रतिपक्ष (वेतन तथा भत्ता) अधिनियम, 1980 (क्र. 08 सन् 1980) को और सशोधित करने हेतु प्रस्तुत विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए है। सशोधन पश्चात् यह अधिनियम छत्तीसगढ़ विधान मण्डल नेता प्रतिपक्ष (वेतन तथाभत्ता) (सशोधन) अधिनियम 2022 कहलायेगा। राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष (वेतन तथा भत्ता) अधिनियम, 1972 (क्र. 27 सन् 1972) को और सशोधित करने हेतु प्रस्तुत विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए है। सशोधन पश्चात् यह अधिनियम छत्तीसगढ़ अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष (वेतन तथा भत्ता) (सशोधन) अधिनियम, 2022 कहलायेगा।
राज्यपाल उइके ने छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेशन अधिनियम, 1972 (क्र. 07 सन् 1973) को और सशोधित करने हेतु प्रस्तुत विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए है। सशोधन पश्चात् यह अधिनियम छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेशन (सशोधन) अधिनियम, 2022 कहलायेगा।
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