हर व्यक्ति को है अपने तिरंगे पर अभिमान, क्योंकि हर भारतीय की तिरंगा है पहचान।
आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर सभी ने भारतीय होने का दिया परिचय, घरों में लगाया तिरंगा।
बीजेपी, कांग्रेस दोनों ने घरो तिरंगा पहुंचाने का चलाया अभियान, तिरंगे के साथ भ्रष्टाचार मुक्त भारत का दिलाना था संकल्प।
राजनीतिकरण के बीच हर व्यक्ति ने बड़ी शान से अपने घरों में लगाया अपना राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा।
लेख रवि सिंह:- आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर एक ओर जहां पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ में भाजपा एवं कांग्रेस दोनों ने अपने अपने तरीके से इस अवसर को अपने पक्ष में करने के लिए मुहिम चलाई। पर सवाल यह है क्या यह मुहिम नहीं चलती तो लोग अपने घरों में तिरंगा नहीं लगाते? आखिर हर व्यक्ति का सपना रहा है अपने घरों में तिरंगा लगाना। क्या राजनीतिक पार्टियां तिरंगा देंगी तभी देश का व्यक्ति अपने घरों में तिरंगा लगाएगा? क्या अपने तिरंगे को हर व्यक्ति नहीं लगाना चाहता? जबकि सच्चाई तो यह है कि हर भारतीय के लिए उसका राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा अभिमान है। अपने तिरंगे के लिए हर व्यक्ति समर्पित है, हर व्यक्ति के अंदर तिरंगे को पकड़ने के बाद एक नई ऊर्जा का संचार होता है, जो संचार ऐसे किसी भी झंडे को पकड़ने से नहीं होता। तिरंगे में जो ताकत है वह हर व्यक्ति की ताकत है, तिरंगे को पकड़ने के बाद हर व्यक्ति के अंदर एक नई ताकत का संचार होता है। यही ताकत भारत को विश्व की शक्तिशाली देशों की श्रेणी में खड़ा करता है, जिसकी ओर आंख उठाकर देखने भर से दूसरे देश भी डरते हैं। तिरंगे को लेकर छत्तीसगढ़ में दोनों राजनीतिक राष्ट्रीय पार्टियां जिस तरह इसे वोट बैंक की राजनीति से जोड़ते दिखे वह कहीं न कहीं तिरंगे की शान को फीका करने जैसा था। भाजपा और उसके नेताओं ने जहां इस अभियान को “हर घर तिरंगा” के रूप में लिया, वहीं कांग्रेस और कांग्रेसी लोगों ने इसे “हमर तिरंगा” के रूप में प्रचारित प्रसारित किया। यदि इतना ही राजनीतिक पार्टियां अपने देश हित के लिए सोच रहे हैं, तो हर तिरंगे के साथ सभी को शपथ दिलाने थी कि भारत को भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाना है, हर व्यक्ति हर सरकार भ्रष्टाचार मुक्त हो, हर तिरंगे को हाथ में देने के बाद भ्रष्टाचार मुक्त होने की शपथ दिलाने थी। पर सवाल यह है क्या ऐसा सरकारें कर पाती क्योंकि सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार में लिप्त तो सरकार, सरकारी तंत्र और उनके नुमाइंदे हैं। जो आज अपने देश के तिरंगे के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। यदि सही में तिरंगे की शान को बरकरार रखना है तो देश को सबसे पहले भ्रष्टाचार की गंदगी से दूर करना होगा। तिरंगा हर व्यक्ति तक पहुंचाना अच्छी पहल है पर इस तिरंगे के साथ कुछ संकल्प भी लिया जा सकता था और कुछ संकल्प दिलाया जा सकता था। जो देश के अंदर एक अलग बदलाव आता जो सारे संसार को एक नया संदेश जाता। इस तिरंगे के नाम पर हम अभियान चलाने वाले खुद भी भ्रष्टाचार मुक्त होकर यदि इसे दिलों में सहेजते तो यह अभियान ज्यादा सफल होता। पर तिरंगा अभियान के तहत कहीं राजनीतिकरण तो नहीं हो रहा या फिर कहा जाए तो तिरंगे के नाम पर राजनीति रोटी तो नहीं सेंकी जा रही छत्तीसगढ़ में…कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
रवि सिंह
कटकोना कोरिया
छत्तीसगढ़

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