नयी दिल्ली,04 जुलाई 2022। सुप्रीमकोर्ट सोमवार को सशस्त्र बलो मे भर्ती सबधी केद्र की ‘अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया। जस्टिस इदिरा बनर्जी और जस्टिस जे.के. माहेश्वरी की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि गर्मी की छुट्टी के बाद शीर्ष अदालत के फिर से खुलने पर याचिकाओ को अगले सप्ताह उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। इस योजना के खिलाफ याचिका दायर करने वाले वकील ने कहा कि भारतीय वायु सेना मे जाने को इच्छुक उम्मीदवारो ने प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है और नियुक्ति पत्र की प्रतीक्षा कर रहे है, लेकिन अब उनका कार्यकाल 20 साल से घटाकर चार साल कर दिया जाएगा।
वकील ने कहा, ‘यह एक महत्वपूर्ण मामला है, कृपया इसे सूचीबद्ध करे। कई उम्मीदवारो के भविष्य दाव पर है। योजना को चुनौती देनी वाली याचिका दायर करने वाले वकील एम.एल शर्मा ने कहा कि वह योजना से सबधित सरकार की अधिसूचना को रद्द करने का अनुरोध करते है, क्योकि 70,000 से अधिक उम्मीदवार जो प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके है, वे वैश्विक महामारी से पहले से अपने नियुक्ति पत्र की प्रतीक्षा कर रहे है और अब योजना के तहत उनका कार्यकाल छोटा कर दिया गया है। पीठ ने कहा कि जब आपने (शर्मा) दो साल से अधिक समय तक इतजार किया है तो आप अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मामला क्यो उठा रहे है। इसके बाद पीठ ने शर्मा की याचिका को अन्य मामलो के साथ उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया। शर्मा ने जनहित याचिका मे आरोप लगाया कि सरकार ने सशस्त्र बलो की बेहद पुरानी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया है, जो सवैधानिक प्रावधानो के खिलाफ है। सरकार ने पिछले महीने, ‘अग्निपथ योजना की घोषणा की थी। योजना के तहत साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष तक की उम्र के युवाओ को चार साल के कार्यकाल के लिए सशस्त्र बलो मे शामिल किया जाएगा। इनमे से 25 प्रतिशत को बाद मे नियमित सेवा मे शामिल किया जाएगा।
सरकार ने बाद मे 2022 के लिए इस योजना के तहत भर्ती के वास्ते ऊपरी आयु सीमा को 21 वर्ष से बढ़ाकर 23 वर्ष कर दिया था। याचिका मे योजना के खिलाफ पूरे देश मे चल रहे विरोध-प्रदर्शनो का भी हवाला दिया गया। इससे पहले, शीर्ष अदालत मे कई याचिकाए दायर कर योजना के खिलाफ हिसक विरोध-प्रदर्शन के दौरान रेलवे सहित सार्वजनिक सपçायो को हुए नुकसान की जाच के लिए एक विशेष जाच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। याचिका मे केद्र और उार प्रदेश, तेलगाना, बिहार, हरियाणा और राजस्थान सरकारो को हिसक विरोध-प्रदर्शनो पर एक स्थिति रिपोर्ट देने का निर्देश देने की भी माग की गई है।
इसमे योजना और उसके राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सेना पर होने वाले प्रभावो की जाच के लिए शीर्ष अदालत के एक सेवानिवृा न्यायाधीश की अध्यक्षता मे एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया।
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