एसपी चंद्रमोहन सिंह के नेतृत्व में हुई विवेचना करण हत्याकांड में 7 आरोपियों को उम्रकैद
मजबूत विवेचना और साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि से पुलिस की कार्यप्रणाली पर जगा भरोसा,मृतक के माता-पिता को मिलेगा 10 हजार रुपये प्रतिकर
-रवि सिंह-
मनेन्द्रगढ़,30 अक्टूबर 2026(घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़ के चर्चित करण राठौर हत्याकांड में आखिरकार न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला आ गया है, प्रथम अपर सत्र न्यायालय मनेंद्रगढ़ ने मामले में सात आरोपियों को दोषसिद्ध कर आजीवन कारावास सहित अन्य दंड से दंडित किया है,इस प्रकरण की विवेचना तत्कालीन पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह के नेतृत्व में हुई थी, घटना के बाद पुलिस ने जांच करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की और विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया, अब न्यायालय में विचारण के बाद सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है, इस फैसले ने एक बार फिर यह भरोसा मजबूत किया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में पुलिस निष्पक्ष और मजबूत विवेचना करे तथा साक्ष्यों को विधिसम्मत तरीके से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे,तो पीडि़त परिवार को न्याय मिलना संभव है, न्यायालय ने 28 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया,जिसकी जानकारी जिला पुलिस मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ने 29 अक्टूबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
बताशा लाइन में चाकू से किया गया था प्राणघातक हमला-्रपुलिस के अनुसार, घटना 5 सितंबर 2025 की रात लगभग 10 से 10ः30 बजे के बीच मनेंद्रगढ़ के बताशा लाइन स्थित हनुमान मंदिर के सामने गली में हुई थी,आरोपियों ने कथित तौर पर विधि विरुद्ध जमाव बनाकर घातक हथियारों से बल और हिंसा का प्रयोग किया तथा करण राठौर पर चाकू से प्राणघातक हमला किया, इस हमले में करण राठौर की मृत्यु हो गई थी, घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने प्रकरण की जांच की और आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की,विवेचना पूरी होने के बाद आरोपियों के विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया,इसके बाद न्यायालय में मामले का विचारण हुआ और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर फैसला सुनाया गया।
सात आरोपियों को न्यायालय ने पाया दोषी-न्यायालयीन विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने सात आरोपियों को दोषसिद्ध पाया,दोषसिद्ध आरोपियों में रितिक मिश्रा,सचिन जैन,राशिद खान, अमन केंवट उर्फ बुटई,भावेश पाटिल, रौनिल मिश्रा उर्फ कुक्कू और मो. अकरम उर्फ अक्कू शामिल हैं,न्यायालय ने इन सभी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191(3) तथा धारा 103(1)/191 के तहत दोषी ठहराया।
हत्या में आजीवन कारावास, बलवा में दो-दो साल की सजा-न्यायालय ने सातों दोषियों को बीएनएस की धारा 191(3) के तहत दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास और 500-500 रुपये का अर्थदंड सुनाया,वहीं, धारा 103(1)/191 के तहत आजीवन कारावास और 1,000-1,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया,न्यायालय ने दोनों सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है,अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर आदेश के अनुसार अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
एक आरोपी को मिला संदेह का लाभ-प्रकरण में आरोपी प्रभात सोंधिया उर्फ रवि के विरुद्ध बीएनएस की धारा 249 के तहत लगाए गए आरोप को अभियोजन युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित नहीं कर सका,इस पर न्यायालय ने उसे संदेह का लाभ देते हुए उक्त आरोप से दोषमुक्त घोषित कर दिया,इस प्रकार मामले में सात आरोपियों को दोषसिद्ध किया गया,जबकि एक आरोपी को धारा 249 के आरोप से राहत मिली।
मृतक के माता-पिता को मिलेगा 10 हजार रुपये प्रतिकर-न्यायालय ने सातों दोषियों पर कुल 10,500 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया है,आदेश के अनुसार, अर्थदंड की राशि जमा होने पर उसमें से 10 हजार रुपये मृतक करण राठौर के माता अथवा पिता को प्रतिकर स्वरूप प्रदान किए जाएंगे, शेष 500 रुपये शासन के पक्ष में जमा होंगे।
एसपी चंद्रमोहन सिंह के नेतृत्व में हुई विवेचना
इस हत्याकांड में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह के नेतृत्व में हुई विवेचना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गंभीर आपराधिक मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि घटना से जुड़े साक्ष्यों का संकलन,उनकी कडि़यों को जोड़ना और न्यायालय में आरोपों को प्रमाणित करने के लिए विधिसम्मत आधार तैयार करना भी बेहद जरूरी होता है,करण राठौर हत्याकांड में तत्कालीन एसपी चंद्रमोहन सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया,आरोपियों की गिरफ्तारी की और अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया,अब न्यायालय द्वारा सात आरोपियों को दोषसिद्ध कर आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस की विवेचना और न्यायालयीन प्रक्रिया के बीच महत्वपूर्ण संबंध सामने आया है,इस फैसले से समाज में यह उम्मीद भी मजबूत हुई है कि यदि पुलिस गंभीर मामलों में निष्पक्षता, तत्परता और मजबूती के साथ विवेचना करे तथा साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करे,तो अपराधियों को सजा दिलाने की राह प्रशस्त हो सकती है,पुलिस के प्रति आमजन का भरोसा भी ऐसी ही प्रभावी और जवाबदेह कार्रवाई से मजबूत होता है।
मजबूत विवेचना से न्याय तक पहुंचा मामला…
करण राठौर हत्याकांड का फैसला केवल सात आरोपियों को मिली सजा तक सीमित नहीं है,यह गंभीर अपराधों में पुलिस की जिम्मेदारी,विवेचना की गुणवत्ता और न्यायालय में साक्ष्यों को प्रमाणित करने के महत्व को भी सामने लाता है,तत्कालीन पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह के नेतृत्व में हुई जांच,आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायालय में प्रस्तुत अभियोजन के बाद सात आरोपियों का दोषसिद्ध होना इस मामले का महत्वपूर्ण परिणाम है,समाज में पुलिस के प्रति भरोसा तभी मजबूत होता है,जब गंभीर अपराधों में निष्पक्ष जांच हो,साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले,करण राठौर हत्याकांड में आया यह फैसला इसी उम्मीद को बल देता है कि मजबूत और तथ्यपरक विवेचना न्याय तक पहुंचने का रास्ता तैयार कर सकती है।
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