परिवार में कोई नहीं था,निधन की खबर मिलते ही आगे आए संस्था के सदस्य…गंगापुर मुक्तिधाम में कराया अंतिम संस्कार
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,30 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। इंसानियत केवल जीवित व्यक्ति की मदद करने तक सीमित नहीं होती,बल्कि किसी असहाय व्यक्ति को मृत्यु के बाद सम्मानजनक विदाई देना भी मानवता का बड़ा धर्म है। सामाजिक संस्था ‘अनोखी सोच’ के सदस्यों ने इसी संवेदना का परिचय देते हुए एक बेसहारा महिला के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई और पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। जानकारी के अनुसार,स्थानीय सीएमओ कार्यालय के सामने निवास करने वाली सुश्री सुनैना मरकाम बकरी पालन कर अपना जीवनयापन करती थीं। उनका कोई पारिवारिक सदस्य नहीं था। ऐसे में उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार की व्यवस्था को लेकर असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई। इसकी जानकारी मिलते ही सामाजिक संस्था ‘अनोखी सोच’ के सदस्य तत्काल मदद के लिए आगे आए और अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था में सहयोग किया। संस्था के सदस्यों के सामूहिक प्रयास से दिवंगत सुनैना मरकाम का अंतिम संस्कार गंगापुर मुक्तिधाम में पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। जहां अपनों का साथ और पारिवारिक सहारा नहीं था, वहां सामाजिक सरोकार से जुड़े लोगों ने आगे आकर उन्हें सम्मानजनक विदाई दी। संस्था की इस पहल ने यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल खून से ही नहीं बनते,बल्कि संवेदना और इंसानियत भी किसी को अपना बनाने के लिए पर्याप्त हैं। इस पुनीत कार्य में सूर्य प्रकाश साहू, अभय साहू,पंकज चौधरी, चंद्र प्रताप सिंह, दिनेश गर्ग,विजय बंसल,रूपेश बेहरा,अजय ताम्रकार,भोला, बिट्टू मिश्रा, बनाफर, मिट्ठू, गुड्डू, सौरभ,अजय साहू,बाड़ू, प्रदीप,अनिल दास, चंदन,गजानंद,नीरज,मुकेश मुंडा,सावन एवं नितेश,रोहित सहित संस्था के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। ‘अनोखी सोच’ संस्था जरूरतमंदों,असहायों और वंचितों की सहायता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संस्था का मानना है कि समाजसेवा का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक मदद करना नहीं।
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