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अम्बिकापुर@29 अगस्त के हमले के बाद अब हत्या की साजिश का गुमनाम पत्र

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कांग्रेस मंडल अध्यक्ष गुरुप्रीत सिद्धू को डाक से मिली कथित हत्या की योजना की सूचना,एसपी राजेश अग्रवाल से मिलकर सौंपा आवेदन,पुलिस ने दिया जांच कानिर्देश

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,30 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। कांग्रेस मंडल अध्यक्ष गुरुप्रीत सिंह सिद्धू पर 29 अगस्त को हुए जानलेवा हमले का मामला अभी पूरी तरह सवालों से मुक्त भी नहीं हुआ था कि अब उनकी हत्या की कथित साजिश को लेकर एक नया मामला सामने आ गया है। गुरुप्रीत सिंह सिद्धू को डाक के माध्यम से एक गुमनाम पत्र मिला है,जिसमें उनकी हत्या के षड्यंत्र की जानकारी दिए जाने का दावा किया गया है। पत्र पर भेजने वाले का नाम और पता दर्ज नहीं है,हालांकि लिफाफे पर एक नाम लिखा हुआ बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने पहले से चर्चित हमले के मामले को एक बार फिर गंभीर बना दिया है। मिली जानकारी के अनुसार,पत्र मिलने के बाद गुरुप्रीत सिंह सिद्धू ने पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और लिखित आवेदन सौंपकर मामले की जांच की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल विवेचना के निर्देश दिए हैं।
पहले घर में घुसकर हुआ था हमला,पत्नी भी हुई थीं घायल : गौरतलब है कि 29 अगस्त की रात मणिपुर थाना क्षेत्र के दर्रीपारा में गुरुप्रीत सिंह सिद्धू के साथ उनके घर के पास मारपीट की घटना हुई थी। आरोप है कि हमलावरों ने घर में घुसकर भी उनके साथ मारपीट की थी। बीच-बचाव करने पहुंचीं उनकी पत्नी भी घायल हुई थीं। गुरुप्रीत को गंभीर चोटें आने के बाद रायपुर के डीकेएस अस्पताल में उपचार के लिए रेफर किया गया था। मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था और घटना में प्रयुक्त बुलेट मोटरसाइकिल भी जब्त की थी।
हमले के बाद भी नहीं थमे सवाल, अब गुमनाम पत्र ने बढ़ाई चिंता : इस पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर पहलू यह है कि पहले हुए हमले के बाद अब हत्या की कथित साजिश का पत्र सामने आया है। हालांकि गुमनाम पत्र में किए गए दावों की सत्यता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी,लेकिन पत्र मिलने की परिस्थितियों और लिफाफे पर दर्ज नाम की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। आखिर यह पत्र किसने भेजा? लिफाफे पर लिखे नाम का इस मामले से कोई संबंध है या नहीं? क्या यह किसी वास्तविक खतरे की सूचना है अथवा किसी को भ्रमित करने की कोशिश? इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच निष्पक्ष जांच की चुनौती : 29 अगस्त की घटना के बाद गुरुप्रीत सिद्धू ने एक भाजपा नेता पर हमले की साजिश में भूमिका होने का आरोप लगाया था,जबकि संबंधित नेता ने आरोपों से इनकार किया था। कांग्रेस ने भी उस समय पुलिस से निष्पक्ष जांच और कथित साजिश में शामिल लोगों की पहचान करने की मांग की थी। ऐसे में नए पत्र के सामने आने के बाद पुलिस के सामने चुनौती केवल पत्र भेजने वाले की पहचान करने की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की भी है कि इसमें लगाए गए आरोपों के पीछे कोई वास्तविक आपराधिक योजना है या नहीं। अब पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि गुमनाम पत्र के पीछे कौन है और उसमें किए गए दावों का कोई ठोस आधार है या नहीं। पत्र की लिखावट, डाक की मुहर,लिफाफे पर दर्ज नाम तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच इस मामले में अहम साबित हो सकती है। सवाल सिर्फ एक पत्र का नहीं, सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर भरोसे का भी है। किसी जनप्रतिनिधि अथवा राजनीतिक पदाधिकारी को पहले सार्वजनिक रूप से हमले का सामना करना पड़े और उसके बाद हत्या की साजिश का पत्र मिलने की सूचना सामने आए,तो इसे सामान्य घटनाक्रम मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस को मामले की गंभीरता से जांच कर वास्तविकता सामने लानी होगी, ताकि न तो किसी निर्दोष को संदेह के आधार पर परेशान किया जाए और न ही किसी वास्तविक खतरे को अनदेखा किया जाए।


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