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रायपुर@डीएमएफ घोटाला…सतपाल सिंह छाबड़ा समेत 16 नए आरोपी

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टेंडर दिलाने के बदले 30′ तक कमीशन लिया,7 हजार पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश

रायपुर30० अक्टूबर 2026। प्रवर्तन निदेशालय (प्रवर्तन निदेशालय) ने छत्तीसगढ़ के 575 करोड़ से ज्यादा के डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) घोटाला केस में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) पेश की है। इसमें कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा समेत 16 नए लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में 214 पन्नों की शिकायत पेश की है। इसके साथ करीब 7,500 पन्नों के दस्तावेज भी अटैच किए हैं। प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, इस मामले में पहले भी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की गई थी, जिसमें रानू साहू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब जांच के अगले चरण में 16 और लोगों की भूमिका सामने आने के बाद उनके खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत पेश की गई है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया है कि डीएमएफ की राशि से होने वाले कामों के टेंडर दिलाने में बिचौलियों की अहम भूमिका थी। सतपाल सिंह छाबड़ा और उससे जुड़े लोग सरकारी अधिकारियों और टेंडर हासिल करने वाली निजी कंपनियों के बीच संपर्क का काम करते थे। आरोप है कि ये लोग कमीशन लेकर अपनी पसंद की पार्टियों को बड़े-बड़े टेंडर दिलवाते थे। इसके बदले करीब 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था।
काम किए बिना पूरा भुगतान लेने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, जांच में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि डीएमएफ फंड से जिन कार्यों के लिए टेंडर आवंटित किए गए, उनमें से कई काम वास्तव में किए ही नहीं गए, जबकि उनके एवज में पूरा भुगतान प्राप्त कर लिया गया। जांच एजेंसी ने इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल की है।
बैंक ट्रांजैक्शन और वित्तीय लेन-देन की जांच
प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि जांच के दौरान बैंक खातों के लेन-देन और वित्तीय दस्तावेजों को खंगाला गया। इन दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों के आपसी संबंधों और घोटाले में उनकी भूमिका का पता लगाने का प्रयास किया गया है। एजेंसी का आरोप है कि सतपाल सिंह छाबड़ा टेंडर आवंटन समिति और टेंडर हासिल करने वाली पार्टियों के बीच कड़ी का काम करता था। वह कमीशन लेकर अपनी पसंद की कंपनियों को टेंडर दिलवाने में भूमिका निभाता था।
फंड खर्च के नियमों को बदला गया
जांज एजेंसी के मुताबिक इससे पहले ये भी सामने आया था कि डिस्टि्रक मिनरल फंड (डीएमएफ) घोटाला मामले में कलेक्टर को 40′, सीईओ 5′, एसडीओ 3′ और सब इंजीनियर को 2′ कमीशन मिला। डीएमएफ के वर्क प्रोजेक्ट में करप्शन के लिए फंड खर्च के नियमों को बदला गया था। फंड खर्च के नए प्रावधानों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरणों की कैटेगरी को जोड़ा गया था, ताकि संशोधित नियमों के सहारे डीएमएफ के तहत जरूरी डेवलपमेंट वर्क को दरकिनार कर अधिकतम कमीशन वाले प्रोजेक्ट को अप्रूव किया जा सके। यह खुलासा कोरबा में 575 करोड़ रुपए से ज्यादा के हुए डीएमएफ स्कैम की जांच में हुआ है। इसकी पुष्टि रायपुर कोर्ट में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा पेश किए गए 6 हजार पेज के चालान से हुई है।


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