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नई दिल्ली@विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग का फैसला

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यूपी-पंजाब समेत 17 राज्यों में अपडेट होगी वोटर लिस्ट


नई दिल्ली,15 अक्टूबर 2026। चुनाव आयोग ने गुरुवार को मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का स्पेशल समरी रिवीजन कराने का निर्देश दिया है। आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लेटर भेजा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, एसएसआर के तहत वोटर लिस्ट में नए नाम जोड़े जाएंगे और पहले से दर्ज जानकारी में गलतियां सुधारी जाएंगी। 2027 में 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा भी वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह आदेश स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर विवाद और विरोध के बीच आया है। एसआईआर के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए थे। आयोग ने कहा है कि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां एसएसआर का शेड्यूल बाद में घोषित किया जाएगा।
एसआईआर में नाम कटे लोग भी जुड़वा सकते हैं : चुनाव आयोग की एसएसआर से जुड़ी प्रेस रिलीज में इसका जिक्र नहीं है। हालांकि, एसआईआर में जिन लोगों के नाम कट गए या छूट गए थे,उन्हें फॉर्म- 6 भरना होगा। नाम तभी जुड़ेगा,जब संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी पात्रता की जांच कर आवेदन स्वीकार करेगा।
12 नवंबर को जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट : चुनाव आयोग ने एसएसआर के लिए तारीखें तय की हैं। इसके तहत 2 नवंबर 2026 तक मतदान केंद्रों की व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद 12 नवंबर को वोटर लिस्ट की ड्राफ्ट कॉपी जारी होगी। ड्राफ्ट लिस्ट में नाम या जानकारी को लेकर 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनका निपटारा 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद 4 जनवरी 2027 को वोटर लिस्ट की अंतिम सूची जारी होगी।
यूपी समेत 5 राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव : उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन पांचों राज्यों में एसएसआर कराया जाएगा। उत्तर प्रदेश की 403 सीटों वाली विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को खत्म होगा। मणिपुर की 60, गोवा की 40, पंजाब की 117 और उत्तराखंड की 70 सीटों वाली विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर खत्म होगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत चुनाव आयोग विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से छह महीने पहले भी चुनाव करा सकता है।
मतदान केंद्रों की व्यवस्था भी सुधारी जाएगी : चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों की संख्या और उनकी जगह की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। सामान्य तौर पर एक मतदान केंद्र पर 1,200 से ज्यादा मतदाता नहीं होने चाहिए। जरूरत पड़ने पर नए मतदान केंद्र बनाए जा सकते हैं। अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि मतदाताओं को अपने मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय न करनी पड़े।


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