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नई दिल्ली@जनसांख्यिकी और नए आर्थिक क्षेत्रों के चलते भारत के पास विकास की लंबी संभावना : एस जयशंकर

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नई दिल्ली,04 अक्टूबर 2026। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत के सामने अगले पांच से दस वर्षों में ही नहीं बल्कि आने वाले दशकों में भी उच्च आर्थिक वृद्धि की संभावना है। उन्होंने इसके पीछे देश की जनसांख्यिकी और नई आर्थिक संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार,दुनिया तेजी से बदल रही है और भारत के पास औद्योगीकरण के पारंपरिक रास्ते से अलग नए अवसर तलाशने की क्षमता है। विदेश मंत्री ने 62वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित किया।
जयशंकर ने इस दौरान भारत की विकास यात्रा, यूरोप के साथ बढ़ती साझेदारी और बदलती वैश्विक व्यवस्था पर भारत का दृष्टिकोण रखा। इसमें उन्होंने भारत के संदर्भ में आने वाले दशकों तक उच्च आर्थिक वृद्धि की संभावना जताई। साथ ही विश्व के अन्य देशों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। डॉ. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी पसंद के अनुसार खुद को नए तरीके से स्थापित किया है और कुछ हद तक अधिक अकेली शक्ति की भूमिका अपनाई है। दूसरी प्रमुख विशेषता चीन का उभार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-चीन के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, जिसका असर अन्य देशों पर भी पड़ रहा है। इस प्रतिस्पर्धा के बीच देशों की आपसी निर्भरता भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि उभरती और मध्य शक्तियां अपने हितों के अनुरूप एक-दूसरे के साथ सहयोग बढ़ा रही हैं। उन्होंने क्वाड,भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और ब्रिक्स का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन जैसी पहल भी देशों के बीच सहयोग के नए स्वरूप को दर्शाती हैं। जयशंकर ने कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था ने बहुध्रुवीयता के उभार को तेज किया है। बढ़ती परस्पर निर्भरता के कारण देशों के लिए किसी एक खेमे से पूरी तरह अलग रहना संभव नहीं है। ऐसे में वे अपने हितों के अनुसार विभिन्न शक्तियों के साथ संबंध बनाएंगे और जोखिमों को संतुलित करते हुए सहयोग करेंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि देशों के लिए ऐसे साझेदारों के साथ संबंध बनाना जरूरी होता जा रहा है, जिनके साथ उनके हित हमेशा पूरी तरह मेल नहीं खाते। इसे उन्होंने जोखिम संतुलित करते हुए आगे बढ़ने की रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसी प्रमुख बहुपक्षीय संस्था में गतिरोध दिखाई दे रहा है। इसके परिणाम स्वरूप छोटे समूहों और सीमित दायरे वाले सहयोग के नए प्रारूप उभर रहे हैं। जयशंकर ने आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को उभरती शक्तियों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र में प्रभावशाली बनने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होना जरूरी नहीं है।


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