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सूरजपुर/भैयाथान@ लाखों की लागत वाली सीसी सड़क से गायब हुआ सीमेंट,17 माह में उखड़ी गिट्टियां

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डीएमएफ मद से 20 लाख रुपये की लागत से हुआ था निर्माण,गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर/भैयाथान,19 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)
। विकासखंड भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत बांसापारा में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से करीब 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित सीमेंट कंक्रीट (सीसी) सड़क महज करीब 17 माह में ही बदहाल स्थिति में पहुंच गई है,दुर्गा पंडाल (मंदिर) कुम्हारपारा पहुंच मार्ग पर बनाई गई इस सड़क की ऊपरी सतह से सीमेंट की पकड़ खत्म होती नजर आ रही है और जगह-जगह गिट्टियां उखड़कर सड़क पर बिखरी पड़ी हैं,सड़क की मौजूदा स्थिति को देखकर ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता और कार्य के मूल्यांकन को लेकर सवाल उठा रहे हैं, ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए,वह लंबे समय तक चलने के बजाय निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद खराब होने लगी। अब सड़क पर कई स्थानों पर कंक्रीट की ऊपरी परत उखड़ चुकी है और गिट्टियां बाहर आ गई हैं,इससे राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कागजों में करीब 20 लाख का मूल्यांकन, जमीन पर उखड़ी गिट्टियां-उपलब्ध सूचना पट्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में डीएमएफ मद से इस कार्य के लिए 20 लाख रुपये की लागत स्वीकृत की गई थी,निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत बांसापारा को बनाया गया था, कार्य की शुरुआत 4 नवंबर 2024 को हुई और इसे 2 अप्रैल 2025 को पूर्ण दर्ज किया गया। कार्य का कुल मूल्यांकन 19 लाख 99 हजार 535 रुपये किया गया है, निर्माण पूर्ण हुए अब करीब 17 माह यानी लगभग 535 दिन बीत चुके हैं,इतने कम समय में सड़क की सतह का इस तरह उखड़ना निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण यदि निर्धारित मापदंडों के अनुरूप किया गया होता तो इतनी जल्दी उसकी ऊपरी परत खराब होने की स्थिति नहीं बननी चाहिए थी।
पहली : दूसरी बारिश में ही खुलने लगी सड़क की परत?-स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण के बाद से ही इसकी मजबूती को लेकर सवाल उठने लगे थे, उनका आरोप है कि निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मापदंडों और सीमेंट के सही अनुपात का ध्यान नहीं रखा गया,जिसके कारण सड़क की ऊपरी परत जल्द ही कमजोर होकर टूटने लगी,हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है, वर्तमान में सड़क पर जगह-जगह गिट्टियां खुली हुई हैं, इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवत्ता, मिश्रण और सड़क की मोटाई की निगरानी किस स्तर पर की गई थी।
राहगीरों के लिए बढ़ा दुर्घटना का खतरा- सड़क की ऊपरी सतह उखड़ने के कारण जगह-जगह नुकीली गिट्टियां बाहर निकल आई हैं, ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है, पैदल चलने वाले लोगों को भी असमतल सड़क के कारण परेशानी हो रही है,ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का उद्देश्य लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन निर्माण के महज कुछ समय बाद ही इसकी हालत खराब होने से अब वही सड़क परेशानी का कारण बन रही है।
तकनीकी जांच और जवाबदेही की मांग- ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है,उनका कहना है कि कार्य के मूल्यांकन,निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, सीमेंट-गिट्टी के अनुपात, सड़क की मोटाई और निर्माण प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए,साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कार्य पूर्ण होने के बाद उसका मूल्यांकन किस आधार पर किया गया और निर्माण के करीब 17 माह बाद सड़क की यह स्थिति क्यों बनी, ग्रामीणों की मांग है कि यदि तकनीकी जांच में निर्माण में किसी तरह की कमी सामने आती है तो संबंधित निर्माण एजेंसी के साथ-साथ निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए, 20 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क का 17 माह में ही इस तरह उखड़ना अब सिर्फ ग्रामीणों की परेशानी नहीं, बल्कि डीएमएफ राशि से कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल बन गया है।


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