रायपुर,14 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के फर्जी या गलत जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के मामलों में कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों, विभागाध्यक्षों, जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से ऐसे सभी मामलों में की गई कार्रवाई की अद्यतन और एकजाई जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 11 अगस्त 2026 को जारी पत्र में कहा है कि जिन शासकीय सेवकों के जाति प्रमाण-पत्र जाति प्रमाण-पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा फर्जी या गलत पाए जाने के कारण निरस्त किए जा चुके हैं, उनके विरुद्ध शासन के पूर्व निर्धारित नियमों और निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जानी है।
स्थगन नहीं तो सेवा समाप्त करने के निर्देश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी के मामले में न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त नहीं हुआ है और उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जाति प्रमाण-पत्र फर्जी या गलत पाए जाने के कारण निरस्त किया जा चुका है, तो संबंधित की सेवाएं अविलंब समाप्त की जाएं। सेवा समाप्ति का आदेश जारी करने से पहले संबंधित प्रशासकीय विभाग को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कैविएट दायर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कोर्ट से स्टे मिलने पर भी होगी कार्रवाई
जिन मामलों में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को न्यायालय से स्थगन मिला हुआ है, उनमें विधि विभाग से समीक्षा कराने और स्थगन आदेश समाप्त कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई तत्परता से करने को कहा गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने पत्र में पूर्व में जारी कई परिपत्रों का हवाला देते हुए कहा कि इन मामलों में मांगी गई जानकारी अभी तक पूरी तरह उपलब्ध नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी विभागों को प्राथमिकता के आधार पर अपने अधीनस्थ कार्यालयों और जिलों से जानकारी एकत्र कर तत्काल सामान्य प्रशासन विभाग तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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