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अम्बिकापुर@ 500 साल पुरानी लोकआस्था को मिलेगा भव्य स्वरूप,नाथल दाई मंदिर निर्माण का भूमि पूजन

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आठ-दस ग्राम पंचायतों से पहुंचे श्रद्धालु….महाआरती, हनुमान चालीसा पाठ और महाभंडारे में उमड़ा जनसैलाब
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,13 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
ग्राम बेनीपुर स्थित करीब 500 वर्ष से अधिक पुरानी लोकआस्था से जुड़े नाथल दाई धाम को अब भव्य मंदिर का स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। गुरुवार को मंदिर निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान में आसपास की आठ-दस ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचे। महाआरती, हनुमान चालीसा पाठ और महाभंडारे के दौरान पूरा परिसर भक्तिमय नजर आया।
छह बैगाओं ने पारंपरिक विधि से कराई पूजा : कार्यक्रम की शुरुआत सुबह करीब 7 बजे छह बैगाओं द्वारा पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई। ग्रामीण अपने-अपने घरों से अक्षत और पुष्प लेकर पहुंचे और माता नाथल दाई को अर्पित किए। बैगाओं ने काफी देर तक पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पूजा संपन्न कराई। पूजा के बाद माता नाथल दाई की महाआरती और हनुमान चालीसा पाठ किया गया। इसके बाद मां महामाया की आरती भी हुई। महाआरती में भारत सिंह सिसोदिया,अनुराग सिंह देव, जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह और मेजर अनिल सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
पांच फावड़े चलाकर शुरू किया मंदिर निर्माण : महाआरती के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह ने मंदिर निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन किया। उन्होंने पांच फावड़े चलाकर निर्माण कार्य की शुरुआत की। इस दौरान नाथल दाई सेवा समिति के सदस्यों एवं कार्यकर्ताओं ने प्राचीन स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। आसपास की आठ-दस ग्राम पंचायतों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी मंदिर निर्माण के संकल्प में सहभागिता की। कार्यक्रम के बाद आयोजित महाभंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
लोकगीतों और पीढि़यों की स्मृतियों में सुरक्षित है इतिहास : हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक आलोक सिंह ने कहा कि सरगुजा की लोक संस्कृति में देवी-देवताओं से जुड़े अनेक स्थल ऐसे हैं, जिनका इतिहास केवल शिलालेखों में नहीं,बल्कि लोकगीतों, बुजुर्गों की स्मृतियों और पीढि़यों से चली आ रही मान्यताओं में सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों और बुजुर्गों की मान्यता के अनुसार नाथल दाई का यह स्थल करीब 500 वर्ष से अधिक पुराना है। यहां माता नाथल दाई को चंद्रहासिनी देवी की बहन तथा मां कामाख्या की छोटी बहन के रूप में पूजित माना जाता है। सरगुजा सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में बैगा,गुनिया और देवार समुदाय द्वारा पारंपरिक पूजा-पाठ के दौरान मां महामाया और चंद्रहासिनी देवी के साथ नाथल दाई का भी आह्वान किए जाने की परंपरा बताई जाती है।
भव्य मंदिर बनाने का संकल्प : नाथल दाई सेवा समिति ने इस प्राचीन लोकआस्था के केंद्र को भव्य मंदिर के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। भूमि पूजन समारोह में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने मंदिर निर्माण के प्रति क्षेत्रवासियों की आस्था और सहभागिता को भी सामने रखा। कार्यक्रम में अनुज दुबे, जनमेजय मिश्रा, निलेश सिंह, रूपेश दुबे, सेवा समिति अध्यक्ष अर्जुन पटेल,उपाध्यक्ष सतीश यादव, सचिव एवं सरपंच हरिशंकर सहित ननका बैगा,पंडा ललन प्रसाद,चंदर यादव,सुखलाल राजवाड़े, राजू यादव,भदर यादव,धनसी,राम आशीष, डिलेश्वर पैकरा,ललित रजवाड़े, नंदकेश्वर रजवाड़े, बुधन राम पैकरा, बरन राम, ननका यादव, कुमार राम, जितेंद्र सिंह, कन्हैया लाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
मुख्य द्वार पर विशाल ध्वज, चारों कोनों पर भी ध्वज
धार्मिक आयोजन के समापन पर मंदिर परिसर के मुख्य द्वार पर एक विशाल ध्वज स्थापित किया गया। इसके अलावा परिसर के चारों कोनों पर भी ध्वज लगाए गए। ध्वज स्थापना के बाद पूरा मंदिर परिसर धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो उठा।
प्राचीन मंदिर के अवशेष आज भी मौजूद
विश्व हिंदू परिषद सरगुजा के जिलाध्यक्ष विनीत गुप्ता ने बताया कि ग्राम बेनीपुर में माता नाथल देवी के प्राचीन मंदिर के अवशेष आज भी मौजूद हैं और स्थल पर बाउंड्रीवॉल भी निर्मित है। उनके अनुसार प्राचीन समय से ही बैगा, गुनिया, देवार और ग्रामीण समुदाय यहां पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण परंपराओं में होने वाले विभिन्न पूजा-पाठ में माता नाथल देवी की भी आराधना की जाती रही है। लोक मान्यता के अनुसार उन्हें माता कामाख्या के लघु स्वरूप के रूप में भी पूजा जाता है।


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